{"_id":"62cc8decdb7e69059b1ffea2","slug":"what-happened-to-the-dead-line-of-three-months-only-18-days-are-left-how-will-34-health-and-wellness-centers-be-hi-tech-chandigarh-news-pkl4562866188","type":"story","status":"publish","title_hn":"क्या हुआ तीन महीने की डेड लाइन का.. बचे हैं मात्र 18 दिन, कैसे हाईटेक होंगे 34 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
क्या हुआ तीन महीने की डेड लाइन का.. बचे हैं मात्र 18 दिन, कैसे हाईटेक होंगे 34 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर
विज्ञापन
चंडीगढ़। प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल ने 27 अप्रैल को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की स्टेट जनरल बॉडी की बैठक में घोषणा की थी कि शहर के 34 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर को तीन महीने के अंदर हाईटेक बना दिए जाएंगे। निर्देश दिया था कि इन सेंटरों की गुणवत्ता और सुविधाएं ऐसी होगी कि वह देश के अन्य राज्यों के लिए आदर्श बनेगा। उस घोषणा के बाद 72 दिन गुजर चुके हैं लेकिन उन सेंटरों के स्थिति अब भी जस की तस है। चौंकाने वाली बात यह है कि जिन केंद्रों की प्रगति रिपोर्ट की हर 15 दिन पर बैठक की जानी थी, उसकी अब किसी को सुध ही नहीं।
इन केंद्रों में ड्यूटी करने वाले कर्मचारी अच्छे दिन आने की उम्मीद में बरसात के दौरान घुटने तक पानी से भरे कमरों में बैठ कर काम कर रहे हैं। 72 दिनों में उन केंद्रों की छत तक ठीक नहीं की गई है जबकि योजना के अनुसार उस केंद्र के भवन की स्थिति बेहतर करने के साथ ही उसके खिड़की-दरवाजे बदलने, शौचालय की बेहतर व्यवस्था करने की भी बात की गई है। अधिकारियों के अनुसार कार्य योजना तैयार करने व सामग्री के टेंडर की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। ऐसे में लोगों का कहना है कि जब सरकारी व्यवस्था की सुस्त चाल पता थी तो इसके लिए तीन महीने की समय सीमा तय करने का क्या मतलब था।
बॉक्स
लगातार बैठक, नतीजा कुछ भी नहीं
धर्मपाल के निर्देशानुसार अधिकारी लगातार बैठके तो कर रहे हैं लेकिन उसके आगे की गाड़ी अटकी हुई है। इसकी प्रगति रिपोर्ट पूछने पर जवाब मिल रहा है कि कार्य प्रगति पर है। योजना से जुड़ी तैयारी अंतिम चरण में है लेकिन स्थिति कुछ और ही हकीकत बयां कर रही है। शहर के हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर अधिकारी पहुंच तो रहे हैं उसका मौका मुआयना भी किया जा रहा है लेकिन उसके आगे कुछ नहीं किया जा रहा।
विज्ञापन
बॉक्स
तीन महीने में ऐसे होना था कायाकल्प
इस योजना के तहत 36 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों को नया स्वरूप प्रदान करना था। इसमें उसके भवन का जीर्णोद्धार करने के साथ ही वहां ई-संजीवनी, टेली मेडिसिन सुविधा, नए फर्नीचर और नए उपकरण उपब्लध कराएं जाने हैं। इसके साथ ही इन केंद्रों पर डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ और दवा की उपलब्धता भी सुनिश्चित करानी है लेकिन 90 में से 72 दिन सिर्फ कागजी कार्रवाई पूरी करने में ही गुजर गई है।
इनकी योजना भी लटकाएं रखी हैं अब तक
सरकार की तरफ से शहर के नौ हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर को अपग्रेड करने के लिए एक साल पहले ही 6.75 करोड़ रुपये बजट दे दिया गया है। कार्य योजना तक तैयार है। इसके बावजूद उस योजना को शुरू नहीं किया जा रहा। इसमें हेल्थ एंड वेलनेस रायपुरखुर्द, बडहेरी, खुड्डा जस्सू, किशनगढ़, रायपुर कला, खुड्डा लाहौरा, खुड्डा अलीशेर, इंदिरा कॉलोनी और सेक्टर- 44 स्थित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर शामिल हैं।
