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Moga: चर्चा में भिंडरावाला का गांव रोडे, जहां हुई थी अमृतपाल की दस्तारबंदी.. वहीं से गिरफ्तार कर ले गई पुलिस

Sun, 23 Apr 2023 03:00 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sun, 23 Apr 2023 03:00 PM IST
सार

आठ माह पहले 29 सितम्बर 2022 को गांव रोडे के गुरुद्वारे में अमृतपाल की वारिस पंजाब दे के नए मुखिया के तौर पर दस्तारबंदी हुई थी। दस्तारबंदी कार्यक्रम में दमदमी टकसाल सहित पंजाब के कई गुरुद्वारों से लोग पहुंचे थे।

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Update News of Amritpal Singh Arrest from Village Rode of Moga
मोगा के गांव रोडे के गुरुद्वारा साहिब के बाहर से अमृतपाल गिरफ्तार। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब के मोगा जिले का गांव रोडे रविवार को एक बार फिर चर्चा में आ गया। गांव में लगभग दो हजार घर हैं, लेकिन इसका नाम सिख इतिहास व अंतराष्ट्रीय स्तर पर जाना जाता है। रोडे दमदमी टकसाल के 14वें जत्थेदार जरनैल सिंह भिंडरांवाला का पैतृक गांव है। फरवरी 2018 में इस गांव में भिंडरांवाले की याद में एक गुरुद्वारा बनाया गया, जिसे नाम दिया गया गुरुद्वारा संत खालसा।

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गुरुद्वारा संत खालसा रविवार को उस समय चर्चा में आ गया जब खुद को जरनैल सिंह भिंडरांवाला की तरह स्थापित करने की कोशिश करने वाला अमृतपाल सिंह पुलिस की गिरफ्त में आ गया। आठ माह पहले इसी गुरुद्वारे में अमृतपाल की वारिस पंजाब दे के नए मुखिया के तौर पर दस्तारबंदी हुई थी। 
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29 सितम्बर 2022 को हुए दस्तारबंदी कार्यक्रम में दमदमी टकसाल सहित पंजाब के कई गुरुद्वारों से लोग यहां पहुंचे थे। इसके बाद भिंडरांवाला के भतीजे और श्री अकाल तख्त के पूर्व जत्थेदार भाई जसबीर सिंह रोडे ने कहा था कि संगत के मन में कोई भुलावा ना रहे, इसलिए यह बात साफ करना जरूरी है कि यह वारिस पंजाब दे जत्थेबंदी के नए जत्थेदार अमृतपाल सिंह की दस्तारबंदी है। जसबीर सिंह रोडे को यह स्पष्टीकरण देने की जरूरत इसलिए पड़ी थी क्योंकि पूरे कार्यक्रम को कुछ इस तरह से तैयार किया गया था कि अमृतपाल सिंह को नए भिंडरांवाले के तौर पर पेश किया जा सके। 

यह भी पढ़ें: Amritpal Arrest: पत्नी से पूछताछ पर दबाव में आया अमृतपाल! अमित शाह के बयान के बाद हुआ बड़ा एक्शन


वारिस पंजाब दे जत्थेबंदी का रोडे गांव से कोई सीधा संबंध नहीं था, फिर भी गांव में दस्तारबंदी कर सांकेतिक संदेश दिया गया था कि पंजाब में खालिस्तान की लहर दोबारा तेज हो रही है। इस कार्यक्रम में अमृतपाल सिंह के भाषण से ठीक पहले खालिस्तान के नारे भी लगाए गए थे। भिंडरांवाला की तरह अमृतपाल के सिर पर दस्तार बांधी गई और पूरा पहरावा डाला गया। 

इत्तेफाक... भिंडरांवाला ने भी साथी को छुड़ाने के लिए अभियान चलाया था..
पहरावे में अमृतपाल सिंह बिल्कुल जरनैल सिंह भिंडरांवाला की कॉपी करता था। इसे इत्तेफाक कहें या कॉपी भिंडरांवाला ने भी अपने साथी को छुड़ाने के लिए अभियान चलाया था। 19 जुलाई 1982 को दमदमी टकसाल के जत्थेदार जरनैल सिंह भिंडरांवाले के करीबी सिपहसालार अमरीक सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। अमरीक सिंह उस समय ऑल इंडिया सिख स्टूडेंट फेडरेशन के अध्यक्ष थे। उनके खिलाफ अमृतसर निरंकारी मंडल के सेक्रेटरी जोगिंदर सिंह पर जानलेवा हमला करने का आरोप था।

तत्कालीन राज्यपाल चेन्ना रेड्डी जब अमृतसर में स्वर्ण मंदिर के दर्शन के लिए आए तो अमरीक सिंह ने ऑल इंडिया सिख स्टूडेंट फेडरेशन के गिरफ्तार साथियों की रिहाई की मांग करते हुए चेन्ना रेड्डी के साथ बदसलूकी की थी। उसके बाद रेड्डी ने व्यक्तिगत तौर पर उसकी गिरफ्तारी के आदेश दिए थे। अमरीक सिंह भिंडरांवाले का सबसे करीबी आदमी हुआ करता था। वह भिंडरांवाले के गुरु करतार सिंह भिंडरांवाले का बेटा था। अमरीक सिंह की गिरफ्तारी के बाद भिंडरांवाले ने रिहाई के लिए मोर्चा शुरू किया। इस मोर्चे को संत हरचंद सिंह लौंगोवाल और जगदेव सिंह तलवंडी का समर्थन हासिल हुआ।

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