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चंडीगढ़: आज से शहर की सफाई व्यवस्था बंद, नहीं उठेगा घरों से कचरा

Fri, 23 Oct 2020 12:28 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Fri, 23 Oct 2020 12:28 PM IST
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today the city's sanitation system closed, will not lift garbage from homes
चंडीगढ़ नगर निगम। - फोटो : अमर उजाला

चंडीगढ़ की सफाई - व्यवस्था शुक्रवार से ठप रहेगी। सफाई कर्मचारी मांगों के समर्थन में एमओएच विभाग से विरोध प्रदर्शन करते हुए रैली निकलेंगे। यह रैली नगर निगम के सामने जाकर समाप्त होगी। इस दौरान घर-घर से कचरा उठाने वाले कर्मचारी भी निगम कर्मियों के समर्थन में रहेंगे।

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यूनियन के अध्यक्ष कृष्ण कुमार चड्ढा ने कहा कि स्मार्ट घड़ियों से बंधुआ मजदूर जैसा अनुभव होता है। कर्मचारियों पर नजर रखने के लिए यह घड़ी उन्हें पहनाई जा रही है। घर-घर से कचरा उठाने वाली एसोसिएशन के समर्थन से शहर के रेजिडेंशियल एरिया से कचरा भी नहीं उठेगा।

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इससे पहले एक दिन के लिए काम छोड़ हड़ताल और रोष प्रदर्शन 15 अक्तूबर को नगर निगम कार्यालय के सामने किया गया था लेकिन नगर निगम के अधिकारियों और कमिश्नर ने यूनियन के साथ कोई बैठक नहीं की। ऐसे में 17 अक्तूबर को यूनियन की एक बैठक हुई, जिसमें निर्णय लिया गया कि 23 अक्तूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी।

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यूनियन के अध्यक्ष का कहना है कि इस हड़ताल में ठेके पर काम कर रहे सफाई कर्मचारी भी उनका साथ देंगे। अध्यक्ष का कहना है कि डेलीवेज कर्मचारियों को पक्का करने के अलावा उन्हें समान वेतन देने की मांग भी की जा रही है। उनका कहना है कि ठेकेदार के अधीन काम करने वाले कर्मचारियों को नगर निगम के अधीन किया जाए। निगम में सफाई कर्मचारियों का शोषण किया जा रहा है।

कमेटी ने पहले ही कहा- घड़ी की व्यवस्था ठीक

अगस्त माह में सफाई व्यवस्था कमेटी की बैठक में स्मार्ट घड़ी पहनाने की व्यवस्था की सराहना की गई थी। इस दौरान कमेटी के सदस्यों ने कहा था कि इस व्यवस्था को और बेहतर तरीके से मजबूत किया जाए ताकि काम में किसी भी प्रकार की लापरवाही सामने न आए।

घड़ी पहनते ही स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की थी शिकायत
शुरुआत में जब कर्मचारियों को घड़ी दी गई तो यूनियन ने बताया कि इससे कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। कई कर्मचारी काम करते समय बेहोश होकर गिर जा रहे हैं। इस पर कमिश्नर ने कहा था कि मैंने भी यही घड़ी पहनी है, इससे मुझे कोई समस्या नहीं हो रही है। इसके बाद कर्मचारी शांत होकर वापस लौट गए।

एक घड़ी का एक माह का किराया 466 रुपये, तीन साल के लिए अनुबंध
निगम ने इंडियन टेलीफोन इंडस्ट्रीज कंपनी को टेंडर दिया है। निगम ने चार हजार घड़ियां मंगाई हैं। एक घड़ी का एक माह का किराया 466 रुपये है। इस हिसाब से एक माह का 18 लाख 64 हजार रुपये मासिक किराया देना होगा। कंपनी से तीन साल के लिए अनुबंध किया है। परिणाम बेहतर दिखे तो दो साल के लिए अनुबंध बढ़ाया जा सकता है। अधिकारियों का कहना है कि एक घड़ी की कीमत लगभग 10 हजार से ज्यादा की है।

अधिकारियों ने किया समझाने का प्रयास, बात नहीं बनी
गुरुवार दोपहर संयुक्त आयुक्त सौरभ अरोड़ा ने सफाई कर्मचारियों के साथ एक बैठक रखी थी। बैठक में अधिकारियों ने कर्मचारियों को काफी समझाने का प्रयास किया लेकिन कर्मचारियों ने मांगों से पीछे हटने से मना कर दिया। उसके बाद सभी यूनियनों ने अगले दिन ही काम छोड़ो हड़ताल की घोषणा कर दी।

2 लाख 10 हजार घर से कचरा लेते हैं कर्मचारी
निगम के अनुसार घर-घर से कचरा लेने वाली एसोसिएशन 2 लाख 10 हजार घरों से कचरा उठाती है। हालांकि, एसोसिएशन के अध्यक्ष ओम प्रकाश सैनी के अनुसार ढाई लाख से ज्यादा घरों से एसोसिएशन कचरा उठाती है। गांव में जहां गाड़ी नहीं जा पाती है, वहां से भी एसोसिएशन ही कचरा उठाती है।

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