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प्यार करना मेरी सबसे बड़ी ख्वाहिश और मैं प्यार करुंगी ....
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चंडीगढ़। जिंदा रहना सबसे बड़ी जंग है, आजाद रहना सबसे बड़ी लड़ाई और प्यार करना मेरी सबसे बड़ी ख्वाहिश और मैं प्यार करूंगी। जब मां प्यार में बाधा बनती है तो मुनरी अपनी मां से यह संवाद करती है। यह डायलॉग सेक्टर-18 के टैगोर थिएटर में शूलिनी विश्वविद्यालय सोलन के विद्यार्थियों ने नाटक ‘पंचलाइट’ के मंचन के दौरान बोले। दर्शकों ने इस दमदार संवाद पर तालियां बजाकर विद्यार्थियों का हौसला बढ़ाया। मुनरी कहती हैं कि जात बिरादरी से बाहर भी दुनिया है। फणीश्वर नाथ रेणु की कहानी पंचलाइट पर आधारित 55 मिनट के नाटक का रूपांतरण रंजीत कपूर ने किया। इसमें 14 लड़कियों सहित29 कलाकारों ने भाग लिया।
नाटक में वर्ष 1950 के दशक की बिहार के एक गांव की कहानी को बयां किया गया। इसमें गांव की परिवेश को आज के समय का दिखाया है। इसमें लड़का और लड़की एक दूसरे से प्यार करते हैं। लड़का बाहर से गांव में आकर रहने लगता है। लड़का गाना गाता है लेकिन वह लड़की की मां को पसंद नहीं है। यह बात पंचायत तक पहुंचती है। पंचायत में दो मुद्दे आते हैं एक विकास न होने और दूसरा लड़केके गाना गाने का। पंचायत में गांव पर जुर्माना लगाया जाता है। इससे एक गैस बत्ती खरीदी जाती है। इस बत्ती को किसी को जलाने नहीं आता। गाना गाने वाला लड़का को बत्ती जलाना आता है। लोग उसे बुलाते हैं, लेकिन लड़का शर्त रखता है कि जब लग्न होगा तभी बत्ती जलाएंगे। इसके बाद मां मान जाती है। शूलिनी विश्वविद्यालय की छात्रा लक्ष्मी वसुंधरा नाटक के बीच बीच में भोजपुरी गीत पेश करती है। यह गीत भी दर्शकों को खूब भाया। उन्होंने गंगजी के उमड़ल वा धार, सजन हम आई कैसे पार... के अलावा भैया रे भइया गांव चलो भैया.. पेश कर दर्शकों का मन मोह लिया।
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नाटक में वर्ष 1950 के दशक की बिहार के एक गांव की कहानी को बयां किया गया। इसमें गांव की परिवेश को आज के समय का दिखाया है। इसमें लड़का और लड़की एक दूसरे से प्यार करते हैं। लड़का बाहर से गांव में आकर रहने लगता है। लड़का गाना गाता है लेकिन वह लड़की की मां को पसंद नहीं है। यह बात पंचायत तक पहुंचती है। पंचायत में दो मुद्दे आते हैं एक विकास न होने और दूसरा लड़केके गाना गाने का। पंचायत में गांव पर जुर्माना लगाया जाता है। इससे एक गैस बत्ती खरीदी जाती है। इस बत्ती को किसी को जलाने नहीं आता। गाना गाने वाला लड़का को बत्ती जलाना आता है। लोग उसे बुलाते हैं, लेकिन लड़का शर्त रखता है कि जब लग्न होगा तभी बत्ती जलाएंगे। इसके बाद मां मान जाती है। शूलिनी विश्वविद्यालय की छात्रा लक्ष्मी वसुंधरा नाटक के बीच बीच में भोजपुरी गीत पेश करती है। यह गीत भी दर्शकों को खूब भाया। उन्होंने गंगजी के उमड़ल वा धार, सजन हम आई कैसे पार... के अलावा भैया रे भइया गांव चलो भैया.. पेश कर दर्शकों का मन मोह लिया।
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