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हरियाणा: बजट पर पक्ष का दावा- भविष्य को मजबूत रखने की कार्ययोजना, विपक्ष बोला- उम्मीदों को कुचलने वाला

Wed, 02 Feb 2022 01:37 AM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़ Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Wed, 02 Feb 2022 01:37 AM IST
सार

प्रदेश की गठबंधन सरकार के मंत्रियों ने केंद्रीय बजट को सराहा तो विपक्ष ने इसपर निराशा जताई। सता पक्ष ने इसे भविष्य को मजबूत रखने की कार्ययोजना बताया। 

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The Union Budget was appreciated by the ruling party in Haryana, the opposition rejected it
selja kumari, bhupinder singh hooda, Manohar lal - फोटो : Social Media

विस्तार

हरियाणा की गठबंधन सरकार के मंत्रियों ने केंद्रीय बजट को सराहा है, जबकि विपक्षी दलों ने सिरे से नकार दिया। महिला एवं बाल विकास मंत्री कमलेश ढांडा ने कहा कि बजट में महिलाओं और बच्चों के भविष्य को मजबूत रखने की विशेष कार्ययोजना को प्राथमिकता दी गई है। देश, प्रदेश में इस वर्ग के उत्थान के लिए जितने अधिक प्रयास वर्तमान में हो रहे हैं, वह निश्चित तौर पर आधी आबादी, विशेषकर भविष्य के कर्णधार युवाओं को समर्थ बनाएंगे।

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मिशन शक्ति, मिशन वात्सल्य, पोषण 2.0 एवं सक्षम आंगनबाड़ी को एकरूपता के साथ लागू करने की घोषणा आम बजट में की गई है। मिशन शक्ति के तहत जहां महिलाएं, किशोरियों और बच्चियों की सुरक्षा के अनुकूल माहौल तैयार करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे, वहीं मिशन वात्सल्य के तहत बाल अधिकारों को संरक्षित करने, निराश्रित बच्चों को दत्तक अभिभावकों को सौंपने एवं देखभाल की व्यवस्था को प्रभावी बनाने पर जोर दिया जाएगा।

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मनोहर लाल बोले- महामारी से प्रभावित अर्थव्यवस्था को उबारने वाला बजट

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि महामारी से प्रभावित भारतीय अर्थव्यवस्था को उबारने में यह बजट मददगार साबित होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि अमृतकाल में प्रस्तुत सर्व समावेशी आत्मनिर्भर बजट गांव-गरीब व शहर तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन व अंत्योदय उत्थान के संकल्प को भी पूर्ण करेगा। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण बधाई की पात्र हैं।

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इस सत्र में किसानों से 1,208 मीट्रिक टन गेहूं, धान खरीदने व एमएसपी के जरिये किसानों के खाते में 2.37 लाख करोड़ रुपये भेजने का फैसला सराहनीय है। इससे हरियाणा के लाखों किसान लाभान्वित होंगे। स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज का कहना है कि बजट में डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने से देश को पंख लग गए हैं। देश स्वर्णिम भारत की ओर तेजी से अग्रसर होगा।

आंकड़ों के खेल में उलझे बजट ने हर वर्ग को किया निराश : हुड्डा

नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा ने कहा कि केंद्रीय बजट ने नौकरीपेशा, आम आदमी से लेकर किसान, कारोबारी समेत तमाम वर्गों को निराश किया है। आसमान छूती महंगाई से राहत और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। नौकरीपेशा वर्ग के लोगों को आयकर में छूट नहीं दी गई। पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस और खाद्य पदार्थों की कीमतें कम करने को लेकर भी कोई घोषणा नहीं हुई है।

