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Chandigarh News: वर्षों से एक ही मुद्दे उठ रहे, प्रशासक भी बोल पड़े- इसे सिर्फ सलाह देने वाली कमेटी न समझें
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चंडीगढ़। यूटी प्रशासक की एडवाइजरी काउंसिल की बैठक में मंगलवार को फिर वही मुद्दे उठे, जो पिछले 10-15 वर्षों से उठ रहे हैं। सदस्यों ने लाल डोरे के बाहर पानी का कनेक्शन, भिखारियों की बढ़ती संख्या, ट्रैफिक जाम, लीज होल्ड से फ्री होल्ड, खेल के मैदान, अस्पतालों की स्थिति सुधारने समेत कई मुद्दे उठाए। यह देख प्रशासक गुलाबचंद कटारिया बोलना पड़ा। उन्होंने कहा कि इस कमेटी को सिर्फ सलाह देने वाली कमेटी न समझें। उन्होंने तीन महीने बाद फिर बैठक बुलाने और जल्द सब-कमेटियों के गठन की बात रही।
सेक्टर-10 स्थित होटल माउंट व्यू में आयोजित बैठक सुबह 10 से दोपहर एक बजे तक चली। सभी सदस्यों को तीन-तीन मिनट का समय दिया गया। सदस्य डॉ. संजीव भाटिया ने कहा कि चंडीगढ़ के स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम करने की जरूरत है। पीजीआई, जीएमएसएच-16 और जीएमसीएच-32 तो अपनी पूरी क्षमता से कम कर रहे हैं लेकिन सेक्टर-45, मनीमाजरा और सेक्टर-48 का अस्पताल 30 फीसदी इंफ्रास्ट्रक्चर का ही प्रयोग हो रहा है।
अजय जग्गा ने कहा कि शहर में लिटिगेशन बढ़ रही है। कई ऐसे मामले हैं, जो 30-40 साल से लटके हुए हैं। उन्होंने लिटिगेशन ऑडिट कराने की जरूरत बताई। बैठक के दौरान बच्चों के लिए खेल का मैदान नहीं होने का मुद्दा भी उठा। सदस्यों ने कहा कि बड़े-बड़े सरकारी स्कूल हैं, जिनके पास बड़े-बड़े प्लेग्राउंड है। उन्हें बच्चों के लिए शाम को खोला जाना चाहिए। फॉसवेक के चेयरमैन बलजिंदर बिट्टू ने कहा कि शहर में भिखारियों और रेहड़ी फड़ी की संख्या बढ़ती जा रही है। इस पर तुरंत गंभीरता से काम करने की जरूरत है। कहा कि कई सोसाइटियों में प्रशासन लिफ्ट लगाने की इजाजत नहीं दे रहा है। बुजुर्ग लोग वहां रहते हैं, जो बहुत परेशानी में हैं। हाउसिंग बोर्ड के स्वतंत्र मकानों के नक्शे को भी हाउसिंग बोर्ड पास नहीं कर रहा है। पूर्व मेयर सुभाष चावला ने कहा कि चंडीगढ़ का हर कोना ब्यूटीफुल होना चाहिए। सभी एंट्री पॉइंट्स पर स्लम्स बने हुए हैं। जो भी योग्य लोग हैं, उनकी पहचान कर उन्हें पक्के मकान दिए जाने चाहिए ताकि शहर फिर से स्लम फ्री हो सके। चावला ने अमर उजाला से बात करते हुए कहा कि वह पिछले 15-18 साल में कई बैठकों में शामिल हुए हैं। आज भी वही मुद्दे उठाए जा रहे हैं।
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सेक्टर-10 स्थित होटल माउंट व्यू में आयोजित बैठक सुबह 10 से दोपहर एक बजे तक चली। सभी सदस्यों को तीन-तीन मिनट का समय दिया गया। सदस्य डॉ. संजीव भाटिया ने कहा कि चंडीगढ़ के स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम करने की जरूरत है। पीजीआई, जीएमएसएच-16 और जीएमसीएच-32 तो अपनी पूरी क्षमता से कम कर रहे हैं लेकिन सेक्टर-45, मनीमाजरा और सेक्टर-48 का अस्पताल 30 फीसदी इंफ्रास्ट्रक्चर का ही प्रयोग हो रहा है।
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अजय जग्गा ने कहा कि शहर में लिटिगेशन बढ़ रही है। कई ऐसे मामले हैं, जो 30-40 साल से लटके हुए हैं। उन्होंने लिटिगेशन ऑडिट कराने की जरूरत बताई। बैठक के दौरान बच्चों के लिए खेल का मैदान नहीं होने का मुद्दा भी उठा। सदस्यों ने कहा कि बड़े-बड़े सरकारी स्कूल हैं, जिनके पास बड़े-बड़े प्लेग्राउंड है। उन्हें बच्चों के लिए शाम को खोला जाना चाहिए। फॉसवेक के चेयरमैन बलजिंदर बिट्टू ने कहा कि शहर में भिखारियों और रेहड़ी फड़ी की संख्या बढ़ती जा रही है। इस पर तुरंत गंभीरता से काम करने की जरूरत है। कहा कि कई सोसाइटियों में प्रशासन लिफ्ट लगाने की इजाजत नहीं दे रहा है। बुजुर्ग लोग वहां रहते हैं, जो बहुत परेशानी में हैं। हाउसिंग बोर्ड के स्वतंत्र मकानों के नक्शे को भी हाउसिंग बोर्ड पास नहीं कर रहा है। पूर्व मेयर सुभाष चावला ने कहा कि चंडीगढ़ का हर कोना ब्यूटीफुल होना चाहिए। सभी एंट्री पॉइंट्स पर स्लम्स बने हुए हैं। जो भी योग्य लोग हैं, उनकी पहचान कर उन्हें पक्के मकान दिए जाने चाहिए ताकि शहर फिर से स्लम फ्री हो सके। चावला ने अमर उजाला से बात करते हुए कहा कि वह पिछले 15-18 साल में कई बैठकों में शामिल हुए हैं। आज भी वही मुद्दे उठाए जा रहे हैं।
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