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हमें और जीने की चाहत न होती, अगर तुम न होते..
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चंडीगढ़। हमें और जीने की चाहत न होती, अगर तुम न होते.. गायिका सचिता ने जैसे ही किशोर कुमार का यह बेहतरीन गीत गया तो लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया। इसके अलावा उन्होंने जब मुकद्दर का सिकंदर का गीत फेमस सांग ओ साथी रे तेरे बिना भी क्या जीना.. सुनाया तो समा बंध गया। मौका था हरफनमौला महान कलाकार किशोर कुमार के जन्मदिवस पर आयोजित सुनहरी यादों 2020 के आयोजन का।
ऑनलाइन हुए इस कार्यक्रम को ट्राइसिटी कल्चलर एसोसिएशन ने आयोजित किया। इस अवर पर हरियाणा के पूर्व आईएएस अॅाफिसर एसएस प्रसाद मुख्य मेहमान के रूप मे अपनी प्रस्तुति दी। सुनहरी यादें कार्यक्रम में किशोर कुमार को याद करते हुए ट्राइसिटी के लोकल सिंगर ने उनकी फिल्मों के बेहतरीन गाने गाकर खूब वाहवाही लूटी। इस दौरान एसडी शर्मा ने फूलों के रंग से.. दिल की कलम से और मेरे दिल ने तड़प के जब नाम तेरा पुकारा.. सुनाकर माहौल को रोमांचक बना दिया। वैभव ने कितने भी तू करले सितम.. ये दिन न होता बेचारा.. सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। अमित मुखर्जी ने दिल ऐसा किसी ने मेरा तोड़ा.. बर्बादी की तरफ ऐसा मोड़ा.. सुनाकर सबको भावविभोर कर दिया। शांतनु मिश्रा ने रिमझिम गिरे सावन.. गीत गाया। ट्राइसिटी कल्चलर एसोसिएशन के प्रधान शांतनु मिश्रा ने बताया कि उनकी एसोसिएशन पिछले साल से गानों के कार्यक्रमों को आयोजन कर रहा है। इसमें ट्राइसिटी के लोगों को प्लेटफार्म दिया है। यह पहली बार है जब हमें इस प्रोग्राम को ऑनलाइन करवाना पड़ रहा है। यह हमारे लिए यह नया अनुभव रहा।
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ऑनलाइन हुए इस कार्यक्रम को ट्राइसिटी कल्चलर एसोसिएशन ने आयोजित किया। इस अवर पर हरियाणा के पूर्व आईएएस अॅाफिसर एसएस प्रसाद मुख्य मेहमान के रूप मे अपनी प्रस्तुति दी। सुनहरी यादें कार्यक्रम में किशोर कुमार को याद करते हुए ट्राइसिटी के लोकल सिंगर ने उनकी फिल्मों के बेहतरीन गाने गाकर खूब वाहवाही लूटी। इस दौरान एसडी शर्मा ने फूलों के रंग से.. दिल की कलम से और मेरे दिल ने तड़प के जब नाम तेरा पुकारा.. सुनाकर माहौल को रोमांचक बना दिया। वैभव ने कितने भी तू करले सितम.. ये दिन न होता बेचारा.. सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। अमित मुखर्जी ने दिल ऐसा किसी ने मेरा तोड़ा.. बर्बादी की तरफ ऐसा मोड़ा.. सुनाकर सबको भावविभोर कर दिया। शांतनु मिश्रा ने रिमझिम गिरे सावन.. गीत गाया। ट्राइसिटी कल्चलर एसोसिएशन के प्रधान शांतनु मिश्रा ने बताया कि उनकी एसोसिएशन पिछले साल से गानों के कार्यक्रमों को आयोजन कर रहा है। इसमें ट्राइसिटी के लोगों को प्लेटफार्म दिया है। यह पहली बार है जब हमें इस प्रोग्राम को ऑनलाइन करवाना पड़ रहा है। यह हमारे लिए यह नया अनुभव रहा।
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