आंकड़ों के खेल में उलझा यह बजट पूरी तरह से खोखला है। केंद्र सरकार ने इस बजट में खेती-किसानी के साथ धोखा किया है। खाद पर 1.40 लाख करोड़ रुपये सब्सिडी घटाकर 1.05 लाख करोड़ रुपये किए जाने से किसानों पर महंगी खाद का बोझ पड़ना तय है। गारंटिड एमएसपी की चर्चा किए बगैर गेहूं व धान के लिए किसानों को 2.37 लाख करोड़ रुपये एमएसपी के रूप में दिए जाने का प्रावधान बजट में किया गया है। एमएसपी के दायरे में आने वाली बाकी 21 फसलों का एमएसपी देने से सरकार पीछे हट रही है। इससे संकेत साफ है कि सरकार की मंशा सभी फसलों पर एमएसपी देने की नहीं है।

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kumari selja - फोटो : A

देशवासियों की उम्मीदों पर पानी फेरा, हरियाणा की अनदेखी : सैलजा

हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष कुमारी सैलजा ने केंद्रीय बजट को देशवासियों की उम्मीदों को कुचलने वाला बताया है। बजट में हरियाणा की उपेक्षा पर सैलजा ने निराशा जताई है। उन्होंने कहा कि आज बेरोजगारी चरम पर है, महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है और अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। सरकार की विफल नीतियों और कोरोना काल में उपजे हालातों के बीच लोगों को उम्मीद थी कि इस बजट के जरिये उन्हें बड़ी राहत मिलेगी। मगर बजट ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। यह जनविरोधी बजट है। किसानों के लिए बजट में कुछ खास नहीं। सब्सिडी में कटौती कर गरीबों पर प्रहार किया गया है।

वित्त वर्ष 2021-22 में फूड सब्सिडी 2.86 लाख करोड़ रुपये थी, जो वित्त वर्ष 2022-23 में घटा कर 2.06 लाख करोड़ कर दी गई है। किसानों को खाद पर मिलने वाली सब्सिडी को 1.40 लाख करोड़ रुपये से घटा कर 1.05 लाख करोड़ रुपये किया गया है। मनरेगा का बजट 98,000 करोड़ रुपये से कम कर 73,000 करोड़ रुपये कर दिया है। पिछले वर्ष न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद का बजट 2.48 लाख करोड़ रुपये था, जिसमें 11000 करोड़ की कटौती कर उसे वर्ष 2.37 लाख करोड़ कर दिया है।

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अभय चौटाला - फोटो : पीटीआई

महंगाई, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्र की अनदेखी : अभय

ऐलनाबाद के विधायक अभय सिंह चौटाला ने बजट को किसान, मजदूर, छोटा व्यापारी, कर्मचारी, पेंशनधारियों और आम आदमी विरोधी बताया है। उन्होंने कहा कि बजट में महंगाई कम करने, युवाओं को रोजगार देने, शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्र के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं किए गए हैं। स्वच्छ भारत ग्रामीण योजना की बजट राशि को घटा दिया गया है। यही 2020-21 में 9998 करोड़ रुपये थी, जिसे 2022-23 के लिए घटाकर 7192 करोड़ रुपये कर दिया है। मतलब साफ है कि स्वच्छता भाजपा सरकार की प्राथमिकता नहीं है।

मूल्य स्थिरीकरण (प्राइस स्टेबलाइजेशन) जिसमें महंगाई रोकने के लिए बजट का प्रावधान किया जाता है उसे बढ़ाया जाना चाहिए था, लेकिन उसमें भारी कटौती की गई है। 2020-21 में 11135 करोड़ रुपये इस पर खर्च किए गए थे, जो 2021-22 में 2700 करोड़ कर दिए थे, अब 2022-23 में घटाकर मात्र 1500 करोड़ कर दिए गए हैं। रसोई गैस सब्सिडी डीबीटी स्कीम के तहत दी जाती है, उसे भी घटा दिया गया है। 2020-21 में 23667 करोड़ की सब्सिडी दी गई थी, जिसे 2021-22 में घटाकर 12480 करोड़ कर दिया गया था, अब 2022-23 में इसे घटाकर मात्र 4 हजार करोड़ रुपये कर दिया है।
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