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बजट 2019: पीएचडी चेंबर के विशेषज्ञों ने जताई नाराजगी, बोले- वित्तमंत्री नेशनल सिक्योरिटी को भूलीं
Sat, 06 Jul 2019 11:22 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 06 Jul 2019 11:22 AM IST
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पीएचडी चेंबर के सदस्य
- फोटो : अमर उजाला
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लोकसभा चुनाव के बाद मोदी सरकार का पहला पूर्ण बजट वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में पेश किया, लेकिन इससे पीएचडी चेंबर खुश नही है। बजट पेश करते हुए उन्होंने कई बड़ी घोषणाएं की हैं, जो देश की दिशा और दशा बदलने वाली हैं। सेक्टर-31 स्थित पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स में बजट के बाद एक्सपर्ट्स के पैनल का ग्रुप डिस्कशन हुआ, जिसमें कई अहम बातें निकल कर आईं।
सेंट्रल जीएसटी के प्रिंसिपल कमिश्नर किशोरी लाल ने बजट को बेहतर बताया, जबकि सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स (सीबीडीटी) के पूर्व चीफ कमिश्नर सुधा शर्मा ने बजट को प्रोफेशनल बताया। सुधा शर्मा ने कहा कि बजट में महिलाओं और युवाओं का खास ध्यान रखा गया है। सोशल चेंज पर ज्यादा फोकस किया गया है, जिसका असर आने वाले दिनों में दिखेगा। वहीं, इंटरनेशनल ट्रेड प्रो. पीके वासुदेवा (रिटा.) ने कहा कि निर्मला सीतारमण पिछली सरकार में रक्षा मंत्री थीं, बावजूद इसके उन्होंने इस बजट में रक्षा और नेशनल सिक्योरिटी पर कुछ नहीं कहा।
चैंबर में सीजीएसटी के प्रिंसिपल कमिश्नर किशोरी लाल (आईआरएस), पीएचडी चैंबर ऑफ कामर्स के पूर्व प्रधान डॉ. अशोक खन्ना, पूर्व चीफ कमिश्नर (सीबीडीटी) सुधा शर्मा, पीएचडी स्टार्टअप कमेटी के चेयरमैन केएस भाटिया, चैंबर की टैक्स कमेटी के चेयरमैन पवन के पाहवा, सीबीडीटी के पूर्व चेयरमैन आरएस मथोडा, हरियाणा के यमुनानगर में पीएचडी चैंबर के प्रतिनिधि कपिल गुप्ता, क्षेत्रीय निदेशक मधु पिल्लई, पंचकूला के संयोजक अनुज अग्रवाल, एमएसएमई कमेटी के चेयरमैन लोकेश जैन, लुधियाना जोन के संयोजक जीएस कुलार समेत कई प्रतिनिधियों ने बजट चर्चा में भाग लिया। पेश हैं इनकी बातचीत के कुछ अंश...
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सेंट्रल जीएसटी के प्रिंसिपल कमिश्नर किशोरी लाल ने बजट को बेहतर बताया, जबकि सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स (सीबीडीटी) के पूर्व चीफ कमिश्नर सुधा शर्मा ने बजट को प्रोफेशनल बताया। सुधा शर्मा ने कहा कि बजट में महिलाओं और युवाओं का खास ध्यान रखा गया है। सोशल चेंज पर ज्यादा फोकस किया गया है, जिसका असर आने वाले दिनों में दिखेगा। वहीं, इंटरनेशनल ट्रेड प्रो. पीके वासुदेवा (रिटा.) ने कहा कि निर्मला सीतारमण पिछली सरकार में रक्षा मंत्री थीं, बावजूद इसके उन्होंने इस बजट में रक्षा और नेशनल सिक्योरिटी पर कुछ नहीं कहा।
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चैंबर में सीजीएसटी के प्रिंसिपल कमिश्नर किशोरी लाल (आईआरएस), पीएचडी चैंबर ऑफ कामर्स के पूर्व प्रधान डॉ. अशोक खन्ना, पूर्व चीफ कमिश्नर (सीबीडीटी) सुधा शर्मा, पीएचडी स्टार्टअप कमेटी के चेयरमैन केएस भाटिया, चैंबर की टैक्स कमेटी के चेयरमैन पवन के पाहवा, सीबीडीटी के पूर्व चेयरमैन आरएस मथोडा, हरियाणा के यमुनानगर में पीएचडी चैंबर के प्रतिनिधि कपिल गुप्ता, क्षेत्रीय निदेशक मधु पिल्लई, पंचकूला के संयोजक अनुज अग्रवाल, एमएसएमई कमेटी के चेयरमैन लोकेश जैन, लुधियाना जोन के संयोजक जीएस कुलार समेत कई प्रतिनिधियों ने बजट चर्चा में भाग लिया। पेश हैं इनकी बातचीत के कुछ अंश...
