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पंजाब: सरकारी कर्मियों का हल्ला बोल, डीए, ओपीएस समेत अन्य मांगों को लेकर करेंगे प्रदर्शन; कामकाज रहेगा ठप

Mon, 07 Sep 2026 08:41 PM IST
शाहिल शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़ Published by: शाहिल शर्मा Updated Mon, 07 Sep 2026 08:41 PM IST
सार

कर्मचारी नेताओं ने साफ कहा कि नेताओं के तबादले करने से कर्मचारियों का संघर्ष प्रभावित नहीं होगा। वे अपने हकों की लड़ाई हर हाल में लड़ते रहेंगे।

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Government employees in Punjab to observe pen-down strike on Tuesday.
विभिन्न कर्मचारी संगठनों के नेता - फोटो : वीडियो ग्रैब

विस्तार

बकाया डीए, पुरानी पेंशन बहाली समेत अन्य मांगों के समर्थन में मंगलवार को पंजाब के सभी सरकारी कर्मचारी कामकाज ठप कर सांकेतिक भूख हड़ताल करेंगे। सभी जिलों के डीसी कार्यालयों, निदेशालयों और सचिवालिय स्तर पर प्रदर्शन किया जाएगा। एक दिन की पेन डाउन स्ट्राइक के बाद विभिन्न कर्मचारी जत्थेबंदियों की ज्वाइंट एक्शन कमेटी आगामी रणनीति तय करेगी। अगले चरण में विधायकों और मंत्रियों के आवास घेरे जाने की योजना है।

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उधर, कर्मचारी नेताओं के तबादले आदेश भी जारी हो रहे हैं। इस पर कर्मचारी नेताओं ने साफ कहा कि नेताओं के तबादले करने से कर्मचारियों का संघर्ष प्रभावित नहीं होगा। वे अपने हकों की लड़ाई लड़ रहे हैं। इसी मसले पर पंजाब सरकार ने करीब 85 हजार उन कर्मचारियों का डीए 42 से बढ़ाकर 60 फीसदी करने का प्रस्ताव दिया है, जिन्हें 17 जुलाई 2020 के बाद भर्ती किया गया और जिन पर केंद्रीय वेतनमान लागू है। इससे सरकार पर करीब 900 करोड़ रुपये सालाना अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। यह प्रस्ताव कैबिनेट सब-कमेटी ने तैयार किया है और अंतिम मंजूरी मुख्यमंत्री स्तर पर होनी है।

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सरकार के इस कदम को नेताओं ने कर्मचारियों को बांटने और आंदोलन को कमजोर करने की साजिश बताई है। पीएसएस ऑफिसर्स एसोसिएशन के प्रदेश प्रधान मंजीत सिंह रंधावा ने कहा, यह संघर्ष करीब सवा तीन लाख कर्मचारियों और चार लाख पेंशनरों का है। कर्मचारी पूरी तरह से एकजुट हैं। उन्होंने कहा, सरकार द्वारा जिन 85 हजार कर्मचारियों को 60 प्रतिशत डीए दिए जाने की योजना तैयार की जा रही है, उनमें से बहुत से कर्मचारी तो ऐसे हैं, जिनकी सर्विस को अभी तीन साल का समय पूरा नहीं हुआ है।

उनके अनुसार सेवा शर्ताें के तहत ऐसे कर्मचारियों को तीन साल तक भत्तों का लाभ नहीं मिलेगा। केवल बेसिक सैलरी ही दी जानी है। ऐसे में उन्हें यह लाभ मिल ही नहीं सकता। यह सिर्फ कर्मचारियों को बांटने की साजिश है। कर्मचारी नेता कुलवंत सिंह ने कहा कि सामान्य राज्य प्रशासनिक विभाग कर्मचारी नेताओं के तबादले कर रहा है। यह उचित नहीं है क्योंकि लोकतंत्र में अपना हक मांगना और उसके लिए संघर्ष करना गलत नहीं है।
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