एक युद्ध...पटाखों के विरुद्ध : ट्राइसिटी के लोग बोले- पटाखों का करेंगे बहिष्कार.. दीयों से मनाएंगे त्योहार
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दीवाली दीपोत्सव का त्योहार है। समय बदलने के साथ-साथ इस त्यौहार को मनाने का तरीका भी बदल गया है। लोग अब दीपावली पर तेज पटाखे फोड़कर प्रकृति को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे हमारे आसपास का वातावरण प्रदूषित होता ही है साथ में कई लोगों को सांस लेने में समस्या का सामना करना पड़ता है।
अमर उजाला ने इसी समस्या को देखते हुए ‘एक युद्ध पटाखों के विरुद्ध’ अभियान शुरू किया है। इस अभियान को ट्राइसिटी के लोगों का भरपूर समर्थन मिल रहा है। आइए कोरोना काल में इस बार दिवाली पर पटाखे न चलाने का प्रण लेकर पर्यावरण को प्रदूषण होने से बचाएं।
जहरीले केमिकल से स्वास्थ्य पर पड़ता है प्रभाव
पटाखों से ध्वनि और वायु प्रदूषण तो फैलता ही है, साथ ही दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ जाती है। पटाखे फोड़ने से गंदगी फैलती है। जहरीले केमिकल लोगों के स्वास्थ्य को खराब करते हैं। ऐसे में सभी को सुरक्षित दीपावली मनानी चाहिए। दीपावली खुशियां बांटने का त्यौहार है। लोगों को बीमारियां बांटने से बचें। - हरविंदर सिंह, सेक्टर- 42
पटाखे न फोड़ने से आने वाली पीढ़ी को मिलेगी सीख
साफ वातावरण आने वाली पीढ़ी के लिए भी बेहतर होगा। पटाखे न फोड़ने से उनको भी सीख मिलेगी। पटाखे फोड़ने से प्रदूषण बढ़ता है। पर्यावरण बचाने के लिए पटाखों से परहेज जरूरी है। आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित रखने के लिए हमें आगे आना चाहिए और पटाखे न छोड़ने का प्रण लेना चाहिए। इससे हम दूसरों के साथ खुद को भी सुरक्षित रख सकेंगे। - जैसमीन कौर, सेक्टर- 45
पटाखों से करें परहेज.. पौधा देकर मनाएं दिवाली
पूरा विश्व कोरोना की चपेट में है। दूसरी तरफ दीपावली के दौरान पटाखे फोड़ने से प्रदूषण बढ़ जाता है। हमें प्रदूषण बढ़ाने के बजाय उसको बचाने के बारे में सोचना चाहिए। पर्यावरण को पेड़-पौधों से बचाया जा सकता है। इसलिए दिवाली पर संकल्प लें कि पटाखे फोड़ने की जगह एक-दूसरे को पौधा देखकर त्यौहार मनाएं। - जसलीन बेदी, सेक्टर- 44
पटाखों का करें त्याग.. दीपोत्सव से मनाएं त्यौहार
पटाखों से आग लगने का खतरा बना रहता है। इसके अलावा पटाखे जलाने से बच्चों के हाथ और जलने की दुर्घटनाएं सामने आती हैं। वाहनों और फैक्ट्रियों की संख्या ज्यादा होने के कारण पहले ही हवा प्रदूषित है। ऐसे में दिवाली पर प्रदूषण को दस गुना ज्यादा बढ़ा देते हैं। इसलिए पटाखों को त्याग दें और दीपों की दीपावली मनाएं। - गोल्डी, सेक्टर- 34
मिट्टी के दीएं जलाकर बांटें खुशी
दिवाली खुशियों का त्योहार है, शोरशराबे का नहीं। खुशियों के प्रयास में हम पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं। हमें इलेक्ट्रॉनिक चीजों की बजाय मिट्टी के दीए अधिक प्रयोग करने चाहिए। इससे दीए बनाने वाले लोगों को भी आर्थिक सहायता मिलेगी और हमारी परंपरा भी बनी रहेगी। साथ ही बिजली की बचत भी होगी। - जसलीन कौर, सेक्टर- 26
पटाखें जलाकर प्रकृति को न करें प्रदूषित
वातावरण को साफ रखना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। त्योहारों पर वातावरण को प्रदूषित करना सही नहीं है। प्रदूषण से मनुष्य को ही नहीं बल्कि पूरी प्रकृति को नुकसान होता है। इस दीवाली पर हमें पटाखे ना जलाने का संकल्प लेना चाहिए। साथ ही छोटे बच्चों को भी अपने पर्यावरण को बचाने के प्रति प्रेरित करना चाहिए, जिससे वह जागरूक हो सकें। - जसपिंदर सिंह, सेक्टर- 44बी
पूजा-पाठ के साथ दीपावली मनाएं
दीपावली के दौरान घी के दीये जलाकर प्राचीन सनातन परंपरा के अनुसार पूजा-पाठ के साथ दीपावली पर्व मनाना चाहिए। दीपावली खुशियों का त्योहार है। पटाखे जलाने से बीमार लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ता है और पटाखों के धुएं से बीमारी फैलने की संभावना बढ़ जाती है। -पवन कुमारी, समाजसेवी
पटाखों को न और दीयों को हां बोलिए
