Lit fest 2020 : युवाओं पर सोशल मीडिया हावी, बढ़ा मानसिक तनाव, रिश्तों में आ रहा बदलाव
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ऑनलाइन लिट फेस्ट लिटराटी-2020 में अपने विचार रख रहे लेखकों का मानना है कि आज युवा पीढ़ी पर सोशल मीडिया बहुत ज्यादा हावी है। इसी वजह वे मानसिक तनाव से घिर रहे हैं। इसी बढ़ते तनाव की वजह से कई युवा तो नशे का सहारा भी लेने लगते हैं। तनाव से ही लोगों के रिश्तों में भी बदलाव आ रहा है।
उनमें अपने परिजनों के साथ रू-ब-रू होकर सुख-दुख की चर्चा करने की प्रवृत्ति भी खत्म हो रही है। लेखकों ने युवाओं की इस मनोदशा पर चिंता व्यक्त करते हुए उनकी लाइफ स्टाइल में बड़े बदलाव की जरूरत पर जोर दिया है। इसके अलावा इस लिट फेस्ट के पहले दिन समाज, देश और वर्तमान में टेक्नोलॉजी के मुद्दों पर भी लेखकों ने विचार रखे।
चंडीगढ़ लिटरेरी सोसाइटी की ओर से आयोजित इस लिट फेस्ट में पहली बार ऑनलाइन देश-विदेश के लेखकों ने भाग लेते हुए अपने विचार खुलकर व्यक्त किए। फेस्ट की शुरुआत सोसाइटी की चेयरपर्सन और लेखिका डॉ. सुमिता मिश्रा ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए की।
उन्होंने कहा कि इस बार कोरोना वायरस की वजह से चारों ओर निराशा का माहौल बना है। ऐसे में इस बार फेस्टिवल में समाज और देश के मुद्दों के साथ स्वास्थ्य, खुशी, सेहत बेहतर रहने की कलाओं को लेकर चर्चा की जाएगी। इस दौरान बड़ी संख्या में दर्शक फेसबुक लाइव पर जुड़े और लेखकों की चर्चा के दौरान कमेंट्स में अपने विचार रखे।
खुद की राह तलाशना ही जीवन
पहले सेशन की शुरुआत लेखक गुरचरण दास ने अपने अनुभवों के साथ की। उन्होंने चर्चा करते हुए कहा कि जीवन का उद्देश्य ढूंढने का मकसद मुझे लेखनी की तरफ लेकर आया। खुद की राह तलाशना ही जीवन है। मैं विदेश पढ़ने गया, तब मां-बाप चाहते थे कि कोई ऐसा कोर्स करूं, जहां मुझे बेहतर करिअर मिल सके। मगर मैं आर्ट्स और संस्कृत पढ़ने में व्यस्त रहा।
इसके बाद मुझे अरस्तू ने प्रभावित किया। जिनसे प्रभावित होकर मैंने दर्शनशास्त्र की पढ़ाई हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से की। बाद में मुझे ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से डी-फिल करने के लिए स्कॉलरशिप मिली। हालांकि, इसके बाद मैं कारपोरेट सेक्टर में आया लेकिन लेखन मुझे आकर्षित करता रहा। जिसके लिए मैंने साप्ताहिक लेखक के तौर पर लिखना शुरू किया।
मेरा शुरुआती नाटक लारिंस साहिब पंजाब पर आधारित रहा। इसके बाद अगला उपन्यास भी पंजाब पर ही आधारित रहा। 50 वर्ष की उम्र में मैं एक दिन पीएनजी ग्रुप के सीईओ के तौर पर विभिन्न ब्रांड्स के शेयर और उनकी मार्केटिंग पर नजर डाल रहा था, तभी मेरे मन में ख्याल आया कि कोई कब तक काम कर सकता है। मैंने इस बीच अपनी नौकरी छोड़ी और वापस भारत आ गया।
