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घरेलू हिंसा से महिलाओं के संरक्षण अधिनियम को सही ढंग से लागू क्यों नहीं किया : हाईकोर्ट

Fri, 07 Feb 2025 01:40 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 07 Feb 2025 01:40 AM IST
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Why the Protection of Women from Domestic Violence Act was not implemented properly: High Court
चंडीगढ़। महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए बने कानून को सही तरीके से लागू न करने का आरोप लगाते हुए दाखिल जनहित याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र, हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ प्रशासन से जवाब मांगा है।
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याचिका दाखिल करते हुए चंडीगढ़ निवासी एडवोकेट शर्मिला शर्मा ने बताया कि घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 (डीवी अधिनियम) का सही प्रकार से पालन नहीं किया जा रहा है। याचिका में कई ऐसे मामलों का हवाला दिया गया, जहां घरेलू हिंसा की पीड़िताओं को अधिनियम के तहत पारित आदेशों का क्रियान्वयन न होने के चलते परेशानी झेलनी पड़ी। राज्य ने घरेलू हिंसा की पीड़ित महिलाओं को प्रभावी संरक्षण अधिकार सुनिश्चित करने के लिए इस अधिनियम को बनाया था लेकिन आश्चर्यजनक रूप से अधिनियम में आदेश लागू करने को लेकर कोई सटीक प्रावधान नहीं किया गया। डीवी अधिनियम के प्रावधान के तहत पारित आदेशों को केवल सीआरपीसी के प्रावधानों का सहारा लेकर लागू किया जा सकता है। डीवी अधिनियम की धारा 20 (6) के तहत मजिस्ट्रेट आरोपी पर मौद्रिक राहत आदेश को लागू करने के लिए स्वत: संज्ञान ले सकता है लेकिन ऐसे बहुत कम मामले होते हैं। यह प्रावधान स्वरोजगार वाला व्यक्ति होने पर पीड़िताओं के लिए किसी काम का नहीं है, क्योंकि उन्हें मौद्रिक राहत आदेश के पालन के लिए सीआरपीसी की धारा 128 या भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 147 का सहारा लेना होगा।
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याचिका में कहा गया है कि डीवी अधिनियम की धारा 31 संरक्षण आदेशों के उल्लंघन के लिए दंड का प्रावधान करती है, लेकिन यह केवल दंड के लिए है, लेकिन इसके क्रियान्वयन के लिए कोई प्रक्रिया नहीं है। कोर्ट को बताया गया कि डीवी अधिनियम के प्रावधान एक-दूसरे के साथ सामंजस्य में नहीं हैं। एडवोकेट शर्मिला ने याचिका में यह भी आरोप लगाया है कि पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के हर जिले में डीवी अधिनियम की धारा 8 के तहत संरक्षण अधिकारियों की नियुक्ति नहीं की गई है। हालांकि, हरियाणा सरकार ने अदालत को बताया है कि हरियाणा के सभी 22 जिलों में संरक्षण अधिकारियों की नियुक्ति की गई है और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी ग्राम स्तर पर संरक्षण एजेंट के रूप में कार्य करने के लिए नामित किया गया है।
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