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पीयू विद्यार्थियों ने छात्रावास खोलने की मांग को लेकर घेरा प्रशासनिक ब्लॉक
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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी की तरफ से छात्रावास खाली कराने के फरमान के खिलाफ विद्यार्थियों ने तीसरे दिन दो जगह प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों ने पहले प्रशासनिक ब्लॉक के बाहर पीयू प्रशासनिक अधिकारियों और इसके बाद विद्यार्थियों ने महिला छात्रावास नंबर- 2 के बाहर वार्डन के खिलाफ प्रदर्शन किया। उधर, पीयू प्रशासन ने छात्रावास खाली करने का समय 15 मई तक बढ़ा दिया है। वहीं, विद्यार्थियों का कहना है कि अभी दूसरे राज्यों में कर्फ्यू और लॉकडाउन लगा हुआ है। कई दूरदराज के विद्यार्थियों को घर पहुंचने में ही दो से तीन दिन लगता है, ऐसे में उनकी स्वास्थ्य सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा।
इस मौके पर विद्यार्थियों ने यह भी कहा कि पीयू अधिकारियों ने उन्हें आश्वासन दिया है कि उनके घर फोन नहीं किया जाएगा और ना ही उन्हें तंग किया जाएगा साथ ही बंद की गई मेस को भी खोल दिया जाएगा। वहीं दूसरी ओर पीयू ने प्रेस बयान में कहा है कि कुछ विद्यार्थियों की रेल और हवाई टिकट को देखते हुए विद्यार्थियों को छात्रावास खाली करने का समय बढ़ाया गया है।
छात्र बोले- वार्डन तत्काल कमरा छोड़ने को कर रहे मजबूर
प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों ने बताया छात्रावास के वार्डन उन्हें तत्काल कमरे छोड़ने के लिए मजबूर कर रहे हैं। उनके अभिभावकों को फोन बार बार फोन किया जा रहा है और अनुशासन भंग करने की कार्रवाई करने की धमकियां दी जा रही है। लगातार विद्यार्थियों पर भी वार्डन दबाव बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभी दूसरे राज्यों में कर्फ्यू और लॉकडाउन लगा हुआ है। कई दूरदराज के विद्यार्थियों को घर पहुंचने में ही दो से तीन दिन लगते हैं, ऐसे में उनकी स्वास्थ्य सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा। वहीं, शोधार्थियों का एक वर्ष से शोध कार्य भी लंबित पड़ा है, यूनिवर्सिटी उसका समय बढ़ाने के लिए भी अतिरिक्त शुल्क वसूल रही है। विज्ञान और मेडिकल के विद्यार्थी बीच में अपना शोध छोड़कर भी नहीं जा सकते हैं, क्योंकि बाद में उन्हें पूरी प्रक्रिया दोबारा से शुरू करनी पड़ेगी, लेकिन यूनिवर्सिटी प्रशासन उनकी बात सुनने को तैयार ही नहीं है।
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विद्यार्थी सभी दिशानिर्देश मानने को तैयार
प्रदर्शनरत विद्यार्थियों ने कहा कि वे यूनिवर्सिटी की ओर से जारी सभी दिशानिर्देशों को मानने के लिए तैयार हैं। पीयू का विद्यार्थियों को ऐसे निकालना निंदनीय है। प्रशासन पिछले वर्ष की तरह कुछ पाबंदियां लगा लें, विद्यार्थी उसे मानने को तैयार हैं। ऐसे कठिन समय में पीयू प्रशासन को विद्यार्थियों के खिलाफ खड़े होने की बजाय उनका साथ देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर यूटी प्रशासन को जरूरत पड़े तो विद्यार्थी वालंटियर के तौर पर कठिन समय में सहायता कर सकते हैं।
20-25 विद्यार्थियों ने बुधवार को छोड़ा छात्रावास
पीयू डीएसडब्ल्यू प्रो सुखबीर कौर ने बताया कि बुधवार को लगभग 20-25 विद्यार्थियों ने छात्रावास छोड़ा है। वहीं कुछ विद्यार्थियों की आगामी दिनों में रेल और हवाई टिकिट की बुकिंग है। इसे देखते हुए हमने छात्रावास खाली करने की दिनांक 12 मई से बढ़ाकर 15 मई तक कर दी है। इसके साथ ही विद्यार्थियों को परेशानी नहीं हो, इसलिए जीएच 1, बीएच 6 और जीएच 8 की मेस भी चालू रहेगी। पीयू में पिछले महीने 800 के करीब विद्यार्थी रह रहे थे, जिनमें से लगभग 400 के करीब विद्यार्थी छात्रावास छोड़ चुके हैं।
पुटा बोला- जबर्दस्ती निकाले जा रहे छात्र, यूनिवर्सिटी का भविष्य संकट में
