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Chandigarh News: ऑनलाइन ठगी गिरोह के तीन शातिर गिरफ्तार, तीन दिन के रिमांड पर भेजे
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चंडीगढ़। साइबर सेल की टीम ने ह्मूगो ऐप लोन के जरिये कई लोगों से ऑनलाइन ठगी करने के एक बड़े मामले का खुलासा कर तीन शातिरों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान मनोज राठौर, पुनीत कुमार और आशीष कक्कड़ के रूप में हुई है। जांच टीम ने तीनों आरोपियों को अदालत में पेश किया। यहां से इनको तीन दिन के रिमांड पर भेज दिया गया है।
दरअसल इस उक्त ऐप के जरिये ऑनलाइन ठगी के शिकार हुए एक पीड़ित ने लोन के नाम की की गई ठगी की शिकायत दी थी। उसने शिकायत में बताया था कि उसके मोबाइल पर एक मैसेज से ऐप का लिंक आया था। इस पर क्लिक करने के बाद ऐप इंस्टॉल हो गया और इसी दौरान ऐप पर कांटेक्ट लिस्ट और गैलरी तक अपने आप अपलोड हो गई। उसने बताया कि ऐप पर मैंने किसी भी लोन के लिए आवेदन नहीं किया था और ऐप को अनइंस्टॉल कर दिया था। इसके तुरंत बाद उसको अलग-अलग नंबरों से व्हाट्सएप के जरिये धमकी भरे कॉल और मैसेज आने लगे। ठगों ने पीड़ित के परिवार की मॉर्फ्ड नग्न तस्वीरें उसके मोबाइल पर भेजी और उसे पैसे देने के लिए ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया।
जांच में पता चला कि साइबर ठग ह्यूगो लोन, कॉइन कैश और एए लोन जैसे कई ऑनलाइन लोन ऐप चला रहे थे। ठगों ने ब्लैकमेल और उत्पीड़न के लिए वर्चुअल नंबर और वीचैट, डिंगटॉक और जीबी व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया था। इस मामले में पुलिस ने शिकायत के आधार पर साइबर थाने में 30 सितंबर, 2022 को आईपीसी की धारा 384, 420, 468, 471, 509, 120बी और आईटी अधिनियम की धारा 66डी, 67 और 14 विदेशी अधिनियम के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी।
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इस मामले में अब तक 29 आरोपी हो चुके गिरफ्तार
इस मामले में जांच के लिए साइबर अधीक्षक ने आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए दो टीमें गठित की थीं। एक टीम का नेतृत्व एसएचओ साइबर इंस्पेक्टर रोहताश कुमार यादव जबकि दूसरी टीम का नेतृत्व इंस्पेक्टर गुरमीत सिंह कर रहे थे। इस मामले में जांच टीमें अब तक टेली-कॉलर, खाताधारक, हैंडलर समेत एक चीनी समेत 29 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है और इनसे 17 लाख रुपये की बरामदगी के साथ-साथ कई डिजिटल डिवाइस बरामद किए जा चुके हैं। जांच में पता चला कि आरोपी मनोज राठौर पुनीत कुमार का ड्राइवर था, जिसके नाम पर पुनीत कुमार और आशीष कक्कड़ ने उसके दस्तावेजों और अन्य केवाईसी क्रेडेंशियल्स का उपयोग करके एक शेल कंपनी स्थापित की थी। साइबर धोखाधड़ी के पीड़ितों से पैसा इस शेल कंपनी के माध्यम से भेजा जाता था और बाद में पुनीत कुमार व आशीष कक्कड़ उस पैसे का प्रयोग करते थे। इस मामले में चीनी/अंतरराष्ट्रीय संबंधों के अलावा विदेश की यात्रा और अन्य सहयोगियों के बारे में जांच जारी है। जांच में सामने आया है कि पुनीत कुमार और आशीष कक्कड़ को प्रवर्तन निदेशालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत गिरफ्तार किया था, जिससे उन पर धन शोधन और फेमा उल्लंघन से संबंधित वित्तीय अपराधों में संलिप्तता का आरोप लगाया गया है। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय से भी जानकारी मांगी जा रही है।
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दरअसल इस उक्त ऐप के जरिये ऑनलाइन ठगी के शिकार हुए एक पीड़ित ने लोन के नाम की की गई ठगी की शिकायत दी थी। उसने शिकायत में बताया था कि उसके मोबाइल पर एक मैसेज से ऐप का लिंक आया था। इस पर क्लिक करने के बाद ऐप इंस्टॉल हो गया और इसी दौरान ऐप पर कांटेक्ट लिस्ट और गैलरी तक अपने आप अपलोड हो गई। उसने बताया कि ऐप पर मैंने किसी भी लोन के लिए आवेदन नहीं किया था और ऐप को अनइंस्टॉल कर दिया था। इसके तुरंत बाद उसको अलग-अलग नंबरों से व्हाट्सएप के जरिये धमकी भरे कॉल और मैसेज आने लगे। ठगों ने पीड़ित के परिवार की मॉर्फ्ड नग्न तस्वीरें उसके मोबाइल पर भेजी और उसे पैसे देने के लिए ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया।
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जांच में पता चला कि साइबर ठग ह्यूगो लोन, कॉइन कैश और एए लोन जैसे कई ऑनलाइन लोन ऐप चला रहे थे। ठगों ने ब्लैकमेल और उत्पीड़न के लिए वर्चुअल नंबर और वीचैट, डिंगटॉक और जीबी व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया था। इस मामले में पुलिस ने शिकायत के आधार पर साइबर थाने में 30 सितंबर, 2022 को आईपीसी की धारा 384, 420, 468, 471, 509, 120बी और आईटी अधिनियम की धारा 66डी, 67 और 14 विदेशी अधिनियम के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी।
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इस मामले में अब तक 29 आरोपी हो चुके गिरफ्तार
इस मामले में जांच के लिए साइबर अधीक्षक ने आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए दो टीमें गठित की थीं। एक टीम का नेतृत्व एसएचओ साइबर इंस्पेक्टर रोहताश कुमार यादव जबकि दूसरी टीम का नेतृत्व इंस्पेक्टर गुरमीत सिंह कर रहे थे। इस मामले में जांच टीमें अब तक टेली-कॉलर, खाताधारक, हैंडलर समेत एक चीनी समेत 29 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है और इनसे 17 लाख रुपये की बरामदगी के साथ-साथ कई डिजिटल डिवाइस बरामद किए जा चुके हैं। जांच में पता चला कि आरोपी मनोज राठौर पुनीत कुमार का ड्राइवर था, जिसके नाम पर पुनीत कुमार और आशीष कक्कड़ ने उसके दस्तावेजों और अन्य केवाईसी क्रेडेंशियल्स का उपयोग करके एक शेल कंपनी स्थापित की थी। साइबर धोखाधड़ी के पीड़ितों से पैसा इस शेल कंपनी के माध्यम से भेजा जाता था और बाद में पुनीत कुमार व आशीष कक्कड़ उस पैसे का प्रयोग करते थे। इस मामले में चीनी/अंतरराष्ट्रीय संबंधों के अलावा विदेश की यात्रा और अन्य सहयोगियों के बारे में जांच जारी है। जांच में सामने आया है कि पुनीत कुमार और आशीष कक्कड़ को प्रवर्तन निदेशालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत गिरफ्तार किया था, जिससे उन पर धन शोधन और फेमा उल्लंघन से संबंधित वित्तीय अपराधों में संलिप्तता का आरोप लगाया गया है। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय से भी जानकारी मांगी जा रही है।