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फिल्म 120 बहादुर के प्रमाणन और रिलीज़ पर रोक की मांग पर दो दिन में निर्णय ले केंद्र : हाईकोर्ट
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-फिल्म में 13 कुमाऊं रेजीमेंट की सी कंपनी की लड़ाई के गलत चित्रण का आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। फिल्म 120 बहादुर के प्रमाणन और प्रस्तावित रिलीज पर रोक की मांग वाली याचिका का निपटारा करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को दो दिन के भीतर निर्णय लेने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि याची फिल्म के नाम को लेकर इतना संवेदनशील क्यों हैं। कोर्ट ने कहा कि अभी तो आपने ट्रेलर देखा है, वीरों की बहादुरी तो दो घंटे की फिल्म में दिखाई देगी।
याचिका के अनुसार लद्दाख के चुशूल सेक्टर में 18,000 फीट की ऊंचाई पर लड़ी गई इस लड़ाई में 13 कुमाऊं रेजिमेंट की सी कंपनी के 120 सैनिकों में से 114 ने सर्वोच्च बलिदान दिया था। याचिकाकर्ताओं ने रक्षा मंत्रालय के 1992 के आधिकारिक रिकाॅर्ड का हवाला देते हुए कहा है कि यह युद्ध सामूहिक वीरता का अद्वितीय उदाहरण माना जाता है। कंपनी के अधिकांश सैनिक रेवाड़ी क्षेत्र के अहीर (यादव) समुदाय से थे। याचिका संयुक्त अहीर रेजीमेंट मोर्चा और अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर की गई है जिसमें अदालत से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा गया है कि यह मामला सामूहिक सम्मान, ऐतिहासिक सत्य और रेजीमेंट की गरिमा के संरक्षण से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि फिल्म 18 नवंबर 1962 को चीन-भारत युद्ध के दौरान लड़ी गई रेजांगला की ऐतिहासिक लड़ाई के सत्य को विकृत रूप में पेश करती है।
याचिकाकर्ताओं का मुख्य आरोप है कि फिल्म में मेजर शैतान सिंह, पीवीसी को एकमात्र नायक के रूप में दिखाया गया है और उनका नाम बदलकर भाटी कर दिया गया है। याचिका में कहा गया है कि फिल्म का यह चित्रण सिनेमैटोग्राफ एक्ट और उसके दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है जिनमें इतिहास को विकृत रूप में प्रस्तुत करने पर रोक है। साथ ही भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 356 का भी उल्लेख किया गया है, जो मृत व्यक्तियों के बारे में आपत्तिजनक आरोप लगाने पर रोक लगाती है। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि फिल्म को दिया गया प्रमाणपत्र रद्द किया जाए और फिल्म का नाम बदलकर 120 वीर अहीर किया जाए। वैकल्पिक रूप से यह घोषणा करने का आग्रह किया गया है कि फिल्म पूरी तरह काल्पनिक है और वास्तविक घटनाओं पर आधारित नहीं है।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। फिल्म 120 बहादुर के प्रमाणन और प्रस्तावित रिलीज पर रोक की मांग वाली याचिका का निपटारा करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को दो दिन के भीतर निर्णय लेने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि याची फिल्म के नाम को लेकर इतना संवेदनशील क्यों हैं। कोर्ट ने कहा कि अभी तो आपने ट्रेलर देखा है, वीरों की बहादुरी तो दो घंटे की फिल्म में दिखाई देगी।
याचिका के अनुसार लद्दाख के चुशूल सेक्टर में 18,000 फीट की ऊंचाई पर लड़ी गई इस लड़ाई में 13 कुमाऊं रेजिमेंट की सी कंपनी के 120 सैनिकों में से 114 ने सर्वोच्च बलिदान दिया था। याचिकाकर्ताओं ने रक्षा मंत्रालय के 1992 के आधिकारिक रिकाॅर्ड का हवाला देते हुए कहा है कि यह युद्ध सामूहिक वीरता का अद्वितीय उदाहरण माना जाता है। कंपनी के अधिकांश सैनिक रेवाड़ी क्षेत्र के अहीर (यादव) समुदाय से थे। याचिका संयुक्त अहीर रेजीमेंट मोर्चा और अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर की गई है जिसमें अदालत से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा गया है कि यह मामला सामूहिक सम्मान, ऐतिहासिक सत्य और रेजीमेंट की गरिमा के संरक्षण से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि फिल्म 18 नवंबर 1962 को चीन-भारत युद्ध के दौरान लड़ी गई रेजांगला की ऐतिहासिक लड़ाई के सत्य को विकृत रूप में पेश करती है।
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याचिकाकर्ताओं का मुख्य आरोप है कि फिल्म में मेजर शैतान सिंह, पीवीसी को एकमात्र नायक के रूप में दिखाया गया है और उनका नाम बदलकर भाटी कर दिया गया है। याचिका में कहा गया है कि फिल्म का यह चित्रण सिनेमैटोग्राफ एक्ट और उसके दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है जिनमें इतिहास को विकृत रूप में प्रस्तुत करने पर रोक है। साथ ही भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 356 का भी उल्लेख किया गया है, जो मृत व्यक्तियों के बारे में आपत्तिजनक आरोप लगाने पर रोक लगाती है। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि फिल्म को दिया गया प्रमाणपत्र रद्द किया जाए और फिल्म का नाम बदलकर 120 वीर अहीर किया जाए। वैकल्पिक रूप से यह घोषणा करने का आग्रह किया गया है कि फिल्म पूरी तरह काल्पनिक है और वास्तविक घटनाओं पर आधारित नहीं है।
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