विद्यार्थियों के साथ पुटा खड़ा हो गया है। पुटा पदाधिकारियों का कहना है कि वीसी की ओर से पहले अचानक निर्देश देकर यूनिवर्सिटी प्रयोगशालाएं और छात्रावास खोल दिए गए थे, अब अचानक आदेश देकर उन्हें बंद करने के निर्देश दिए हैं। बिना योजना के वीसी की ओर से दिए गए निर्देशों के कारण विद्यार्थी, शोधकर्ता और शिक्षक परेशान हैं। अब यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से शोधकर्ताओं को जबरदस्ती छात्रावास से निकाला जा रहा है, जिसके रोषस्वरूप शोधकर्ता प्रदर्शन कर रहे हैं। इस कारण यूनिवर्सिटी का भविष्य संकट में है।
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इस मौके पर विद्यार्थियों ने यह भी कहा कि पीयू अधिकारियों ने उन्हें आश्वासन दिया है कि उनके घर फोन नहीं किया जाएगा और ना ही उन्हें तंग किया जाएगा साथ ही बंद की गई मेस को भी खोल दिया जाएगा। वहीं दूसरी ओर पीयू ने प्रेस बयान में कहा है कि कुछ विद्यार्थियों की रेल और हवाई टिकट को देखते हुए विद्यार्थियों को छात्रावास खाली करने का समय बढ़ाया गया है।
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छात्र बोले- वार्डन तत्काल कमरा छोड़ने को कर रहे मजबूर
प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों ने बताया छात्रावास के वार्डन उन्हें तत्काल कमरे छोड़ने के लिए मजबूर कर रहे हैं। उनके अभिभावकों को फोन बार बार फोन किया जा रहा है और अनुशासन भंग करने की कार्रवाई करने की धमकियां दी जा रही है। लगातार विद्यार्थियों पर भी वार्डन दबाव बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभी दूसरे राज्यों में कर्फ्यू और लॉकडाउन लगा हुआ है। कई दूरदराज के विद्यार्थियों को घर पहुंचने में ही दो से तीन दिन लगते हैं, ऐसे में उनकी स्वास्थ्य सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा। वहीं, शोधार्थियों का एक वर्ष से शोध कार्य भी लंबित पड़ा है, यूनिवर्सिटी उसका समय बढ़ाने के लिए भी अतिरिक्त शुल्क वसूल रही है। विज्ञान और मेडिकल के विद्यार्थी बीच में अपना शोध छोड़कर भी नहीं जा सकते हैं, क्योंकि बाद में उन्हें पूरी प्रक्रिया दोबारा से शुरू करनी पड़ेगी, लेकिन यूनिवर्सिटी प्रशासन उनकी बात सुनने को तैयार ही नहीं है।
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विद्यार्थी सभी दिशानिर्देश मानने को तैयार
प्रदर्शनरत विद्यार्थियों ने कहा कि वे यूनिवर्सिटी की ओर से जारी सभी दिशानिर्देशों को मानने के लिए तैयार हैं। पीयू का विद्यार्थियों को ऐसे निकालना निंदनीय है। प्रशासन पिछले वर्ष की तरह कुछ पाबंदियां लगा लें, विद्यार्थी उसे मानने को तैयार हैं। ऐसे कठिन समय में पीयू प्रशासन को विद्यार्थियों के खिलाफ खड़े होने की बजाय उनका साथ देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर यूटी प्रशासन को जरूरत पड़े तो विद्यार्थी वालंटियर के तौर पर कठिन समय में सहायता कर सकते हैं।
20-25 विद्यार्थियों ने बुधवार को छोड़ा छात्रावास
पीयू डीएसडब्ल्यू प्रो सुखबीर कौर ने बताया कि बुधवार को लगभग 20-25 विद्यार्थियों ने छात्रावास छोड़ा है। वहीं कुछ विद्यार्थियों की आगामी दिनों में रेल और हवाई टिकिट की बुकिंग है। इसे देखते हुए हमने छात्रावास खाली करने की दिनांक 12 मई से बढ़ाकर 15 मई तक कर दी है। इसके साथ ही विद्यार्थियों को परेशानी नहीं हो, इसलिए जीएच 1, बीएच 6 और जीएच 8 की मेस भी चालू रहेगी। पीयू में पिछले महीने 800 के करीब विद्यार्थी रह रहे थे, जिनमें से लगभग 400 के करीब विद्यार्थी छात्रावास छोड़ चुके हैं।
पुटा बोला- जबर्दस्ती निकाले जा रहे छात्र, यूनिवर्सिटी का भविष्य संकट में
विद्यार्थियों के साथ पुटा खड़ा हो गया है। पुटा पदाधिकारियों का कहना है कि वीसी की ओर से पहले अचानक निर्देश देकर यूनिवर्सिटी प्रयोगशालाएं और छात्रावास खोल दिए गए थे, अब अचानक आदेश देकर उन्हें बंद करने के निर्देश दिए हैं। बिना योजना के वीसी की ओर से दिए गए निर्देशों के कारण विद्यार्थी, शोधकर्ता और शिक्षक परेशान हैं। अब यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से शोधकर्ताओं को जबरदस्ती छात्रावास से निकाला जा रहा है, जिसके रोषस्वरूप शोधकर्ता प्रदर्शन कर रहे हैं। इस कारण यूनिवर्सिटी का भविष्य संकट में है।