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Chandigarh News: महर्षि वाल्मीकि से संबंधित विवादित सामग्री हटाने की मांग खारिज
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-हाईकोर्ट ने जनहित याचिका को बताया आधारहीन और अदालत के समय की बर्बादी
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। निजी चैनल के कार्यक्रम में महर्षि वाल्मीकि के बारे में आपत्तिजनक तथ्य बताने का आरोप लगाते हुए वीडियो हटाने, चैनल व एंकर से माफी और केंद्र सरकार से कार्रवाई की अपील वाली जनहित याचिका को वापस लेने की मांग मंजूर करते हुए खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि यह याचिका और कुछ नहीं बल्कि न्यायालय के समय की बर्बादी है।
जालंधर निवासी हनी बालू ने याचिका में आरोप लगाया है कि वाल्मीकि जयंती से संबंधित प्रसारण में महर्षि वाल्मीकि के बारे में गलत तथ्य प्रसारित किए गए जिससे वाल्मीकि समाज की भावनाएं आहत हुईं और यह प्रसारण प्रसारण-संहिता का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता ने वीडियो को यूट्यूब, इंस्टाग्राम और फेसबुक सहित सभी प्लेटफॉर्म से हटाने की मांग की थी। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने पूछा कि इसमें गलत क्या है। यह मामला इतिहास का है या पौराणिक कथा का? अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति की बुराई से अच्छाई की ओर यात्रा सामाजिक शिक्षा का विषय है। अदालत ने याचिका पर गंभीरता पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या आप इस याचिका को लेकर गंभीर हैं? आप अदालत का समय बर्बाद कर रहे हैं।
साथ ही याचिकाकर्ता को चेतावनी दी गई कि यदि आरोप लगाए जा रहे हैं तो उनका प्रमाण प्रस्तुत किया जाए। कार्यवाही के दौरान अदालत ने बार एसोसिएशन में 10,000 रुपये जुर्माना लगाने की चेतावनी भी दी। अदालत की सख्त टिप्पणियों के बाद याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। इसके बाद हाईकोर्ट ने मामला वापस लिए जाने के कारण खारिज कर दिया और साथ ही जुर्माना हटा दिया।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। निजी चैनल के कार्यक्रम में महर्षि वाल्मीकि के बारे में आपत्तिजनक तथ्य बताने का आरोप लगाते हुए वीडियो हटाने, चैनल व एंकर से माफी और केंद्र सरकार से कार्रवाई की अपील वाली जनहित याचिका को वापस लेने की मांग मंजूर करते हुए खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि यह याचिका और कुछ नहीं बल्कि न्यायालय के समय की बर्बादी है।
जालंधर निवासी हनी बालू ने याचिका में आरोप लगाया है कि वाल्मीकि जयंती से संबंधित प्रसारण में महर्षि वाल्मीकि के बारे में गलत तथ्य प्रसारित किए गए जिससे वाल्मीकि समाज की भावनाएं आहत हुईं और यह प्रसारण प्रसारण-संहिता का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता ने वीडियो को यूट्यूब, इंस्टाग्राम और फेसबुक सहित सभी प्लेटफॉर्म से हटाने की मांग की थी। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने पूछा कि इसमें गलत क्या है। यह मामला इतिहास का है या पौराणिक कथा का? अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति की बुराई से अच्छाई की ओर यात्रा सामाजिक शिक्षा का विषय है। अदालत ने याचिका पर गंभीरता पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या आप इस याचिका को लेकर गंभीर हैं? आप अदालत का समय बर्बाद कर रहे हैं।
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साथ ही याचिकाकर्ता को चेतावनी दी गई कि यदि आरोप लगाए जा रहे हैं तो उनका प्रमाण प्रस्तुत किया जाए। कार्यवाही के दौरान अदालत ने बार एसोसिएशन में 10,000 रुपये जुर्माना लगाने की चेतावनी भी दी। अदालत की सख्त टिप्पणियों के बाद याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। इसके बाद हाईकोर्ट ने मामला वापस लिए जाने के कारण खारिज कर दिया और साथ ही जुर्माना हटा दिया।
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