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Chandigarh News: 6.25 लाख की वोटर लिस्ट, वोट पड़े 15% भी नहीं<bha>;</bha> मृतकों के नाम भी शामिल

Tue, 22 Sep 2026 02:13 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 22 Sep 2026 02:13 AM IST
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Voter list of 6.25 lakh, yet less than 15% voted; names of the deceased also included
चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी सीनेट चुनाव के बाद 6.25 लाख मतदाताओं वाली ग्रेजुएट कांस्टीचुएंसी की सूची पर सवाल उठे हैं। रविवार को सिर्फ 14.68 फीसदी मतदान हुआ। सीनेटरों और उम्मीदवारों के अनुसार 1947 से सूची में नाम जुड़ते रहे लेकिन मृत हो चुके और विदेशों में बस चुके लोगों के नाम नहीं हटाए गए। अब सूची को अपडेट करने और मतदाताओं की सीनेट चुनाव में दिलचस्पी बढ़ाने की मांग उठ रही है।
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उम्मीदवार कमलजीत सिंह का दावा है कि सूची में करीब ढाई लाख मृत लोगों के नाम हैं। उनके अनुसार साढ़े तीन लाख मतदाताओं में करीब एक लाख ही वोट डालते हैं। इस बार अबोहर, मलोट, मुक्तसर साहिब, फाजिल्का, मोगा और होशियारपुर में मतदान अपेक्षाकृत अधिक रहा।
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26 दिन के आंदोलन के बाद भी मतदान में नहीं दिखा असर
सीनेट चुनाव बहाल कराने की मांग को लेकर 26 दिन आंदोलन चला। पंजाब के उच्च शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस, आनंदपुर साहिब के सांसद मालविंदर सिंह कंग और शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल समेत कई नेताओं ने सोशल मीडिया पर आंदोलन का समर्थन किया। कई नेता पीयू संघर्ष में भी पहुंचे। हालांकि मतदान के दिन इनमें से कई नेताओं की भागीदारी नहीं दिखी।
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सत्यपाल जैन बोले- ग्रेजुएट कांस्टीचुएंसी में सुधार जरूरी
पूर्व सांसद और सीनेट से जुड़े सत्यपाल जैन ने कहा कि ग्रेजुएट कांस्टीचुएंसी की व्यवस्था में सुधार की जरूरत है। उनके अनुसार सूची में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जो जीवित नहीं हैं या पीयू के दायरे से बाहर जा चुके हैं। करीब 85 फीसदी मतदाताओं का सीनेट चुनाव से प्रत्यक्ष सरोकार नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में कम मतदान होना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। जैन ने आंदोलन में कुछ लोगों की भागीदारी को राजनीतिक उद्देश्य से जुड़ा बताया।

उम्मीदवार बोले- हर मतदाता तक पहुंचना मुश्किल
उम्मीदवार रमनप्रीत सिंह ने कहा कि ग्रेजुएट कांस्टीचुएंसी का दायरा बहुत बड़ा है। उम्मीदवारों को गांव-गांव और अलग-अलग जिलों में प्रचार करना पड़ता है। इतनी बड़ी सूची में हर मतदाता तक पहुंचना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने कहा कि सीनेट चुनाव की तुलना सामान्य चुनाव से नहीं की जानी चाहिए, क्योंकि मतदाता अलग-अलग क्षेत्रों में रहते हैं। कमलजीत सिंह ने मतदाता सूची में सुधार की जरूरत बताई। उनके अनुसार इस बार कुछ जिलों में मतदान अधिक रहा लेकिन सूची की शुद्धता और मतदाताओं की वास्तविक भागीदारी पर काम जरूरी है।
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