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Chandigarh News: स्वास्थ्य विभाग की गजब पसंद, कैनन का प्रिंटर और सैमसंग का टैबलेट

Wed, 23 Sep 2026 02:08 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 23 Sep 2026 02:08 AM IST
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The Health Department's curious choice: a Canon printer and a Samsung tablet.
चंडीगढ़। स्वास्थ्य विभाग में सरकारी खरीद का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें सामान की जरूरत से ज्यादा ब्रांड की पसंद नजर आ रही है। जीएमएसएच-16 में सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जेम) के जरिए प्रिंटर और टैबलेट की खरीद में सामान्य तकनीकी मानक तय करने के बजाय सीधे ब्रांड का नाम दर्ज किया गया। ऑडिट ने इसे नियमों के विपरीत बताते हुए आपत्ति जताई है।
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ऑडिट रिपोर्ट 2021-25 की अवधि से संबंधित है। इसके अनुसार, विभाग ने 3,89,920 रुपये में कैनन का लेजर मोनो कंप्यूटर प्रिंटर और 3,94,800 रुपये में सैमसंग के टैबलेट खरीदे। दोनों की खरीद पर कुल 7.84 लाख रुपये खर्च हुए। ऑडिट को रिकॉर्ड में इन ब्रांडों को चुनने का पर्याप्त औचित्य नहीं मिला। साथ ही, किसी खास ब्रांड की खरीद की जरूरत बताने वाला प्रोपराइटरी आर्टिकल सर्टिफिकेट (पीएसी) भी रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं था।
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सामान्य तकनीकी मानकों पर होनी थी खरीद
ऑडिट के अनुसार जीएफआर-2017 के नियम 149 के तहत जेम पर खरीद सामान्य और कार्यात्मक तकनीकी मानकों के आधार पर होनी चाहिए, ताकि योग्य विक्रेताओं को प्रतिस्पर्धा का अवसर मिल सके। लेकिन संबंधित दस्तावेजों में तकनीकी विशेषताओं, प्रदर्शन मानकों और गुणवत्ता के मापदंड तय करने के बजाय सीधे कैनन और सैमसंग के ब्रांड नाम दर्ज किए गए।
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ब्रांड चुनने का औचित्य नहीं मिला
ऑडिट में कहा गया है कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई कारण नहीं मिला, जिससे यह साबित हो कि इन्हीं ब्रांड के सामान खरीदना जरूरी था। किसी विशेष ब्रांड की खरीद अपरिहार्य होने पर पीएसी जैसी निर्धारित प्रक्रिया अपनानी होती है। इस मामले में ऐसा प्रमाणपत्र भी रिकॉर्ड पर नहीं मिला।
प्रतिस्पर्धा सीमित होने की आशंका
ऑडिट के मुताबिक ब्रांड का नाम सीधे तय करने से संभावित विक्रेताओं की भागीदारी सीमित हो सकती है। इससे जेम पर प्रतिस्पर्धा और खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता प्रभावित होने की आशंका रहती है। ऐसी स्थिति में विभाग को गैर-प्रतिस्पर्धी कीमत पर सामान मिलने और अतिरिक्त खर्च का जोखिम हो सकता है।

जवाब मांगा, नहीं मिला
ऑडिट आपत्ति के बाद विभाग से जवाब मांगा गया, लेकिन कोई उत्तर उपलब्ध नहीं कराया गया। अब मामले में विभाग के अंतिम अनुपालन का इंतजार है। कुल 7.84 लाख रुपये की खरीद में ब्रांड आधारित प्रक्रिया को लेकर ऑडिट की आपत्ति दर्ज है। मामले पर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. सुमन से पक्ष लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला।
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