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हाउसिंग सेक्टर पर सरकार का ज्यादा फोकस
बजट को देखकर लगता है कि सरकार आने वाले समय में हाउसिंग सेक्टर में काफी पैसा लगाने जा रही है। इससे नई नौकरियां पैदा होंगी। इस संपूर्ण बजट से रूरल इकोनॉमी और अर्बन इकोनॉमी को बढ़ावा मिलेगा। उम्मीद है कि ग्रोथ रेट बढ़ेगा। बजट में एक बात हैरान करने वाली रही कि पूरे समय सेंसेक्स ऊपर-नीचे जाता रहा, जिससे पता चलता है कि लोग बजट को समझ नहीं पाए। इस बजट के दूरगामी परिणाम देखे जाएंगे।
- अशोक खन्ना, पूर्व प्रेजिडेंट, पीएचडी चैंबर
बजट में हर वर्ग को खुश करने की कोशिश
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट को बहुत ही प्रोफेशनल तरीके से पेश किया। बजट में उन्होंने हर वर्ग को शामिल किया है। रूरल, अर्बन, यूथ, किसान, मजदूर से लेकर खासकर महिला वर्ग जिसको लेकर उन्होंने ‘नारी तू नारायणी’ का नारा भी दिया। कुछ सामानों पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाई है। जीएसटी को और आसान बनाने की कोशिश की गई है। कुल मिलाकर पिछले बेहतर बजट से और बेहतर बनाने की कोशिश की गई है।
- किशोरी लाल, प्रिंसिपल कमिश्नर, सेंट्रल जीएसटी
बजट को देखकर लगता है कि सरकार आने वाले समय में हाउसिंग सेक्टर में काफी पैसा लगाने जा रही है। इससे नई नौकरियां पैदा होंगी। इस संपूर्ण बजट से रूरल इकोनॉमी और अर्बन इकोनॉमी को बढ़ावा मिलेगा। उम्मीद है कि ग्रोथ रेट बढ़ेगा। बजट में एक बात हैरान करने वाली रही कि पूरे समय सेंसेक्स ऊपर-नीचे जाता रहा, जिससे पता चलता है कि लोग बजट को समझ नहीं पाए। इस बजट के दूरगामी परिणाम देखे जाएंगे।
- अशोक खन्ना, पूर्व प्रेजिडेंट, पीएचडी चैंबर
बजट में हर वर्ग को खुश करने की कोशिश
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट को बहुत ही प्रोफेशनल तरीके से पेश किया। बजट में उन्होंने हर वर्ग को शामिल किया है। रूरल, अर्बन, यूथ, किसान, मजदूर से लेकर खासकर महिला वर्ग जिसको लेकर उन्होंने ‘नारी तू नारायणी’ का नारा भी दिया। कुछ सामानों पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाई है। जीएसटी को और आसान बनाने की कोशिश की गई है। कुल मिलाकर पिछले बेहतर बजट से और बेहतर बनाने की कोशिश की गई है।
- किशोरी लाल, प्रिंसिपल कमिश्नर, सेंट्रल जीएसटी
प्रोफेशनल तरीके से पेश किया बजट
इस बार वित्त मंत्री ने हेडिंग बताकर बजट की शुरुआत की। हर बार इनकम टैक्स को पहले ही शुरू किया जाता था, लेकिन इस बार सबसे आखिरी में इनकम टैक्स को छुआ गया। इससे पूरे बजट के दौरान फ्लो बना रहा। बजट में हर किसी के लिए कुछ न कुछ रहा। इलेक्ट्रिक कार, स्टार्टअप, किसानों के ऊपर खास तौर पर ध्यान दिया गया है। सोशल चेंज की बात की गई है। प्रोफेशनल तरीके से बजट को तैयार किया गया है।
- सुधा शर्मा, पूर्व चीफ कमिश्नर, सीबीडीटी