मेरे अनुसार कमाई के अलावा लोगों को अपने जीवन में पैशन की तलाश भी करनी चाहिए। मेरे अनुसार तो देश में वेलेंटाइन की जगह काम दिवस मनाना चाहिए। मेरी एक किताब मोक्ष पर आधारित है। जिसमें मैंने संस्कृत के अनुसार मोक्ष के मतलब को समझाने की कोशिश की है, जिसमें इसका अर्थ आजादी है। मुझे आज भी लगता है कि देश में आज भी तरक्की रात को ही हो रही है, जब सरकारें सोती हैं। देश में अभी भी ब्यूरोक्रेसी, पुलिस, जस्टिस जैसे महत्वपूर्ण जगहों पर रिफॉर्म करने की जरूरत है।
युवाओं पर अंक और करिअर का बड़ा दबाव
लिट फेस्ट के दूसरे सेशन में पूर्व आईएएस विवेक अत्रे ने लेखिका निओमी दत्ता और ज्योत्सना मोहन भार्गव के बीच युवा पीढ़ी और जीवन को लेकर चर्चा की। विवेक ने दोनों ही लेखिकाओं से युवाओं के जीवन में तकनीक के साथ आए बदलाव और वर्तमान में बढ़ते मानसिक तनाव की स्थिति पर बातचीत की। इस दौरान ज्योत्सना ने बताया कि बीते वर्षों में युवाओं पर सोशल मीडिया काफी हावी हुआ है।
इसमें जागरूकता को लेकर और रिश्तों में आए बदलावों पर अब कई फिल्में भी बनाई जा रही है। इन दिनों युवाओं पर खुद को साबित करने से लेकर अच्छे अंक और करिअर बनाने का बहुत दबाव हैं। वहीं, हर किसी के सोशल मीडिया में व्यस्तता के कारण वे अपनी भावनाएं और समस्याएं किसी के सामने खुलकर पेश भी नहीं कर पा रहे हैं, जिस कारण ज्यादातर युवा नशे की तरफ जा रहे हैं।
इसी चर्चा में नाओमी ने बताया मैंने अपनी एक किताब में भी आम लोगों को समझाने की कोशिश की है कि खुद में आत्मविश्वास को बरकरार रखें, जिंदगी में तनावमुक्त होकर फैसले लें और सकारात्मक ऊर्जा व खुशी को स्थान दें। जिंदगी बोझ लेने का नहीं जीने का नाम है।
हमें खुद को स्वीकारने की जरूरत है। सोशल मीडिया के कारण लोगों ने दोहरी जिंदगी जीना शुरू कर दिया है, जिसके कारण तनाव बढ़ गया है। इसी चर्चा के दौरान एक दर्शक ने फेसबुक लाइव पर टिप्पणी की कि युवाओं पर अभिभावकों को करिअर का बोझ नहीं डालना चाहिए, उन्हें अपने रास्ते खुद खोजने दें।
कई मायनों में जरूरी होता है लेखन
अंतिम सेशन में कर्नल अविनाश शर्मा, लेखक नवतेज सरना और लेखिका कावेरी माधवन के बीच विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। नवतेज ने कहा कि लेखन ने मुझे बेहतर कूटनीतिज्ञ बनाया। लेखन कई मायनों में जरूरी है। इसके साथ ही यात्रा भी महत्वपूर्ण है। जब आप कई लोगों से मिलते हैं और कई तरह के अनुभव करते हैं तो आप समाज को बेहतर समझ पाते हैं।
इससे आपको लोगों को समझने और उनकी संस्कृति को जानने में मदद मिलती है। बातचीत में कावेरी ने मद्रास से आयरलैंड शिफ्ट होने की कहानी सुनाई। उन्होंने बताया कि वर्ष 1986 में आयरलैंड जाना बहुत अलग था। उस दौरान पश्चिमी संस्कृति को लेकर हमारी एक ही सोच थी लेकिन वहां जाकर मैंने महसूस किया कि वह देश भारत से ज्यादा रूढ़िवादी है।