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Chandigarh News: सभी केंद्र... धान की ढुलाई का खर्च वहन करेगी केंद्र सरकार
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-मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात के बाद दी जानकारी
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई) के डिपो में धान की डिलीवरी पहुंचाने पर आने वाले खर्च की भरपाई अब केंद्र सरकार करेगी। इससे पहले यह राइस मिलर्स की ओर से की जा रही थी। यह फैसला मुख्यमंत्री भगवंत मान की सोमवार को केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी से बैठक में लिया गया। इसी के साथ धान की खरीद प्रक्रिया को व्यवस्थित रूप से सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने यह सहमति जताई है कि वह 31 मार्च 2025 तक पंजाब के गोदामों में पड़े अनाज की लिफ्टिंग पूरी कर लेंगे।
बता दें इस समय पंजाब के गोदामों में 120 लाख मीट्रिक टन अनाज है, अब तक केवल 7 लाख मीट्रिक टन की लिफ्टिंग की गई है। सीएम मान ने बताया कि प्रदेश की मंडियों में रोजाना डेढ़ से दो लाख मीट्रिक टन धान पहुंच रहा है, आने वाले दिनों में प्रति दिन 10 लाख मीट्रिक टन तक धान आने की उम्मीद है। 15 नवंबर के बाद से प्रदेश में मिलिंग की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी, ऐसे में गोदामों से अनाज उठाने के लिए केंद्र ने गंभीरता दिखाई है।
आढ़तियों का कमीशन बहाल करने पर होगा विचार
आढ़तियों को कमीशन भत्ता देने की मांग पर सीएम मान ने कहा कि पिछले पांच वर्षों/2019-20 से आढ़तियों को दिए जा रहे कमीशन में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है, जबकि इन वर्षों के दौरान उनके खर्चे कई गुना बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार की ओर से फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य हर साल बढ़ाया जाता है, जबकि 2019-20 से ही आढ़तियों को 45.38 से 46 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से कमीशन दिया जा रहा है। इस पर केंद्रीय मंत्री ने आश्वासन दिया है कि वह अपनी पॉलिसी पर जल्द ही रिव्यू करेंगे।
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आईआईटी खड़गपुर की रिपोर्ट के बाद नमी में मिल सकती है राहत
गोदाम में पड़े-पड़े धान की नमी कम होने (ड्राइएज) के मुद्दे पर सीएम मान ने बताया कि एमएसपी पर खरीद के लिए एक प्रतिशत ड्राइएज की अनुमति थी। डीएफपीडी की ओर से इसे घटाकर 0.5 प्रतिशत कर दिया गया। इस पर सीएम मान ने ड्राइएज को एमएसपी के एक प्रतिशत के हिसाब से अदा करने का मिलर्स का पक्ष रखा। इस पर केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि वह आईआईटी खड़गपुर से इस पर एक सर्वे करा रहे हैं, जिसमें देश के अन्य राज्यों से भी रिपोर्ट ली जा रही है, रिपोर्ट आने के बाद ड्राइएज पर 0.5 प्रतिशत को एक प्रतिशत भुगतान को लेकर फैसला किया जाएगा।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई) के डिपो में धान की डिलीवरी पहुंचाने पर आने वाले खर्च की भरपाई अब केंद्र सरकार करेगी। इससे पहले यह राइस मिलर्स की ओर से की जा रही थी। यह फैसला मुख्यमंत्री भगवंत मान की सोमवार को केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी से बैठक में लिया गया। इसी के साथ धान की खरीद प्रक्रिया को व्यवस्थित रूप से सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने यह सहमति जताई है कि वह 31 मार्च 2025 तक पंजाब के गोदामों में पड़े अनाज की लिफ्टिंग पूरी कर लेंगे।
बता दें इस समय पंजाब के गोदामों में 120 लाख मीट्रिक टन अनाज है, अब तक केवल 7 लाख मीट्रिक टन की लिफ्टिंग की गई है। सीएम मान ने बताया कि प्रदेश की मंडियों में रोजाना डेढ़ से दो लाख मीट्रिक टन धान पहुंच रहा है, आने वाले दिनों में प्रति दिन 10 लाख मीट्रिक टन तक धान आने की उम्मीद है। 15 नवंबर के बाद से प्रदेश में मिलिंग की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी, ऐसे में गोदामों से अनाज उठाने के लिए केंद्र ने गंभीरता दिखाई है।
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आढ़तियों का कमीशन बहाल करने पर होगा विचार
आढ़तियों को कमीशन भत्ता देने की मांग पर सीएम मान ने कहा कि पिछले पांच वर्षों/2019-20 से आढ़तियों को दिए जा रहे कमीशन में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है, जबकि इन वर्षों के दौरान उनके खर्चे कई गुना बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार की ओर से फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य हर साल बढ़ाया जाता है, जबकि 2019-20 से ही आढ़तियों को 45.38 से 46 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से कमीशन दिया जा रहा है। इस पर केंद्रीय मंत्री ने आश्वासन दिया है कि वह अपनी पॉलिसी पर जल्द ही रिव्यू करेंगे।
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आईआईटी खड़गपुर की रिपोर्ट के बाद नमी में मिल सकती है राहत
गोदाम में पड़े-पड़े धान की नमी कम होने (ड्राइएज) के मुद्दे पर सीएम मान ने बताया कि एमएसपी पर खरीद के लिए एक प्रतिशत ड्राइएज की अनुमति थी। डीएफपीडी की ओर से इसे घटाकर 0.5 प्रतिशत कर दिया गया। इस पर सीएम मान ने ड्राइएज को एमएसपी के एक प्रतिशत के हिसाब से अदा करने का मिलर्स का पक्ष रखा। इस पर केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि वह आईआईटी खड़गपुर से इस पर एक सर्वे करा रहे हैं, जिसमें देश के अन्य राज्यों से भी रिपोर्ट ली जा रही है, रिपोर्ट आने के बाद ड्राइएज पर 0.5 प्रतिशत को एक प्रतिशत भुगतान को लेकर फैसला किया जाएगा।