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Chandigarh News: मौसम का बदला मिजाज, न्यूनतम तापमान 1.78 डिग्री बढ़ा
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चंडीगढ़। जलवायु परिवर्तन का सीधा प्रभाव जन-जीवन पर दिखना शुरू हो गया है। पिछले सात दशक में चंडीगढ़ का औसत न्यूनतम तापमान 1.78 डिग्री जबकि अधिकतम तापमान 0.63 डिग्री सेल्सियस बढ़ गया है। ये शहर के लिए खतरे की घंटी है। इसका असर भी सामने आने लगा है। सर्दी के दिनों में देखा जा रहा है कि शहर के कुछ इलाकों में धूप निकली हुई है तो कहीं धुंध है।
जलवायु परिवर्तन आज एक बड़ा संकट है। इसी मुद्दे पर अमर उजाला व यूनिसेफ ने ऑनलाइन कार्यशाला संवाद का आयोजन किया। बताया गया कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव महिलाओं-बच्चों और समाज के कई अन्य वर्गों के स्वास्थ्य, विकास और जीवनशैली पर साफ दिख रहा है। चंडीगढ़ में भी स्थितियां बदल रही हैं। वर्ष 1951 में चंडीगढ़ की जनसंख्या सिर्फ 24,261 थी। पिछले छह दशकों (1951 से 2011) में चंडीगढ़ की जनसंख्या 44 गुना बढ़कर 10 लाख से ज्यादा हो चुकी है।
प्रशासन के अनुमान के अनुसार वर्तमान वर्ष में जनसंख्या करीब 12 लाख पहुंच गई है। तेजी से शहरीकरण और बढ़ते यातायात के कारण अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट (यूएचआईई) से शहर के तापमान में वृद्धि हो रही है। बढ़ती जनसंख्या भी तापमान में वृद्धि का कारण है। तापमान में थोड़ी सी भी वृद्धि लोगों को अलग-अलग तरीकों से प्रभावित कर सकती है।
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दशकों से ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में हुई वृद्धि
मौसम विज्ञान केंद्र चंडीगढ़ के निदेशक मनमोहन सिंह ने बताया कि पहले पहाड़ों पर देखा जाता था कि कुछ जगह पर बारिश हो रही है तो कहीं सूखा पड़ा है लेकिन पिछले कुछ सालों में मैदानी इलाकों में भी ऐसे बदलाव देखने को मिल रहे हैं। चंडीगढ़ में सेक्टरों के अनुसार भी ऐसा देखा जा रहा है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हर इलाके का तापमान अलग-अलग होता है। जलवायु परिवर्तन के अलावा अन्य कई कारणों की वजह से ऐसा हो रहा है। जनसंख्या और वाहनों की संख्या में वृद्धि के अलावा दशकों से ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में वृद्धि हुई है।
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जलवायु परिवर्तन आज एक बड़ा संकट है। इसी मुद्दे पर अमर उजाला व यूनिसेफ ने ऑनलाइन कार्यशाला संवाद का आयोजन किया। बताया गया कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव महिलाओं-बच्चों और समाज के कई अन्य वर्गों के स्वास्थ्य, विकास और जीवनशैली पर साफ दिख रहा है। चंडीगढ़ में भी स्थितियां बदल रही हैं। वर्ष 1951 में चंडीगढ़ की जनसंख्या सिर्फ 24,261 थी। पिछले छह दशकों (1951 से 2011) में चंडीगढ़ की जनसंख्या 44 गुना बढ़कर 10 लाख से ज्यादा हो चुकी है।
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प्रशासन के अनुमान के अनुसार वर्तमान वर्ष में जनसंख्या करीब 12 लाख पहुंच गई है। तेजी से शहरीकरण और बढ़ते यातायात के कारण अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट (यूएचआईई) से शहर के तापमान में वृद्धि हो रही है। बढ़ती जनसंख्या भी तापमान में वृद्धि का कारण है। तापमान में थोड़ी सी भी वृद्धि लोगों को अलग-अलग तरीकों से प्रभावित कर सकती है।
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दशकों से ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में हुई वृद्धि
मौसम विज्ञान केंद्र चंडीगढ़ के निदेशक मनमोहन सिंह ने बताया कि पहले पहाड़ों पर देखा जाता था कि कुछ जगह पर बारिश हो रही है तो कहीं सूखा पड़ा है लेकिन पिछले कुछ सालों में मैदानी इलाकों में भी ऐसे बदलाव देखने को मिल रहे हैं। चंडीगढ़ में सेक्टरों के अनुसार भी ऐसा देखा जा रहा है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हर इलाके का तापमान अलग-अलग होता है। जलवायु परिवर्तन के अलावा अन्य कई कारणों की वजह से ऐसा हो रहा है। जनसंख्या और वाहनों की संख्या में वृद्धि के अलावा दशकों से ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में वृद्धि हुई है।