{"_id":"6a724f0c4bb669d01102e46f","slug":"the-end-of-ego-is-the-path-to-self-realization-pandit-ramkumar-mishra-chandigarh-news-c-16-1-pkl1005-1088670-2026-08-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"अहंकार का अंत ही आत्मकल्याण का मार्ग : पंडित रामकुमार मिश्रा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अहंकार का अंत ही आत्मकल्याण का मार्ग : पंडित रामकुमार मिश्रा
विज्ञापन
विज्ञापन
चंडीगढ़। श्री शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन कथा व्यास पंडित रामकुमार मिश्रा ने नारद मोह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि अहंकार मनुष्य के विवेक को नष्ट कर देता है जबकि विनम्रता उसे ईश्वर के निकट ले जाती है। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और पूरा पंडाल शिवमय हो गया।
कथावाचक ने बताया कि देवर्षि नारद को अपनी तपस्या और सौंदर्य का अभिमान हो गया था। भक्त के कल्याण के लिए भगवान विष्णु ने अपनी योगमाया से ऐसी लीला रची कि नारद ने हरि जैसा मुख मांगा लेकिन हरि शब्द के दो अर्थ होने के कारण उन्हें वानर का मुख प्राप्त हुआ। स्वयंवर में उपहास का पात्र बनने के बाद जब उनका अहंकार टूट गया, तब भगवान विष्णु ने उन्हें वास्तविक स्वरूप लौटाते हुए समझाया कि सच्चा भक्त अहंकार से नहीं बल्कि समर्पण और विनम्रता से महान बनता है।
पंडित मिश्रा ने कहा कि यह प्रसंग प्रत्येक व्यक्ति को अपने भीतर के अहंकार का त्याग कर सेवा, भक्ति और सदाचार का मार्ग अपनाने की प्रेरणा देता है। कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन के बीच भगवान शिव और भगवान विष्णु के जयकारे लगाए। आयोजक बीके सिंह, अशोक जिंदल ने बताया कि कथा के अंत में श्रद्धालुओं ने भगवान शिव से सुख-समृद्धि और लोककल्याण की प्रार्थना की।
विज्ञापन
कथावाचक ने बताया कि देवर्षि नारद को अपनी तपस्या और सौंदर्य का अभिमान हो गया था। भक्त के कल्याण के लिए भगवान विष्णु ने अपनी योगमाया से ऐसी लीला रची कि नारद ने हरि जैसा मुख मांगा लेकिन हरि शब्द के दो अर्थ होने के कारण उन्हें वानर का मुख प्राप्त हुआ। स्वयंवर में उपहास का पात्र बनने के बाद जब उनका अहंकार टूट गया, तब भगवान विष्णु ने उन्हें वास्तविक स्वरूप लौटाते हुए समझाया कि सच्चा भक्त अहंकार से नहीं बल्कि समर्पण और विनम्रता से महान बनता है।
विज्ञापन
पंडित मिश्रा ने कहा कि यह प्रसंग प्रत्येक व्यक्ति को अपने भीतर के अहंकार का त्याग कर सेवा, भक्ति और सदाचार का मार्ग अपनाने की प्रेरणा देता है। कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन के बीच भगवान शिव और भगवान विष्णु के जयकारे लगाए। आयोजक बीके सिंह, अशोक जिंदल ने बताया कि कथा के अंत में श्रद्धालुओं ने भगवान शिव से सुख-समृद्धि और लोककल्याण की प्रार्थना की।
विज्ञापन