इनसेट-
क्या कहते हैं लोग
ये तो होना ही था
आखिर कोई सरकारी योजना इतनी तेजी से कैसे पूरी हो सकती है। यह तो होना ही था लेकिन यह समझ से परे है कि प्रशासक के सलाहकार ने इन सेटरों को हाईटेक करने के लिए तीन महीने की समय सीमा क्यों तय की थी।
-आदेश श्रीवास्तव, मौलीजागरां
सरकारी योजना का यही हाल
ये सिर्फ हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की योजना की ही बात नहीं है। सभी सरकारी योजनाएं बनने के बाद ठंडे बस्ते में चली जाती हैं लेकिन वाहवाही बटोरने के लिए ऐसी घोषणाएं नहीं की जानी चाहिए।
-कमलेश सिंह, हल्लोमाजरा
विज्ञापन
इन केंद्रों में ड्यूटी करने वाले कर्मचारी अच्छे दिन आने की उम्मीद में बरसात के दौरान घुटने तक पानी से भरे कमरों में बैठ कर काम कर रहे हैं। 72 दिनों में उन केंद्रों की छत तक ठीक नहीं की गई है जबकि योजना के अनुसार उस केंद्र के भवन की स्थिति बेहतर करने के साथ ही उसके खिड़की-दरवाजे बदलने, शौचालय की बेहतर व्यवस्था करने की भी बात की गई है। अधिकारियों के अनुसार कार्य योजना तैयार करने व सामग्री के टेंडर की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। ऐसे में लोगों का कहना है कि जब सरकारी व्यवस्था की सुस्त चाल पता थी तो इसके लिए तीन महीने की समय सीमा तय करने का क्या मतलब था।
विज्ञापन
बॉक्स
लगातार बैठक, नतीजा कुछ भी नहीं
धर्मपाल के निर्देशानुसार अधिकारी लगातार बैठके तो कर रहे हैं लेकिन उसके आगे की गाड़ी अटकी हुई है। इसकी प्रगति रिपोर्ट पूछने पर जवाब मिल रहा है कि कार्य प्रगति पर है। योजना से जुड़ी तैयारी अंतिम चरण में है लेकिन स्थिति कुछ और ही हकीकत बयां कर रही है। शहर के हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर अधिकारी पहुंच तो रहे हैं उसका मौका मुआयना भी किया जा रहा है लेकिन उसके आगे कुछ नहीं किया जा रहा।
विज्ञापन
बॉक्स
तीन महीने में ऐसे होना था कायाकल्प
इस योजना के तहत 36 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों को नया स्वरूप प्रदान करना था। इसमें उसके भवन का जीर्णोद्धार करने के साथ ही वहां ई-संजीवनी, टेली मेडिसिन सुविधा, नए फर्नीचर और नए उपकरण उपब्लध कराएं जाने हैं। इसके साथ ही इन केंद्रों पर डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ और दवा की उपलब्धता भी सुनिश्चित करानी है लेकिन 90 में से 72 दिन सिर्फ कागजी कार्रवाई पूरी करने में ही गुजर गई है।
इनकी योजना भी लटकाएं रखी हैं अब तक
सरकार की तरफ से शहर के नौ हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर को अपग्रेड करने के लिए एक साल पहले ही 6.75 करोड़ रुपये बजट दे दिया गया है। कार्य योजना तक तैयार है। इसके बावजूद उस योजना को शुरू नहीं किया जा रहा। इसमें हेल्थ एंड वेलनेस रायपुरखुर्द, बडहेरी, खुड्डा जस्सू, किशनगढ़, रायपुर कला, खुड्डा लाहौरा, खुड्डा अलीशेर, इंदिरा कॉलोनी और सेक्टर- 44 स्थित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर शामिल हैं।
इनसेट-
क्या कहते हैं लोग
ये तो होना ही था
आखिर कोई सरकारी योजना इतनी तेजी से कैसे पूरी हो सकती है। यह तो होना ही था लेकिन यह समझ से परे है कि प्रशासक के सलाहकार ने इन सेटरों को हाईटेक करने के लिए तीन महीने की समय सीमा क्यों तय की थी।
-आदेश श्रीवास्तव, मौलीजागरां
सरकारी योजना का यही हाल
ये सिर्फ हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की योजना की ही बात नहीं है। सभी सरकारी योजनाएं बनने के बाद ठंडे बस्ते में चली जाती हैं लेकिन वाहवाही बटोरने के लिए ऐसी घोषणाएं नहीं की जानी चाहिए।
-कमलेश सिंह, हल्लोमाजरा