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पीयू छात्रसंघ चुनाव के मायने: एबीवीपी की लगातार दूसरी बार जीत से गया अहम संदेश, क्या चलेगा 'जेन जी' फैक्टर?

Tue, 01 Sep 2026 11:05 AM IST
Nivedita विशाल पाठक, अमर उजाला, चंडीगढ़
विशाल पाठक, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Tue, 01 Sep 2026 11:05 AM IST
सार

पंजाब यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में एबीवीपी की जीत की गूंज पंजाब चुनाव तक सुनाई देगी। भाजपा के छात्र संगठन की जीत से आप के छात्र संगठन एसैप को करारा झटका लगा है।

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ABVP win president post second consecutive time in Panjab University student union election punjab election
पीयू छात्रसंघ चुनाव में एबीवीपी की जीत - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पंजाब यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने लगातार दूसरी बार प्रधान पद पर कब्जा जमाकर कैंपस की राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत की है। 

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अगले साल फरवरी में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले इस जीत को पंजाब की सियासत के लिए भी अहम संदेश माना जा रहा है। 

गझाड़ू तोड़कर मनाया जश्न 
अंकित बिधान की जीत के बाद एबीवीपी समर्थकों ने झाड़ू तोड़कर जश्न मनाया। इसे आम आदमी पार्टी के खिलाफ सीधे राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा गया। एबीवीपी और एसैप के बीच मुकाबला छात्र मुद्दों से आगे निकल चुका था। ऐसे में जीत के बाद का यह जश्न कैंपस से निकलकर पंजाब की व्यापक राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

एबीवीपी के अंकित बिधान की जीत को भाजपा के युवा वोट बैंक के बीच बढ़ते प्रभाव के तौर पर देखा जा रहा है। खास बात यह रही कि चुनाव से ठीक पहले शिरोमणि अकाली दल के स्टूडेंट विंग एसओआई (स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया) ने एबीवीपी को समर्थन दे दिया। पहली बार सोई ने पीयू कैंपस में प्रधान पद के लिए अपना उम्मीदवार भी मैदान में नहीं उतारा।

सोई के समर्थन से बदला चुनावी गणित
इस बार पीयू छात्रसंघ चुनाव में सबसे बड़ा राजनीतिक बदलाव एबीवीपी और सोई का साथ आना रहा। चुनाव से दो दिन पहले सोई के समर्थन से दोनों संगठनों के छात्र वोट बैंक को एक मंच पर लाने की कोशिश हुई। इसका सीधा मुकाबला आम आदमी पार्टी के छात्र संगठन एसैप (एसोसिएशन ऑफ स्टूडेंट्स फॉर अल्टरनेटिव पॉलिटिक्स) से रहा। 

एसैप ने प्रधान पद के लिए आदिल बराड़ को मैदान में उतारा था। आदिल ने एबीवीपी को कड़ी चुनौती दी, लेकिन अंतिम परिणाम एबीवीपी के पक्ष में रहा। इसे केवल छात्रसंघ चुनाव तक सीमित नहीं माना जा रहा। पंजाब में भाजपा और अकाली दल के बीच संभावित राजनीतिक नजदीकी को लेकर पहले से चर्चाएं हैं। ऐसे में दोनों के छात्र संगठनों का पीयू में साथ आना भविष्य के सियासी समीकरणों की झलक के तौर पर देखा जा रहा है।
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लगातार दूसरी बार एबीवीपी का कब्जा
एबीवीपी ने लगातार दूसरी बार पीयू छात्रसंघ के प्रधान पद पर जीत दर्ज की है। पिछली बार गौरववीर सोहल एबीवीपी की ओर से प्रधान बने थे। उस समय संगठन को अकाली दल का समर्थन हासिल नहीं था। इस बार एबीवीपी ने अपनी पिछली जीत दोहराने के साथ सोई का समर्थन भी हासिल किया।

युवा वोट बैंक पर बढ़ी नजर
पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले पीयू छात्रसंघ का परिणाम भाजपा के लिए इसलिए अहम है, क्योंकि विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति को युवा वर्ग के राजनीतिक रुझान का संकेत माना जाता है। एबीवीपी की जीत से भाजपा को युवा वोट बैंक के बीच अपने प्रभाव को लेकर मनोवैज्ञानिक बढ़त मिल सकती है। वहीं, आप के लिए यह अपने छात्र संगठन और युवा संपर्क अभियान की समीक्षा का संकेत है। भाजपा-अकाली दल गठबंधन पर अभी कोई स्पष्ट घोषणा नहीं हुई है, लेकिन पीयू में एबीवीपी और सोई का साथ आना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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