Haryana: एसीबी की टेढ़ी नजर से आईएएस-आईपीएस लॉबी में ठनी, सवाल-आईपीएस-एचपीएस पर कार्रवाई क्यों नहीं
यह पहली बार नहीं है कि आईएएस और आईपीएस लॉबी में रार छिड़ गई है। इससे पहले, सात साल पहले जब प्रदेश सरकार ने आईपीएस अधिकारियों को आईएएस के स्थानों पर तैनाती देनी शुरू की तो भी विवाद उभरा था। उस समय आईपीएस शत्रूजीत कपूर को बिजली निगमों का चेयरमैन बनाया गया था।
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हरियाणा में एंटी करप्शन ब्यूरो द्वारा भ्रष्टाचार में शामिल आईएएस और एचसीएस अधिकारियों पर की जा रही कार्रवाई को लेकर आईएएस और आईपीएस लॉबी में ठन गई है। आईएएस और एचसीएस अधिकारी एसीबी की कार्यप्रणाली को लेकर मुख्य सचिव कार्यालय में अपना विरोध जता रहे हैं।
एकजुट हो रहे आईएएस अधिकारियों का मामला मुख्यमंत्री मनोहर लाल के दरबार में पहुंच गया है। हालांकि, मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचारी चाहे कोई हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा।
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इससे पहले भी वर्चस्व को लेकर आईएएस और आईपीएस लॉबी में तकरार हुई, लेकिन अब लगातार आईएएस और एचसीएस अधिकारियों कसे जा रहे शिकंजे ने दूरियां और बढ़ा दी। पिछले सप्ताह भ्रष्टाचार के मामलों में दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की गिरफ्तारी ने अन्य अधिकारियों की बैचेनी बढ़ा दी है।
एसीबी पर उठाए सवाल
आईएएस लॉबी का तर्क है कि दोनों ही अधिकारियों को नकद राशि के साथ गिरफ्तार नहीं किया गया, बल्कि दलाल के माध्यम से कड़ी जोड़ते हुए एसीबी उनके पास पहुंची है। उनका कहना है कि भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन एसीबी नियमों से परे जाकर केवल आईएएस और एचसीएस अधिकारियों को टारगेट कर रही है। उन्होंने सवाल किया है कि क्या आईपीएस और एचपीएस अधिकारी पाक साफ हैं, एसीबी की कार्रवाई पुलिस के आला अधिकारियों पर क्यों नहीं हो रही है? मौजूदा समय में डीजीपी शत्रूजीत कपूर के पास ही एसीबी का चार्ज है।
आईपीएस-एचपीएस पर कार्रवाई को लेकर बढ़ा दबाव
वहीं, सीएमओ (मुख्यमंत्री कार्यालय) में भी इस बात को लेकर सवाल उठाए गए हैं कि आखिर क्या कारण है कि पिछले कई साल में आईपीएस और एचपीएस अधिकारियों का एक भी भ्रष्टाचार का मामला सामने नहीं आया है। ऐसे में लगातार उठ रहे सवालों के बीच एंटी करप्शन ब्यूरो पर अब आईपीएस और एचपीएस अधिकारियों पर कार्रवाई का लगातार दबाव बढ़ गया है।
पिछले दो साल की बात करें तो दर्जनभर आईएएस और इतने ही एचसीएस अधिकारी एसीबी के निशाने पर आए हैं। इनमें से आईएएस धमेंद्र, विजय दहिया और जयवीर आर्य गिरफ्तार किए गए हैं, जबकि दर्जनभर एचसीएस की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनके अलावा, 11 आईएएस, 3 आईएफएस, 20 एचसीएस अधिकारी एसीबी के रडार पर हैं। वहीं, दो आईपीएस और 4 एचपीएस अधिकारियों की भी जांच की जा रही है।
पहले वर्चस्व को लेकर छिड़ी थी जंग
यह पहली बार नहीं है कि आईएएस और आईपीएस लॉबी में रार छिड़ गई है। इससे पहले, सात साल पहले जब प्रदेश सरकार ने आईपीएस अधिकारियों को आईएएस के स्थानों पर तैनाती देनी शुरू की तो भी विवाद उभरा था। उस समय आईपीएस शत्रूजीत कपूर को बिजली निगमों का चेयरमैन बनाया गया था। इसके अलावा, आईपीएस पंकज नैन खेल विभाग में निदेशक, आईपीएस नवदीप सिंह विर्क को परिवहन विभाग का प्रधान सचिव और आईपीएस अमिताभ ढिल्लो को परिवहन विभाग में आयुक्त पद पर तैनात किया जा चुका है।
आईएएस को ये है आपत्ति
अमर उजाला से बातचीत में नाम न छापने की शर्त पर आईएएस अधिकारियों ने कहा कि मामला मुख्यमंत्री के संज्ञान ला दिया गया है। भ्रष्ट अधिकारियों पर एसीबी जरूर कार्रवाई करे, लेकिन तय नियमों का पालन होना चाहिए। किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा किसी अधिकारी के बारे में कुछ कहने पर ही कार्रवाई न हो, बल्कि इसके लिए पहले सबूत जुटाए जाएं। आईएएस की गिरफ्तारी से पहले बाकायदा सरकार से अनुमति ली जाए।