250 पन्नों की रिपोर्ट ने खोली पोल: हरियाणा में हाथ पर हाथ धरे बैठे निकाय, नहीं बढ़ा रहे अपने वित्तीय संसाधन
रिपोर्ट में कहा गया है कि निकाय संपत्ति, पानी, सीवरेज व अन्य करों को नहीं वसूल पा रहे हैं। निकायों की सरकार पर निर्भरता बढ़ती जा रही है। निकायों को अपने संसाधनों को सुदृढ़ करने की जरूरत है। जिस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। निकाय अपनी संपत्तियों का भी इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं।
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हरियाणा के शहरी स्थानीय निकाय अपने वित्तीय संसाधनों को बढ़ाने के बजाय हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। ये सरकार के अनुदान पर ही निर्भर हैं। अपनी संपत्तियों का निकाय इस्तेमाल नहीं कर पा रहे। 93 निकायों में से अनेक के पास अपने कर्मचारियों को वेतन देने तक का पैसा नहीं है। निकायों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए गठित वित्त आयोग के चेयरमैन पी. राघवेंद्र राव ने अपनी 250 पन्नों की रिपोर्ट में इस तरह की अनेक टिप्पिणयां की हैं।
राव ने एक साल तीन माह में तैयार की रिपोर्ट में निकायों के निठल्लेपन की पोल खोली है। उन्होंने निकायों को वित्तीय रूप से सक्षम बनाने के लिए अनेक सिफारिशें भी की हैं। उन्होंने निकायों को मुंबई नगर निगम व दक्षिण के निकायों से सीख लेने की सलाह दी है। आयोग ने सुझाव दिया है कि मुंबई नगर निगम का बजट हरियाणा से ज्यादा है।
दक्षिण में बहुत सशक्त निकाय हैं। उनकी कार्यप्रणाली को अपनाकर आय बढ़ाई जा सकती है। राव बीते वर्ष 30 दिसंबर को राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय को अपनी रिपोर्ट सौंप चुके हैं। सरकार रिपोर्ट को विधानसभा में सदन पटल पर रखेगी। अभी रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अपने कार्यालय व शहरी स्थानीय निकाय विभाग के उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट के अध्ययन का जिम्मा सौंपा है। रिपोर्ट पढ़ने के बाद यह सुझाएंगे कि कौन सी सिफारिशें लागू करनी है और कौन सी नहीं। रिपोर्ट के आधार पर ही निकायों के एक्ट में संशोधन किया जाएगा।
संभावनाएं बहुत, नहीं ला रहे नई परियोजनाएं
राव आयोग ने अपनी रिपोर्ट में टिप्पणी की है कि निकायों के वित्तीय तौर पर सक्षम होने की संभावनाएं बहुत हैं। निकाय नई परियोजनाएं लाने में विफल हैं। वे सेवाएं सुधारें, नई तकनीक का इस्तेमाल करें तो उनकी आय कई गुना बढ़ सकती है। इन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए सरकार के अनुदान पर निर्भरता कम करनी होगी। निकायों के क्रिया-कलापों को सुव्यवस्थित करने की जरूरत है।
निकायों में घोटाले भी कम नहीं
पंचकूला, फरीदाबाद, गुरुग्राम, करनाल व अंबाला सहित अन्य निकायों में करोड़ों रुपये के घोटाले भी हुए हैं। जिनकी जांच राज्य चौकसी ब्यूरो, कैग व अन्य जांच एजेंसियां कर रही हैं। फरीदाबाद नगर निगम के लेखा विभाग के अधिकारियों के बिना काम के किए भुगतान की जांच चल रही है। यह 23 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला है।
करनाल नगर निगम में औचक निरीक्षण के दौरान मिली अनियमितताओं और अंबाला नगर निगम में वर्षों से करोड़ों की बकाया रिकवरी भी इनके वित्तीय रूप से कमजोर होने का कारण है। अंबाला नगर निगम के लगभग डेढ़ सौ करोड़ लोगों के पास फंसे हैं। पंचकूला नगर निगम में बायो-रेमेडियेशन ऑफ लीगेसी वेस्ट (एक प्रकार से कचरे का जैव उपचार) घोटाला हुआ है। कूड़ा-कर्कट एकत्रित करने की निगम की क्षमता 400-500 एमटी है, 800 से 1200 एमटी की 5 करोड़ रुपये अदायगी दिखाई गई है।