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हौसले की जीत : नगर निगम के अग्निशमन विभाग में लीडिंग फायरमैन सुभाष ने अग्निशमन सेवा खेलों में जीता कांस्य

Fri, 23 Feb 2024 02:22 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 23 Feb 2024 02:22 AM IST
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Victory of courage: Subhash, the leading fireman in the Municipal Corporation's fire department, won bronze in the Fire Service Games.
चंडीगढ़। अगर इंसान ठान ले तो क्या नहीं कर सकता, बस लड़ने और जीतने का हौसला चाहिए। 47 वर्षीय पहलवान सुभाष पुनिया इसका उदाहरण हैं। कैंसर जैसी घातक बीमारी को हराकर उन्होंने एक से चार फरवरी तक अहमदाबाद में आयोजित अखिल भारतीय अग्निशमन सेवा खेलों में कुश्ती में कांस्य पदक जीता है। नगर निगम के अग्निशमन विभाग में लीडिंग फायरमैन पहलवान सुभाष पुनिया की यह जीत छोटी नहीं है। कैंसर का पता चलते ही इंसान टूट जाता है। कीमोथेरेपी के दौरान शरीर की स्थिति खराब हो जाती है लेकिन 12 कीमोथेरपी को सहकर पुनिया ने यह जीत दर्ज की है। उनकी इस जीत पर नगर निगम आयुक्त अनिंदिता मित्रा का कहना है कि यह एक बड़ी उपलब्धि है, जो सुभाष के धैर्य और दृढ़ संकल्प को बयां करती है।
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सुभाष अन्य रोगियों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं। वह कहते हैं कि यदि हम विपरीत परिस्थितियों से लड़ सकें तो जीवन फिर से सामान्य हो सकता है। सुभाष ने बताया कि उन्होंने 100 किलोग्राम से ऊपर की श्रेणी में कुश्ती लड़ी जबकि उनका वजन 95 किलोग्राम था। उन्होंने बताया कि जब वह कैंसर से जूझ रहे थे तब भी उन्होंने कभी हार नहीं मानी और इस बार भी जब वह चंडीगढ़ का प्रतिनिधित्व करते हुए पदक जीता।
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सुभाष का इलाज कर रहे पीजीआई चंडीगढ़ के हेमेटोलॉजी विभाग के प्रोफेसर पंकज मल्होत्रा कहते हैं कि सुभाष हॉजकिन लिम्फोमा से पीड़ित हैं, जो एक तरह का रक्त कैंसर है। यह शरीर के प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करता है। वह वर्ष 2018 से सुभाष का इलाज कर रहे हैं। उनमें गजब का हौसला है। इसी हौसले के बल पर उन्होंने इस बीमारी को मात दिया है।
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सुभाष बताते हैं कि लगातार बुखार और वजन कम होने के बाद उन्होंने पहली बार वर्ष 2017 में जीएमसीएच-32 में डॉक्टर से मिले थे। एक साल तक उनका टीबी का इलाज चला जबकि उन्हें टीबी की बीमारी नहीं थी। जब कोई राहत नहीं मिली तो वह पीजीआई पहुंचे, जहां पता चला कि उन्हें कैंसर है। सुभाष ने कहा कि जब मैंने कैंसर शब्द सुना तो ऐसा लगा पूरी दुनिया उजड़ गई और मुझे लगा कि अब मैं नहीं बचूंगा लेकिन जीतने के जज्बे, सकारात्मक सोच और पत्नी के लगातार समर्थन से मैंने अब इस खतरनाक बीमारी पर काबू पा लिया है।


कीमोथेरेपी के बाद की कुश्ती
कीमोथेरेपी के 12 चक्र पूरे होने के बाद सुभाष कुश्ती कर रहे हैं। हालांकि यह आसान नहीं था क्योंकि कीमोथेरेपी की वजह से उनके प्लेटलेट्स घट गए थे और वह कमजोर हो गए थे। सुभाष ने बताया कि आठवीं कीमोथेरेपी के बाद मुझे प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए एक दवा का इंजेक्शन लगवाना पड़ा जो बेहद दर्दनाक था। मैंने अपने इलाज के बाद कुश्ती में उतरने का फैसला किया। इसके लिए मुझे काफी व्यायाम करना पड़ा, उचित आहार लेना पड़ा और योग करना पड़ा।

इनसेट
हॉजकिन लिम्फोमा क्या है
यह रक्त कैंसर का एक समूह है जो लसीका प्रणाली को प्रभावित करता है। यह रक्त कैंसर लिम्फोसाइट्स - श्वेत रक्त कोशिकाओं (डब्ल्यूबीसी) में शुरू होते हैं जो लसीका प्रणाली का हिस्सा हैं। डब्ल्यूबीसी रक्त घटक हैं जो शरीर को संक्रमण और अन्य बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं।


लक्षण
लगातार थकान, अस्पष्टीकृत बुखार, वजन घटना, त्वचा में खुजली, पेट में दर्द/सूजन, छाती में दर्द।

कोट
सुभाष ने इलाज के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही नहीं की। खान-पान व रहन-सहन पर विशेष ध्यान दिया। यह इलाज के साथ उनके दृढ़ इच्छाशक्ति की भी जीत है जो उन्होंने कैंसर जैसी बीमारी पर जीत दर्ज करने के साथ ही खेलों में बेहतर प्रदर्शन कर चंडीगढ़ का नाम रोशन किया है। - प्रो. पंकज मल्होत्रा, हेमेटोलॉजी विभाग, पीजीआई
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