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अरविंद कौर: परिवार ने मुंह मोड़ा तो पत्नी ने बचाई जान
ब्यूरो/अमर उजाला, फतेहाबाद।
Updated Tue, 08 Mar 2016 12:42 PM IST
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अरविंद कौर बोलीं, मुश्किल घड़ी में हार मानकर नहीं हौसले से लेना चाहिए काम
- फोटो : file
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गुरजीत सिंह मल्होत्रा पेशे से जिला अग्रणी बैंक कार्यालय में डिप्टी मैनेजर खुद के जीवन को अपनी पत्नी की देन बताते हैं। कहते हैं आज जो कुछ भी हैं अपनी पत्नी की वजह से हैं। हों भी क्यों ना बीवी ने उस समय साथ दिया, परिवार के लोग पीछे हट गए। उस वक्त वो नई जिंदगी देने के लिए आगे आई जिसे वह अपनी दूसरी पत्नी के रूप में लेकर आए।
पहली पत्नी की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। गुरजीत सिंह मल्होत्रा की दोनों किडनी डैमेज होने पर दूसरी बीवी अरविंद कौर ने हिम्मत से काम लिया और अपनी किडनी देते हुए पति को नई जिंदगी दी। आज उसी बदौलत मल्होत्रा अपनी बीवी व बच्चों के साथ हंसी-खुशी जिंदगी बिता रहे हैं। अरविंद कौर महिलाओं को भी संदेश देती हैं कि मुश्किल खड़ी में हार मानकर नहीं हिम्मत से काम लेना चाहिए।
जीएस मल्होत्रा बताते हैं कि वह अपने परिवार जिसमें पहली पत्नी बलविंद्र कौर, बेटी गुरअशिश के साथ दिल्ली से फतेहाबाद लौट रहे थे। 4 मई 1997 को हांसी के पास ट्रक की कार के साथ हुई टक्कर में पत्नी व बेटी चल बसे। बड़ी बेटी जीविका जो कि साढ़े 6 साल की तथा बेटा सुमाही ढाई साल का था। परिवार की सलाह पर दोबारा शादी करने का निर्णय लिया। 5 अक्तूबर 2010 को अरविन्द कौर जिंदगी में आई, जिसके पति की बीमारी के कारण मृत्यु हो गई थी।
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अरविंद कौर अपनी बेटी अर्शदीप के साथ परिवार में घुल मिल गई। चार महीने बाद उसके पति की किडनी में प्रोब्लम शुरू हो गई, जो बढ़ती ही चली गई। डाक्टरों ने दोनों किडनियों को डैमेज घोषित कर दिया। किडनी ट्रांसलेट करवाने की नौबत आई तो परिजन भी पीछे हट गए। ऐसे मुश्किल हाताल में अरविंद कौर ने साथ दिया। डाक्टरों ने सभी चेकअप के बाद पत्नी की किडनी लेने के लिए हां कर दिया। 28 मार्च 2014 को ऑपरेशन हुआ और पत्नी की एक किडनी गुरजीत सिंह मल्होत्रा को ट्रांसलेट कर दी गई। बेड रेस्ट के बाद जिंदगी ने नई रफ्तार पकड़ ली।
पति की मौत के बाद शोक लगा लेकिन उसे कोई नहीं रोक सकता था। दूसरी शादी हुई और उसके चार महीने बाद पता चला कि दूसरे पति की किडनी खराब हैं। सुनकर एक बार तो झटका लगा, लेकिन हिम्मत से काम लिया और सोच लिया कि हार नहीं माननी चाहे कुछ हो जाए। महिलाओं को यही कहना चाहूंगी कि दुख की खड़ी में हिम्मत से काम लेना चाहिए।
अरविंद कौर
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पहली पत्नी की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। गुरजीत सिंह मल्होत्रा की दोनों किडनी डैमेज होने पर दूसरी बीवी अरविंद कौर ने हिम्मत से काम लिया और अपनी किडनी देते हुए पति को नई जिंदगी दी। आज उसी बदौलत मल्होत्रा अपनी बीवी व बच्चों के साथ हंसी-खुशी जिंदगी बिता रहे हैं। अरविंद कौर महिलाओं को भी संदेश देती हैं कि मुश्किल खड़ी में हार मानकर नहीं हिम्मत से काम लेना चाहिए।
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जीएस मल्होत्रा बताते हैं कि वह अपने परिवार जिसमें पहली पत्नी बलविंद्र कौर, बेटी गुरअशिश के साथ दिल्ली से फतेहाबाद लौट रहे थे। 4 मई 1997 को हांसी के पास ट्रक की कार के साथ हुई टक्कर में पत्नी व बेटी चल बसे। बड़ी बेटी जीविका जो कि साढ़े 6 साल की तथा बेटा सुमाही ढाई साल का था। परिवार की सलाह पर दोबारा शादी करने का निर्णय लिया। 5 अक्तूबर 2010 को अरविन्द कौर जिंदगी में आई, जिसके पति की बीमारी के कारण मृत्यु हो गई थी।
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अरविंद कौर अपनी बेटी अर्शदीप के साथ परिवार में घुल मिल गई। चार महीने बाद उसके पति की किडनी में प्रोब्लम शुरू हो गई, जो बढ़ती ही चली गई। डाक्टरों ने दोनों किडनियों को डैमेज घोषित कर दिया। किडनी ट्रांसलेट करवाने की नौबत आई तो परिजन भी पीछे हट गए। ऐसे मुश्किल हाताल में अरविंद कौर ने साथ दिया। डाक्टरों ने सभी चेकअप के बाद पत्नी की किडनी लेने के लिए हां कर दिया। 28 मार्च 2014 को ऑपरेशन हुआ और पत्नी की एक किडनी गुरजीत सिंह मल्होत्रा को ट्रांसलेट कर दी गई। बेड रेस्ट के बाद जिंदगी ने नई रफ्तार पकड़ ली।
पति की मौत के बाद शोक लगा लेकिन उसे कोई नहीं रोक सकता था। दूसरी शादी हुई और उसके चार महीने बाद पता चला कि दूसरे पति की किडनी खराब हैं। सुनकर एक बार तो झटका लगा, लेकिन हिम्मत से काम लिया और सोच लिया कि हार नहीं माननी चाहे कुछ हो जाए। महिलाओं को यही कहना चाहूंगी कि दुख की खड़ी में हिम्मत से काम लेना चाहिए।
अरविंद कौर