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लॉकडाउन का असर: छह महीने से थियेटर बंद, कलाकार कहां से करें रोटी का प्रबंध
Sun, 27 Sep 2020 04:49 PM IST
ajay kumar
संजीव पंगोत्रा, चंडीगढ़
संजीव पंगोत्रा, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Sun, 27 Sep 2020 04:49 PM IST
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टैगोर थियेटर।
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कोरोना महामारी की सबसे बुरी मार थियेटर आर्टिस्टों पर पड़ी है। शहर में करीब 30 थियेटर ग्रुप हैं और ये छह महीने से बंद हैं। इनसे करीब 450 कलाकार जुड़े हैं। इनमें से 70 फीसदी कलाकार सरकारी जॉब में हैं या अपना काम धंधा करते हैं। ये लोग थियेटर पार्ट टाइम करते हैं। इन कलाकारों पर कोरोना महामारी का ज्यादा फर्क नहीं पड़ा है। लेकिन 30 फीसदी कलाकार हैं, जिनकी आमदनी का जरिया केवल थियेटर है। ये आर्थिक संकट में जी रहे हैं।
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जब अनलॉक हुआ तो प्रशासन की ओर से काफी कुछ खोल दिया गया, लेकिन थिएटर नहीं खोले गए। ऐसे में ये कलाकार अपनी रोजी-रोटी चलाने के लिए दूसरे काम धंधे कर रहे हैं। इनमें से कोई कलाकार दिहाड़ी मजदूरी कर रहा है तो कोई गुब्बारे बेचकर अपना घर चला रहा है।
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पहले टैगोर थियेटर 22-25 दिन तक बुक रहता था, अब सन्नाटा पसरा है
टैगोर थिएटर के पूर्व डायरेक्टर कुलदीप शर्मा ने बताया कि कोरोना से थिएटर और कलाकारों को काफी नुकसान पहुंचा है। महामारी से पहले टैगोर थिएटर महीने में 22-26 दिन कभी सांस्कृतिक व स्कूली कार्यक्रमों के लिए बुक रहता था। पिछले 6 महीने से टैगोर थिएटर में होने वाली सारी गतिविधियां बंद पड़ी हैं। टैगोर के अलावा पंजाब कला भवन के आडिटोरियम, बाल भवन के ऑडिटोरियम में नाटक होते थे, वहां भी सन्नाटा पसरा हुआ है।
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हर दूसरे दिन लगती थी कला प्रदर्शनी, अब बेकार बैठे हैं कलाकार
कोरोना का असर थिएटर के साथ साथ कला प्रदर्शनी और संगीत कार्यक्रमों पर भी पड़ा है। शहर की म्यूजियम एंड आर्ट गैलरी, पंजाब कला भवन में हर दूसरे दिन कला प्रदर्शनी लगती थी। प्राचीन कला केंद्र की रजिस्ट्रार शोभा कौसर ने कहा कि जब से कोरोना शुरू हुआ है, तब से कलाकार अपने घरों में बैकार बैठे हैं। इससे न सिर्फ उनकी कला प्रभावित हुई बल्कि आमदनी भी। हालांकि कलाकारों को प्राचीन कला केंद्र ने ऑनलाइन मंच दिया है। साप्ताहिक बैठक करवाई जा रही है, ताकि उनके अंदर गतिशीलता बनी रहे।