दीपावली पर एक दूसरे से अधिक पटाखे जलाने का चलन बढ़ने लगा है। वातावरण, पृथ्वी और लोगों के जीवन को बचाने के लिए हमें दीपावली पर पटाखों को न और दीयों को हां बोलनी चाहिए। इस बार मैं खुद भी पटाखे नहीं जलाऊंगी और साथियों को भी पटाखे न जलाने के लिए प्रेरित करूंगी। -दिशा चौहान, छात्रा
पटाखे ना जलाने का लें प्रण
मैं दिवाली पर पटाखे ना जलाकर लोगों को पर्यावरण को बचाने का संदेश दूंगा, ताकि हम सभी साफ सुथरे माहौल में रह सकें। इसकी शुरुआत आने वाली दिवाली से करूंगा और अपने आसपास रहने वाले लोगों को भी पटाखे न चलाने की अपील करूंगा। जिस तरह मैंने पटाखे ना जलाने का प्रण लिया है, उसी तरह बाकी लोगों को भी ऐसा ही करना चाहिए। - दिशांत सिंगला, विद्यार्थी।
पटाखों की जगह जलाएं दीये
दिवाली का अर्थ है दीयों की त्योहार। इसलिए हमें पटाखों पर पैसे खर्च करने की बजाय घरों के बाहर दीये जलाकर रोशनी करनी चाहिए। इससे एक तो पर्यावरण दूषित होने से बचेगा साथ ही हम साफ हवा में सांस ले पाएंगे। जबकि इस दिवाली मैं पटाखे नहीं चलाऊंगा, बल्कि घर के बाहर दीपक जलाकर व पौधे लगाकर ग्रीन दिवाली का संदेश दूंगा। - चंदन, विद्यार्थी।
पटाखे चलाना नुकसानदायक
दिवाली खुशियों का त्योहार है। खुशियां बांटने के लिए आतिशबाजी जरूरी नहीं है। मैं पिछले साल की तरह इस बार भी पटाखे नहीं चलाऊंगा। पटाखों का शोर व धुआं जहां बुजुर्गों व बच्चों के लिए परेशानी पैदा करता है वहीं, जानवरों व पक्षियों को भी इससे नुकसान पहुंचता है। कोरोना के बीच जब सभी को साफ वातावरण व ऑक्सीजन की जरूरत है तो ऐसे समय में पटाखों से प्रदूषण पैदा करना मानवता के लिए नुकसानदायक है। हमें पटाखों से पर्यावरण प्रदूषित करने की बजाय आपस में मिलकर दिवाली की खुशियों को बांटना चाहिए। - निलाक्ष शर्मा
जरूरतमंदों की मदद करना पसंद
मुझे पटाखों का शोर व धुआं पसंद नहीं है। इनसे निकलने वाला धुआं जहरीली गैस पैदा करता है जिससे न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है, बल्कि बुजुर्गों व बीमार लोगों को भी परेशानी होती है। पटाखों के शोर से जानवर भी परेशान होते हैं, साथ ही पर्यावरण हितैषी जीव व कीटाणु भी शोर व धुएं से खत्म हो जाते हैं। हजारों रुपये पटाखों पर खर्च करने की जगह मैं किसी जरूरतमंद की मदद करना पसंद करूंगा। पटाखों पर पैसा खर्च करने की बजाय जरूरतमंद को ऐसी चीज देना जिससे उसे खुशी मिले मुझे पसंद है। मैं अपने दोस्तों को भी इसके लिए प्रेरित कर रहा हूं। - रुद्र प्रताप
हमें समझनी होगी जिम्मेदारी
हमें बचपन से ही सिखाया गया है कि पटाखे जलाने से ही दीवाली मनाई जाती है। हम हर साल पटाखे जलाकर अपने अभिभावक के हजारों रुपये खर्च कर देते हैं। लेकिन इस बार पटाखे नहीं जलाएंगे ताकि पिछले साल की तरह प्रदूषण न हो और लोगों को सांस लेने में दिक्कत न हो। हमें दीवाली पर अपने पैसे पटाखों पर बर्बाद करने की बजाय पुस्तकें लेनी चाहिए, ताकि हमें कुछ शिक्षा मिल सके। विद्यार्थी होने के नाते हमें अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और अपने घर के पास रहने वाले लोगों को जागरूक करना होगा। अपने दोस्तों को भी पटाखे ना जलाने के लिए उत्साहित करूंगा। - लवीन व्यास
पटाखों में मत बर्बाद करें पैसे
मेरी नजर में पटाखों पर हम पैसा ही बर्बाद करते हैं। सैकड़ों रुपये के पटाखों को घर में लाते हैं और उसके बाद उन पटाखों को हम आधे घंटे में जला डालते हैं। यदि हम इसी पैसे को किसी जरूरतमंद को दें तो शायद हम न सिर्फ किसी की मदद करेंगे बल्कि दूसरों के लिए एक मिसाल भी कायम करेंगे। - पार्थ गोयल, छात्र, पंचकूला
दुर्घटना के जनक हैं पटाखे
पटाखों को जलाने से कई दुर्घटनाएं होती हैं। मैंने देखा है कि कई बार राकेट जैसे खतरनाक पटाखे दूसरों के घरों में घुस जाते हैं। यह काफी हृदय विदारक होता है। इससे न सिर्फ चोटिल होने का खतरा होता है बल्कि घर में आग लगने का खतरा भी होता है। इसलिए यदि पटाखों को न चलाएं तो ज्यादा अच्छा होगा। - कार्तिक बंसल, छात्र, पंचकूला
पटाखों को नहीं दीये जलाएं
दिवाली पर पटाखे न जलाकर दीयों को जलाएं। दिवाली तो दीयों का ही त्योहार होता है। दीये नई रोशनी के साथ नई ऊर्जा देते हैं। दिवाली के मौके पर पटाखों के कारण कई हादसे होते हैं। इसी वजह से न तो मैं पटाखे चलाऊंगा। इसके साथ ही अपने दोस्तों को भी पटाखों को चलाने से मना करूंगी। आर्यन सैनी, छात्र