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पंजाब विधानसभा में नहीं है पहले दिन कामकाज की परंपरा
Sun, 04 Aug 2019 03:25 AM IST
दुष्यंत शर्मा
हर्ष कुमार सलारिया, चंडीगढ़
हर्ष कुमार सलारिया, चंडीगढ़
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 04 Aug 2019 03:25 AM IST
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सीएम अमरिंदर सिंह
- फोटो : अमर उजाला
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पंजाब विधानसभा का शुक्रवार को शुरू हुए मानसून सत्र के पहले दिन का कामकाज मात्र 14 मिनट चला, जिसमें दिवंगत शख्सियतों को श्रद्धांजलि देकर सदन की कार्यवाही सोमवार 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। 2003 के बाद से पंजाब विधानसभा में यही परंपरा लगातार दोहराई जा रही है, जिसमें रिकार्ड पर तो सदन की कार्यवाही का एक दिन दर्ज हो जाता है, लेकिन कामकाज कोई नहीं होता।
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इस बीच, शुक्रवार को इस विधानसभा परिसर में ही हरियाणा विधानसभा का सत्र आरंभ हुआ, जिसमें दिवंगत शख्सियतों को श्रद्धांजलि देने के तुरंत बाद सदन की कार्यवाही को जारी रखते हुए स्पीकर ने प्रश्नकाल शुरू कर दिया। इस तरह पहले दिन हरियाणा विधानसभा की कार्यवाही कुल 4 घंटे 40 मिनट तक चली।
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शुक्रवार को पंजाब विधानसभा की इसी परिपाटी के विरोध में आम आदमी पार्टी के विधायक अमन अरोड़ा की ओर से स्पीकर से मिलकर सत्र के पहले दिन के लिए मिलने वाले टीए-डीए व अन्य भत्ते लौटाने के बाद से एक बार फिर इस मुद्दे पर बहस छिड़ गई है कि आखिर पंजाब विधानसभा में ओबेचिरी (दिवंगतों को श्रद्धांजलि) देने के बाद आगे कामकाज क्यों शुरू नहीं किया जाता?
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अमन अरोड़ा ने स्पीकर राणा केपी सिंह को पंजाब विधानसभा का पुराना रिकार्ड भी दिखाया, जिसमें अंकित है कि आजादी के बाद 1948 से 1979 तक सदन में श्रद्धांजलि के बाद आगे कामकाज किया जाता था। इस दौरान कुल 46 सत्रों का आयोजन हुआ, जिनमें से 34 सत्रों में पहले दिन श्रद्धांजलि देने के तुरंत बाद सामान्य कामकाज शुरू हो गया।
15 अक्तूबर 1979 को शुरू हुए पंजाब विधानसभा के सत्र में कामकाज की परंपरा टूटी और दिवंगतों को श्रद्धांजलि देकर कार्यवाही अगले दिन के लिए स्थगित कर दी गई। इसके बाद 17 जुलाई 1980 से आज तक कुल 80 सत्रों में से केवल 10 सत्र ही ऐसे रहे, जिनमें पहले दिन सदन में सामान्य कामकाज भी हुआ। बिना कामकाज के पूरे दिन के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित किए जाने पर उस समय भी सवाल उठने लगे थे।
15 अक्तूबर, 1979 के विधानसभा सत्र में पहली बार बिगड़ी इस व्यवस्था ने पंजाब में सरकारों को विपक्ष के सवालों से बचने का तरीका सुझा दिया। यही कारण है कि 15 सिंतबर, 1983 से 17 मार्च 2003 के बुलाए गए पंजाब विधानसभा के कुल 37 सत्रों में से केवल सात बार 2 जून 1986, 21 दिसंबर 1992, 23 फरवरी 1993, 28 दिसंबर 1993, 7 मार्च 1994, 28 फरवरी 1996, 17 मार्च 2003 सदन की कार्यवाही के पहले दिन श्रद्धांजलियों के अलावा बाकी कामकाज हुआ। 15 मार्च, 2004 से विधानसभा में आज तक (कुल 36 सत्र) सदन के पहले दिन सामान्य कामकाज नहीं करने की परंपरा चल रही है।
सदन की कार्यवाही पर एक दिन का खर्च 70 लाख रुपये
हाल ही में पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने एक बयान में विधानसभा सत्रों की अवधि कम रखे जाने की हिमायत करते हुए दलील दी थी कि सदन की एक दिन की कार्यवाही पर 70 लाख रुपये खर्च होते हैं। वहीं, पंजाब विधानसभा में कामकाज की उक्त परिपाटी पर सवाल खड़ा करने वालों का भी यही आरोप है कि राज्य सरकार पूरा दिन सदन में कामकाज नहीं करके जनता के टैक्स का पैसा बर्बाद कर रही है। शुक्रवार को भी सदन की कार्यवाही मात्र 14 मिनट चली, यानी उस दिन के लिए 70 लाख रुपये बेकार खर्च कर दिए गए।