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Chandigarh News: निर्मल सिंह की बहादुरी के किस्से सुनाकर बच्चों में भरते हैं जोश

Thu, 25 Jul 2024 07:18 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 25 Jul 2024 07:18 PM IST
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Telling stories of Nirmal Singh's bravery fills children with enthusiasm
कंवरपाल
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हलवारा। कारगिल युद्ध में टाइगर हिल पर देश का झंडा लहराने वाले शहीद नायक निर्मल सिंह जौहलां की बहादुरी के किस्से आज भी गांव से लेकर सेना में सुनाए जाते हैं। निर्मल सिंह जौहलां के साथ जंग ए मैदान में पहुंची आठ सिख लाइट इंफेंट्री रेजिमेंट के 25 सैनिकों की टुकड़ी ने देखते ही देखते तीन दर्जन से अधिक पाकिस्तानी घुसपैठियों की लाशें बिछा दी थी।

जैसे ही नायक निर्मल सिंह जौहलां ने टाइगर हिल पर तिरंगा फहराया, तभी फायरिंग और बमबारी शुरू हो गई। निर्मल सिंह को गोलियों का ब्रस्ट लगा, जिससे उनका पूरा शरीर छलनी हो गया। टुकड़ी के अधिकतर जवानों ने शहादत का जाम पीने से पहले वहां मौजूद सभी घुसपैठियों को मार गिराया। इस दौरान नायक निर्मल सिंह जौहलां भी शहीद हो गए। मरणोपरांत उन्हें सेना मेडल से भी नवाजा गया। शहादत के 25 साल बाद भी स्कूल में उनकी बहादुरी के किस्से सुनाकर बच्चों को बड़ा किया जा रहा है, ताकि वे देश सेवा के लिए प्रेरित हों। गांव में उनके नाम पर पार्क और आदम कद प्रतिमा स्थापित की गई है। हर साल उनकी बरसी भी धूमधाम से मनाई जाती है। बेटा दविंदर कनाडा में बस चुका और पत्नी जसविंदर कौर गांव में ही परिवार के साथ रह रही है।
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छह जुलाई को प्राप्त हुई वीरगति

युद्ध के समय निर्मल सिंह पठानकोट में तैनात थे। सेना मुख्यालय से उन्हें कारगिल युद्ध मैदान में जाने का आदेश प्राप्त हुआ। निर्मल सिंह 25 सैनिकों की टुकड़ी के साथ युद्ध मैदान में पहुंचे और दुश्मनों का सफाया करते हुए 6 जुलाई 1999 को टाइगर हिल पर वीरगति को प्राप्त हुए।
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खेतीबाड़ी छोड़ देशसेवा को चुना

शहीद निर्मल सिंह के पिता अवतार सिंह बताते हैं कि उनके बेटे ने परिवार के पास अच्छी खासी जमीन होने के बावजूद देशसेवा को चुना। निर्मल बहुत बहादुर था और सेना में भर्ती होने से पहले समाजसेवा में बढ़चढ़कर हिस्सा लेता था।




10वीं पास करते ही सेना में भर्ती हुए थे निर्मल

गांव जौहलां में पिता अवतार सिंह देओल व मां गुरचरण कौर के घर निर्मल सिंह का जन्म 1970 में हुआ था। 10वीं पास करने के बाद निर्मल सिंह सेना में चले गए। 1994 में उनकी शादी जसविंदर कौर के साथ हुई, जिसके बाद उनके घर बेटे का जन्म हुआ। 1999 में उनके शहीद होने पर सेना मेडल से नवाजा गया और परिवार को एक्सग्रेशिया ग्रांट और तमाम बेनिफिट्स के साथ-साथ पेट्रोल पंप भी दिया गया है।
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