हरियाणा: क्या और घातक हो रहा कोरोना, पहली लहर में आठ तो दूसरी में रोजाना हुईं 44 लोगों की मौतें
कोरोना की दूसरी लहर ने बच्चे, बूढ़े और जवान किसी को भी नहीं बख्शा। पहली लहर में केवल बुजुर्गों और बीमार लोगों को कोरोना ने शिकार बनाया था। दूसरी लहर में यूके में मिले वेरियंट के आने से युवाओं की भी अधिक मौतें हुईं। इतना ही नहीं कई जिलों में तो बच्चों की भी मौतें हुईं।वहीं स्वस्थ लोगों को भी कोरोना ने आसानी से शिकार बनाया।
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महामारी की पहली लहर के मुकाबले दूसरी लहर घातक साबित हुई है। न केवल संक्रमण के मामले में बल्कि पहली लहर का एक साल और दूसरी लहर के तीन माह के आंकड़े भारी हैं। पहली लहर में प्रतिदिन आठ मरीजों की मौत हुई, जबकि दूसरी लहर में रोजाना 44 मरीजों की जान गई।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक कोरोना की दूसरी लहर में 5662 मरीजों की मौत हुई। मई में सबसे अधिक 3962 मरीजों की जान गई है। ऐसे में इस माह का प्रतिदिन की मौत का आंकड़ा 127 बनता है, जो काफी भयावह है। इसी प्रकार, मार्च 2021 में 105 मरीजों की मौत हुई है। अप्रैल में यह संख्या बढ़कर 1052 हो गई। जून में 7 दिनों में 329 मरीजों की जान जा चुकी है। इसी के मुकाबले, मार्च 2021 से पहले एक साल में 3050 लोगों की जान गई थी।
चार माह में 4.91 लाख लोग हुए संक्रमित
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, एक मार्च 2021 से कोरोना की दूसरी लहर को गिना जाता है। ऐसे में मार्च से पहले प्रदेश में कोरोना के कुल केसों की संख्या 2,70,950 थी। दूसरी लहर में तेजी से संक्रमण फैला तो चार माह में नए केस 4,91,341 बढ़ गए। इससे कुल संक्रमितों की संख्या 7,62,291 हो गई है। गंभीर मरीजों की संख्या 15 हजार के पार पहुंच गई थी। एक समय तो प्रदेश के अस्पताल और मेडिकल कॉलेजों में वेंटिलेटर और ऑक्सीजन की कमी होने लगी। दिल्ली तक के मरीजों ने हरियाणा का रूख कर लिया था।
आठ मई को सक्रिय मरीज थे एक लाख पार
इसी प्रकार, सक्रिय मरीजों की बात करें तो एक मार्च को 1288 एक्टिव केस थे लेकिन आठ मई को यह संख्या 1,16,109 पहुंच गई थी। अकेले मई माह में ही 2,55,069 नए केस मिले। हालांकि, इसके बाद धीरे-धीरे सक्रिय मामले घटने लगे हैं।
आंकड़ों के मुताबिक पहली लहर के मुकाबले कोरोना की दूसरी लहर ज्यादा खतरनाक थी। शुक्र है कि अब धीरे-धीरे केस कम हो रहे हैं। लोगों को चाहिए कि सावधानी बरतें। अभी महामारी खत्म नहीं हुई है, सतर्कता और सजगता से ही बचा जा सकता है। - डॉ. उषा गुप्ता, निदेशक, स्वास्थ्य विभाग।