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पिता को संभालने के लिए पढ़ाई छोड़ी... सेना ज्वॉइन की और एशियन गेम्स में जीता मेडल...गजब का जज्बा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 25 Aug 2018 09:29 AM IST
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रोहित और भगवान सिंह
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कहते हैं कि हर सफलता के पीछे एक संघर्ष भरी कहानी होती है। ऐसी ही एक संघर्ष भरी कहानी है एशियन गेम्स में ब्रॉन्च मेडल जीतने वाले भगवान सिंह की। नशे के आदी पिता को संभालने के लिए पढ़ाई छोड़ी और इसके बाद सेना ज्वॉइन कर ली। अब एशियन गेम्स में देश के लिए ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इतिहास रच दिया।
19 साल के भगवान सिंह ने पुरुषों की लाइटवेट युगल स्कल्स स्पर्धा के फाइनल में कांस्य पदक जीता है। भगवान सिंह पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते थे लेकिन विपरीत परिस्थितियों के चलते ऐसा नहीं हो पाया। वह चंडीगढ़ से पत्रकारिता की पढ़ाई कर रहे थे।
पिता की बीमारी की वजह से पढ़ाई छोड़ भगवान सिंह ने भारतीय सेना ज्वॉइन कर ली और अब उनकी जिंदगी पूरी तरह से बदल चुकी है। भगवान सिंह के मुताबिक, 'वो पत्रकार बनना चाहते थे। उनके पिता मौजूदा समय में बीमार रहते हैं। पिता का एक फेफड़ा भी काम नहीं कर रहा है और उन्हें टीबी की वजह से ट्रक ड्राइविंग भी छोड़नी पड़ी।'
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19 साल के भगवान सिंह ने पुरुषों की लाइटवेट युगल स्कल्स स्पर्धा के फाइनल में कांस्य पदक जीता है। भगवान सिंह पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते थे लेकिन विपरीत परिस्थितियों के चलते ऐसा नहीं हो पाया। वह चंडीगढ़ से पत्रकारिता की पढ़ाई कर रहे थे।
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पिता की बीमारी की वजह से पढ़ाई छोड़ भगवान सिंह ने भारतीय सेना ज्वॉइन कर ली और अब उनकी जिंदगी पूरी तरह से बदल चुकी है। भगवान सिंह के मुताबिक, 'वो पत्रकार बनना चाहते थे। उनके पिता मौजूदा समय में बीमार रहते हैं। पिता का एक फेफड़ा भी काम नहीं कर रहा है और उन्हें टीबी की वजह से ट्रक ड्राइविंग भी छोड़नी पड़ी।'
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खुशी है कि वो जीवित है
bhagwan singh
एशियन गेम्स कांस्य पदक विजेता भगवान सिंह अपनी पिता की बीमारी को लेकर काफी चिंतित हैं लेकिन उन्हें इस बात की खुशी हैं कि वह जीवित हैं। हालांकि उनकी हालत गंभीर है। भगवान सिंह पुणे में स्थित सेना के रोइंग नोड से जुड़े और साल 2012 में भारतीय सेना ज्वॉइन की।
अपने अतीत के दिनों के बारे में भगवान सिंह कहते हैं कि हमने बहुत बुरा समय देखा है। उन्होंने अपनी सफलता के लिए सेना और भगवान का धन्यवाद दिया और वो अपने बूढ़े माता-पिता की देखभाल करना चाहते हैं। बता दें कि रोहित कुमार और भगवान सिंह ने पुरुषों की लाइटवेट डबल्स स्कल्स में ब्रॉन्ज मेडल जीता है। भारत का रोइंग में यह दूसरा मेडल है।
अपने अतीत के दिनों के बारे में भगवान सिंह कहते हैं कि हमने बहुत बुरा समय देखा है। उन्होंने अपनी सफलता के लिए सेना और भगवान का धन्यवाद दिया और वो अपने बूढ़े माता-पिता की देखभाल करना चाहते हैं। बता दें कि रोहित कुमार और भगवान सिंह ने पुरुषों की लाइटवेट डबल्स स्कल्स में ब्रॉन्ज मेडल जीता है। भारत का रोइंग में यह दूसरा मेडल है।