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मकान ले लिया, किराया नहीं दिया, अब 20 करोड़ की वसूली

Sat, 12 Dec 2020 02:11 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sat, 12 Dec 2020 02:11 AM IST
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Took house, did not pay rent, now recovery of 20 crores
चंडीगढ़। हाउसिंग बोर्ड की ओर से एक स्कीम के तहत लोगों को स्मॉल फ्लैट्स दिए गए थे। इसके एवज में हाउसिंग बोर्ड फ्लैट धारक से नियमित किराया वसूलता है, लेकिन लॉकडाउन के दौरान किराया नहीं भरा गया। ऐसे में लोगों पर करीब 20 करोड़ रुपये का किराया बकाया हो गया है। अब चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने ऐसे डिफाल्टरों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। बकायेदारों को नोटिस जारी कर जल्द से जल्द किराया जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि दिए गए समय पर किराया जमा नहीं कराया तो हाउसिंग बोर्ड की ओर से कड़ा कदम उठाया जा सकता है।
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यह पहली बार है कि जब अलॉटियों पर इतनी बड़ी राशि बकाया हो। हाउसिंग बोर्ड के सीईओ यशपाल गर्ग ने बताया कि ऐसा लॉकडाउन की वजह से हुआ है। पहले भी लोगों पर बकाया था। उस दौरान अभियान चलाकर लोगों से किराया जमा करवाया गया था, लेकिन अब फिर से बढ़ गया है। बकाएदारों में 30 सितंबर 2020 तक के डिफाल्टर को शामिल किया गया है। बोर्ड की ओर से बताया गया है कि रेंट की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए आनलाइन की भी सुविधा दी गई, ताकि लोग घर बैठे फ्लैट का किराया जमा करवा दें, लेकिन इसके बावजूद लोग ऐसा नहीं कर रहे। इससे पहले अलॉटियों पर दस करोड़ रुपये बकाया हो गया था। इसे वसूलने के लिए हाउसिंग बोर्ड ने जगह-जगह कैंप लगाए थे ताकि लोग रेंट जमा करवा सके। यह अभियान कामयाब भी रहा और शत-प्रतिशत राशि वसूली गई।
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सबसे ज्यादा यहां डिफाल्टर
चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने बकायेदारों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। बोर्ड की ओर से बकायेदारों की लिस्ट भी जारी कर दी गई है। इसके तहत धनास में 8057 आवंटी, मौलीजागरां में 1502, रामदरबार में 560, सेक्टर 56 में 751, सेक्टर 49 में 930, सेक्टर 38 वेस्ट में 997, मलोया में 2419 और इंडस्ट्रियल एरिया में 99 आवंटी शामिल हैं। इनमें कई ऐसे भी हैं, जिन पर लाख रुपये के ऊपर किराया बकाया है। कई नोटिस देने के बावजूद किराया नहीं जमा कराया है।
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रेंट जमा नहीं कराने पर फ्लैट हो सकता है कैंसिल
चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने लोगों को फ्लैट पुनर्वास योजना के तहत दिए थे। इसका एक मकसद चंडीगढ़ को झुग्गी मुक्त कर लोगों को रहने के लिए पक्के मकान दिए जाने थे। बोर्ड ने समय-समय पर फ्लैट का निर्माण करवाकर झुग्गी खाली करवाई और लोगों को बने बनाए फ्लैट मुहैया करवाए। इसके एवज में हाउसिंग बोर्ड आवंटियों से 800 से हजार रुपये किराए लेता है। यदि कोई फ्लैट धारक किराए का पैसा जमा नहीं करवाता है तो उसका फ्लैट कैंसिल भी किया जा सकता है।
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