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घर में पत्नी की लाश, संस्कार के लिए बैंक की लाइन में 5 घंटे लगा रहा पति

Fri, 02 Dec 2016 07:17 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पानीपत(हरियाणा)
ब्यूरो/अमर उजाला, पानीपत(हरियाणा) Updated Fri, 02 Dec 2016 07:17 PM IST
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wife died due to cancer and husband has no money for funeral, standing out bank in line
पत्नी के अंतिम संस्कार के लिए बुजुर्ग को नहीं मिले पैसे
पत्नी की मौत और जेब में सिर्फ 500 का नोट, जिसे दुकानदारों ने लेने से मना कर दिया। समस्या खड़ी हुई कि पत्नी का अंतिम संस्कार कैसे हो? कहीं से मदद मिलते न देखकर बुजुर्ग को बैंक की लाइन में लगना पड़ा। मामला हरियाणा के पानीपत का है।
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कैंसर पीड़ित पत्नी की मौत का गम और अंटी में केवल 500 रुपये का पुराना नोट। बुजुर्ग पत्नी का शव घर में छोड़कर रुपये निकालने के लिए बैंक की लाइन में खड़ा हुआ तो वहां भी उसे जवाब मिला कि कैश खत्म हो गया है। करीब पांच घंटे लाइन में खड़ा होने के बाद उसे तीन हजार रुपये तभी मिल सके जब उसे रोता देखकर लोगों ने बैंक कर्मचारियों पर दबाव बनाया।
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हालांकि बैंक प्रबंधन का कहना है कि लाइन में बहुत से लोग खड़े थे, उन्हें वृद्ध की व्यथा का पता चला तो तत्काल रकम का भुगतान कर दिया गया। राजनगर निवासी राजेंद्र पांडेय को नोटबंदी का ऐसा कड़वा अनुभव हुआ कि पत्नी की मौत का गम और भारी हो गया।
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पैसों के लिए 5 घंटे लाइन में लगा रहा बुजुर्ग

wife died due to cancer and husband has no money for funeral, standing out bank in line
पत्नी के अंतिम संस्कार के लिए बुजुर्ग को नहीं मिले पैसे
राजेंद्र ने बताया कि पत्नी चंद्र कलां पिछले कई सालों से कैंसर से पीड़ित थी। उसने बुधवार को हालत बिगड़ने पर पत्नी चंद्र कलां को पीजीआई खानपुर में दाखिल कराया था। इलाज के दौरान वीरवार सुबह उसकी मौत हो गई थी। उसके अंतिम संस्कार के लिए मात्र 500 का नोट था। वह अंतिम क्रिया का सामान लेने गया तो दुकानदारों ने नोट लेने से मना कर दिया।

इस पर वह पैसे निकलवाने के लिए जीटी रोड स्थित एक केंद्रीयकृत बैंक में गया। वहां लोगों की लंबी लाइन लगी थी। उसे जल्दी थी सो वह बैंक कर्मचारियों के सामने गिड़गिड़ाया लेकिन किसी ने एक नहीं सुनी। वह पैसों के लिए पांच घंटे तक लाइन में लगा रहा। तीन बजे बैंक कर्मचारियों ने बताया कि कैश खत्म हो गया है। इस पर उसकी रुलाई फूट पड़ी।

लोगों ने उसे रोता देखकर उससे परेशानी के बारे में पूछा। हकीकत पता चलने पर लोगों ने  बैंक कर्मचारियों पर पैसे देने के लिए दबाव बनाया। तब कहीं जाकर उसको बैंक से तीन हजार रुपये मिल सके। इसके बाद घर जाकर शाम को उसने पत्नी का अंतिम संस्कार कराया।

मेरी जानकारी में ऐसा कोई मामला नहीं है। ऐसा है तो बहुत गलत हुआ है। मैं इसकी खुद रिपोर्ट लूंगा और जांच कर उचित कार्रवाई करूंगा।
- राकेश वर्मा, एलडीएम पानीपत
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