बजट में रक्षा मंत्रालय की बात नहीं, हुई निराशा
बजट ने थोड़ा निराश किया। वर्तमान सरकार में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पिछली सरकार में रक्षा मंत्री थीं। रक्षा बजट और नेशनल सिक्योरिटी को लेकर उनसे कुछ बड़ी घोषणाओं की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन हैरानी की बात है कि उन्होंने इन दोनों पर बात ही नहीं की। मोदी सरकार ने सड़क, रेलवे व इंफ्रास्ट्रक्चर पर काफी काम किया है, लेकिन रक्षा और नेशनल सिक्योरिटी के मुद्दे को बजट से बाहर रखा गया। ऐसे बजट का क्या फायदा।
- प्रो. पीके वासुदेवा (रिटा.). इंटरनेशनल ट्रेड
इकोनॉमी बूस्ट करने के लिए रोडमैप
कर दाताओं को राहत देने की कोशिश की गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पहले बजट में सरकार की कोशिश जीडीपी में निवेश बढ़ाना, जॉब, एक्सपोर्ट और मांग को बढ़ाना है। इस बजट में इंडस्ट्री के लिए भी कुछ न कुछ घोषणाएं की गई हैं। बजट में इंजीनियरिंग सेक्टर, रियल एस्टेट, आईटी, इलेक्ट्रिकल इंडस्ट्री, रूरल इंडस्ट्री और एसएमई सेक्टर को बूस्ट करने के लिए रोडमैप बनाया है।
- आरएस मथोडा, पूर्व चेयरमैन, सीबीडीटी
इस बार वित्त मंत्री ने हेडिंग बताकर बजट की शुरुआत की। हर बार इनकम टैक्स को पहले ही शुरू किया जाता था, लेकिन इस बार सबसे आखिरी में इनकम टैक्स को छुआ गया। इससे पूरे बजट के दौरान फ्लो बना रहा। बजट में हर किसी के लिए कुछ न कुछ रहा। इलेक्ट्रिक कार, स्टार्टअप, किसानों के ऊपर खास तौर पर ध्यान दिया गया है। सोशल चेंज की बात की गई है। प्रोफेशनल तरीके से बजट को तैयार किया गया है।
- सुधा शर्मा, पूर्व चीफ कमिश्नर, सीबीडीटी
बजट में रक्षा मंत्रालय की बात नहीं, हुई निराशा
बजट ने थोड़ा निराश किया। वर्तमान सरकार में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पिछली सरकार में रक्षा मंत्री थीं। रक्षा बजट और नेशनल सिक्योरिटी को लेकर उनसे कुछ बड़ी घोषणाओं की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन हैरानी की बात है कि उन्होंने इन दोनों पर बात ही नहीं की। मोदी सरकार ने सड़क, रेलवे व इंफ्रास्ट्रक्चर पर काफी काम किया है, लेकिन रक्षा और नेशनल सिक्योरिटी के मुद्दे को बजट से बाहर रखा गया। ऐसे बजट का क्या फायदा।
- प्रो. पीके वासुदेवा (रिटा.). इंटरनेशनल ट्रेड
इकोनॉमी बूस्ट करने के लिए रोडमैप
कर दाताओं को राहत देने की कोशिश की गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पहले बजट में सरकार की कोशिश जीडीपी में निवेश बढ़ाना, जॉब, एक्सपोर्ट और मांग को बढ़ाना है। इस बजट में इंडस्ट्री के लिए भी कुछ न कुछ घोषणाएं की गई हैं। बजट में इंजीनियरिंग सेक्टर, रियल एस्टेट, आईटी, इलेक्ट्रिकल इंडस्ट्री, रूरल इंडस्ट्री और एसएमई सेक्टर को बूस्ट करने के लिए रोडमैप बनाया है।
- आरएस मथोडा, पूर्व चेयरमैन, सीबीडीटी