{"_id":"66f20bc0a37f73f7c8095697","slug":"temporary-worker-cannot-claim-to-be-regular-on-the-basis-of-long-service-period-high-court-chandigarh-news-c-16-1-pkl1069-523908-2024-09-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाईकोर्ट का अहम फैसला: लंबी सेवा अवधि के आधार पर नियमित होने का दावा नहीं कर सकता अस्थाई कर्मी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाईकोर्ट का अहम फैसला: लंबी सेवा अवधि के आधार पर नियमित होने का दावा नहीं कर सकता अस्थाई कर्मी
Tue, 24 Sep 2024 06:15 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 24 Sep 2024 06:15 AM IST
सार
हाईकोर्ट के समक्ष नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कुरुक्षेत्र की याचिका सुनवाई के लिए पहुंची थी। एनआईटी ने याचिका में श्रम न्यायाधिकरण के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत छात्रों की समिति द्वारा अस्थाई तौर पर नियुक्त मेस कर्मचारी को नियमित करने का फैसला दिया गया था।
विज्ञापन
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट किया कि तय प्रक्रिया का पालन करे बिना किसी कर्मचारी को नियमित नहीं किया जा सकता। यदि ऐसा किया जाता है तो यह सीधे तौर पर बैक डोर एंट्री होगी, जिसकी अनुमति अदालत भी नहीं दे सकती। साथ ही लंबी सेवा अवधि के आधार पर अस्थाई कर्मचारी नियमित होने का दावा नहीं कर सकता।
हाईकोर्ट के समक्ष नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कुरुक्षेत्र की याचिका सुनवाई के लिए पहुंची थी। एनआईटी ने याचिका में श्रम न्यायाधिकरण के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत छात्रों की समिति द्वारा अस्थाई तौर पर नियुक्त मेस कर्मचारी को नियमित करने का फैसला दिया गया था। हाईकोर्ट ने पाया कि मेस कर्मचारियों को नियुक्त करते हुए निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था। न कोई विज्ञापन था, न कोई साक्षात्कार और न ही कोई लिखित परीक्षा थी।
नियुक्ति वार्डन/मुख्य वार्डन के हस्ताक्षर से की गई थी, लेकिन यह छात्रों की मेस/खाद्य समिति द्वारा की गई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना या स्थायी पद के अभाव में कर्मचारी स्थाई होने का दावा नहीं कर सकता। श्रम न्यायालय ने यह निष्कर्ष निकाला कि मेस कर्मचारी एनआईटी के कर्मचारी हैं और एनआईटी और मेस कर्मचारियों के बीच नियोक्ता-कर्मचारी संबंध है, जो गलत है। एनआईटी सरकारी संस्थान है और इसका उद्देश्य लाभ कमाना नहीं है। बल्कि इसका उद्देश्य उच्च गुणवत्ता वाले इंजीनियर तैयार करना है। मेस का प्रबंधन छात्रों की एक समिति द्वारा किया जाता है। मेस कर्मचारियों की नियुक्ति समिति द्वारा की गई थी और वेतन का भुगतान उक्त समिति द्वारा किया गया था। समिति को किसी भी कर्मचारी को हटाने का अधिकार भी था, हालांकि, हटाने की मंजूरी वार्डन द्वारा दी जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
हाईकोर्ट के समक्ष नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कुरुक्षेत्र की याचिका सुनवाई के लिए पहुंची थी। एनआईटी ने याचिका में श्रम न्यायाधिकरण के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत छात्रों की समिति द्वारा अस्थाई तौर पर नियुक्त मेस कर्मचारी को नियमित करने का फैसला दिया गया था। हाईकोर्ट ने पाया कि मेस कर्मचारियों को नियुक्त करते हुए निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था। न कोई विज्ञापन था, न कोई साक्षात्कार और न ही कोई लिखित परीक्षा थी।
विज्ञापन
नियुक्ति वार्डन/मुख्य वार्डन के हस्ताक्षर से की गई थी, लेकिन यह छात्रों की मेस/खाद्य समिति द्वारा की गई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना या स्थायी पद के अभाव में कर्मचारी स्थाई होने का दावा नहीं कर सकता। श्रम न्यायालय ने यह निष्कर्ष निकाला कि मेस कर्मचारी एनआईटी के कर्मचारी हैं और एनआईटी और मेस कर्मचारियों के बीच नियोक्ता-कर्मचारी संबंध है, जो गलत है। एनआईटी सरकारी संस्थान है और इसका उद्देश्य लाभ कमाना नहीं है। बल्कि इसका उद्देश्य उच्च गुणवत्ता वाले इंजीनियर तैयार करना है। मेस का प्रबंधन छात्रों की एक समिति द्वारा किया जाता है। मेस कर्मचारियों की नियुक्ति समिति द्वारा की गई थी और वेतन का भुगतान उक्त समिति द्वारा किया गया था। समिति को किसी भी कर्मचारी को हटाने का अधिकार भी था, हालांकि, हटाने की मंजूरी वार्डन द्वारा दी जाती है।
विज्ञापन