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तीन दोस्तों की यारी कोरोना पर पड़ रही भारी, 65 साल के पार तीन बुजुर्गों की दोस्ती कोरोना काल में बन रही सहारा

Sat, 29 Aug 2020 12:12 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sat, 29 Aug 2020 12:12 AM IST
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three friends heavy corona support friendship building corona period beyond
चंडीगढ़। तेरा गम, मेरा गम, मेरी जान, तेरी जान, ऐसा अपना प्यार, जान पे भी खेलेंगे, तेरे लिए ले लेंगे सबसे दुश्मनी, ये दोस्ती हम नहीं... दोस्ती पर आधारित गाने की यह चंद लाइनें डॉ. देवेंद्र कुमार छाबड़ा, राजेश कुमार सूद और भूपिंदर सिंह पर सटीक बैठती है। ये दोस्त लगभग 55 साल से भी ज्यादा समय से एक-दूसरे के साथ हैं। जब से होश संभाला और दोस्ती का मतलब समझा, तबसे हमेशा एक-दूसरे को एक साथ पाया।
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तनाव को एक-दूसरे के साथ से किया दूर
कोरोना महामारी के दौरान जब तीनों अचानक एक-दूसरे से अलग हो गए, तब उनको अपने अनमोल दोस्ती के उपहार का एहसास हुआ। जब एक तरफ वृद्धों पर तनाव, अकेलेपन और संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा बढ़ा रहा था, तब इन तीनों यारों ने अपनी यारी को कोरोना से बचाव के लिए ढाल के तौर पर इस्तेमाल किया। उनका कहना है कि 65 साल से ज्यादा की उम्र में भी हम तीनों जब एक-दूसरे से बात करते हैं तो किसी युवा से कम नहीं होते। बुढ़ापे में अगर अच्छे दोस्तों का साथ हो तो अकेलापन, तनाव और उम्र से जुड़ी समस्याएं कभी परेशान नहीं करतीं।
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जब भी जरूरत पड़ी एक-दूसरे को साथ पाया
लॉकडाउन के दौरान जब तीनों एक-दूसरे से नहीं मिल पाते थे तो सोशल नेटवर्किंग के माध्यम से एक दूसरे से जुड़े रहते थे। तीनों का आवास सेक्टर-15 में ही है। राजेश सूद कुछ दिनों पहले न्यू चंडीगढ़ में शिफ्ट हुए हैं। भूपिंदर ने बताया कि देवेंद्र के दोनों बच्चे विदेश में हैं। कुछ दिनों पहले अचानक देवेंद्र की तबीयत बिगड़ी तो उन्होंने उनकी पीजीआई में जांच कराई। इन तीनों दोस्तों का कहना है कि आज भी उनके बीच उम्र की बाधा नहीं आती।
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दोस्त रखिये एक खास
इन तीनों दोस्तों का कहना है कि तनाव चाहे किसी भी उम्र का हो, उसे कम करने के लिए अच्छे दोस्तों का आसपास होना बेहद जरूरी है। ऐसे में अगर कोरोना महामारी की बात की जाए तो बढ़ते तनाव और अकेलेपन के इस दौर में दोस्त से अच्छी दवा कुछ हो ही नहीं सकती। इनके लिए जिंदगी में एक ऐसे खास दोस्त का होना बेहद जरूरी है, जिससे अपने दिल की बातें साझा की जा सकें।
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