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Chandigarh News: पद्मश्री के बाद भी नहीं रुका झाड़ू योद्धा का सफाई मिशन
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चंडीगढ़। पद्मश्री मिलने के बाद भी 88 वर्षीय सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी इंद्रजीत सिंह सिद्धू का सफाई मिशन जारी है। सोमवार सुबह सेक्टर-49 की आईपीएस सोसाइटी के पास वह सड़क पर खुद कूड़ा उठाते नजर आए। उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। सफाई के प्रति उनकी यह पहल लोगों के लिए संदेश बन रही है कि स्वच्छता केवल सरकारी अभियान नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
सिद्धू का जन्म 6 जून 1938 को पंजाब के संगरूर जिले में सैन्य परिवार में हुआ था। वर्ष 1961 में पंजाब पुलिस में भर्ती हुए और 35 साल सेवा के बाद 1996 में डीआईजी पद से सेवानिवृत्त हुए। स्वच्छता अभियान के लिए प्रसिद्ध सिद्धू को वर्ष 2026 का पद्म श्री पुरस्कार मिला। 23 जून 2026 को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें सम्मानित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उनके सफाई अभियान की प्रशंसा कर चुके हैं।
सिद्धू ने कहा कि स्वच्छता अभियान किसी पुरस्कार के लिए नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए है। उन्होंने लोगों से पॉलीथिन का इस्तेमाल कम करने और कूड़ा इधर-उधर न फेंकने की अपील की। उन्होंने कहा कि अब सुबह सैर करने नहीं सड़क पर पड़ा कूड़ा उठाने निकलता हूं।
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उन्होंने बताया कि अमेरिका में बेटे के साथ रहते हुए एक बार कार से कूड़ा बाहर फेंकने लगे तो बेटे ने हाथ पकड़कर रोक दिया। बेटे के यह कहने पर कि इससे उसका चालान हो सकता है, उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ और यहीं से सफाई को जीवन का मिशन बनाने की प्रेरणा मिली।
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सिद्धू का जन्म 6 जून 1938 को पंजाब के संगरूर जिले में सैन्य परिवार में हुआ था। वर्ष 1961 में पंजाब पुलिस में भर्ती हुए और 35 साल सेवा के बाद 1996 में डीआईजी पद से सेवानिवृत्त हुए। स्वच्छता अभियान के लिए प्रसिद्ध सिद्धू को वर्ष 2026 का पद्म श्री पुरस्कार मिला। 23 जून 2026 को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें सम्मानित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उनके सफाई अभियान की प्रशंसा कर चुके हैं।
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सिद्धू ने कहा कि स्वच्छता अभियान किसी पुरस्कार के लिए नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए है। उन्होंने लोगों से पॉलीथिन का इस्तेमाल कम करने और कूड़ा इधर-उधर न फेंकने की अपील की। उन्होंने कहा कि अब सुबह सैर करने नहीं सड़क पर पड़ा कूड़ा उठाने निकलता हूं।
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उन्होंने बताया कि अमेरिका में बेटे के साथ रहते हुए एक बार कार से कूड़ा बाहर फेंकने लगे तो बेटे ने हाथ पकड़कर रोक दिया। बेटे के यह कहने पर कि इससे उसका चालान हो सकता है, उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ और यहीं से सफाई को जीवन का मिशन बनाने की प्रेरणा मिली।