{"_id":"6109aad88ebc3eb8020be42e","slug":"students-of-blind-schools-did-amazing-gaganjot-kaur-topped-with-95-20-marks-chandigarh-news-pkl4223534111","type":"story","status":"publish","title_hn":"ब्लाइंड स्कूलों के छात्रों ने किया कमाल, 95.20 अंक के साथ गगनजोत कौर ने किया टॉप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ब्लाइंड स्कूलों के छात्रों ने किया कमाल, 95.20 अंक के साथ गगनजोत कौर ने किया टॉप
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंडीगढ़। 10वीं की परीक्षा में सेक्टर-26 ब्लाइंड स्कूल के विद्यार्थियों ने कमाल का प्रदर्शन किया है। उन्होंने साबित कर दिया है कि चाहे उनके सामने बड़ी चुनौतियां हों, लेकिन उनके हौसले को डिगा नहीं सकती। गगनजोत कौर ने 95.20 प्रतिशत अंक के साथ ब्लाइंड स्कूल में टॉप किया है। इनके अलावा 94.40 प्रतिशत अंक लेकर कशिश सैनी और मन्नत संयुक्त रूप से दूसरे और 91.40 प्रतिशत अंकों के साथ अनीता देवी ने तीसरा स्थान हासिल किया है। इसके अलावा भी कई बच्चे ऐसे हैं, जिन्होंने 80 फीसदी से ज्यादा अंक हासिल किए हैं।
क्या कहते हैं टॉपर
प्रोफेसर बनना चाहती हैं गगनजोत कौर
कुरुक्षेत्र के पीपली में रहने वाली गगनजोत कौर जन्म से देख नहीं सकती हैं। गगनजोत ने बताया कि उनके पिता गुरविंदर सिंह पीपली में ही प्राइमरी के अध्यापक हैं। वह प्रोफेसर बनना चाहती हैं। हिंदी उनका पसंदीदा विषय है, इसलिए वह आगे की पढ़ाई भी इसमें करना चाहती हैं। उन्होंने बताया कि कोरोना का समय काफी कठिन रहा है। शुरू में समझ ही नहीं आया कि पढ़ाई कैसे होगी, लेकिन अध्यापकों ने बहुत साथ दिया। उन्होंने बहुत अच्छे से पढ़ाया, जिसकी वजह से इतने अंक आए हैं। गगनजोत के पिता ने बताया कि उनकी बेटी शुरूसे ही पढ़ना चाहती थीं, इसलिए उन्होंने चंडीगढ़ के ब्लाइंड स्कूल में दाखिला कराया। उन्होंने कहा कि गगनजोत जब तक पढ़ना चाहेंगी, वह पढ़ाएंगे। उन्हें म्यूजिक में भी रुचि है और वह शुरू से ही प्रथम आती रही हैं। खास बात रही कि ऑनलाइन परीक्षाओं में भी गगनजोत ने सिर्फ वही लिखवाया, जो उन्हें आता था। कभी भी नकल नहीं की, इसलिए वह बेहद खुश हैं। बेटी की कामयाबी से परिवार गर्व महसूस कर रहा है। गगनजोत ने बताया कि कोरोना की वजह से वह पिछले करीब डेढ़ साल से घर पर हैं, अब चंडीगढ़ में स्कूल खुल गए हैं, इसलिए वह अगले हफ्ते 11वीं की पढ़ाई के लिए चंडीगढ़ पहुंच जाएंगी।
फोटो सहित
शिक्षा की शक्ति से कशिश सैनी ने लोगों को दिया जवाब
ब्लाइंड स्कूल की छात्रा कशिश सैनी ने 10वीं में 94.40 प्रतिशत अंक प्राप्त कर माता-पिता का नाम रोशन किया है। उन्हें दिखाई न देने के साथ त्वचा से संबंधित भी बीमारी है, बावजूद इसके उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर दूसरा स्थान हासिल किया है। उन्होंने बताया कि शुरू में लोगों ने उन्हें स्वीकार नहीं किया, लेकिन माता-पिता और अध्यापकों ने हमेशा साथ दिया। कशिश ने बताया कि वह आईएएस अधिकारी बनना चाहती हैं। इसके लिए वह अभी से तैयारी शुरू कर देंगी।
विज्ञापन
कशिश सैनी के पिता रुपिंदर पाल हरियाणा के यमुनानगर में फ्लोर मिल चलाते हैं, जबकि मां पिंकी सैनी गृहणी हैं। कशिश ने बताया कि कोरोना की वजह से काफी मुश्किल हुई। मार्च में लॉकडाउन लगा तो समझ नहीं आ रहा था कि उन सभी की पढ़ाई कैसे होगी। जून महीने के आखिर में जाकर ऑनलाइन पढ़ाई शुरूहुई। शुरू से कक्षा में बैठकर पढ़ने की आदत थी, इसलिए ऑनलाइन में समस्या आई, लेकिन अध्यापकों ने बहुत अच्छे से चीजों को समझाया। कशिश ने बताया कि उन्हें पढ़ाई के साथ डांस करने का भी शौक है और कई राष्ट्रीय स्तर तक के प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया है। उनकी मां हर जगह उनके साथ जाती हैं और हौसला बढ़ाती हैं। कशिश ने बताया कि त्वचा की बीमारी की वजह से शुरू में लोगों ने उन्हें स्वीकार नहीं किया, लेकिन अब सबकुछ ठीक है।
विज्ञापन
क्या कहते हैं टॉपर
प्रोफेसर बनना चाहती हैं गगनजोत कौर
कुरुक्षेत्र के पीपली में रहने वाली गगनजोत कौर जन्म से देख नहीं सकती हैं। गगनजोत ने बताया कि उनके पिता गुरविंदर सिंह पीपली में ही प्राइमरी के अध्यापक हैं। वह प्रोफेसर बनना चाहती हैं। हिंदी उनका पसंदीदा विषय है, इसलिए वह आगे की पढ़ाई भी इसमें करना चाहती हैं। उन्होंने बताया कि कोरोना का समय काफी कठिन रहा है। शुरू में समझ ही नहीं आया कि पढ़ाई कैसे होगी, लेकिन अध्यापकों ने बहुत साथ दिया। उन्होंने बहुत अच्छे से पढ़ाया, जिसकी वजह से इतने अंक आए हैं। गगनजोत के पिता ने बताया कि उनकी बेटी शुरूसे ही पढ़ना चाहती थीं, इसलिए उन्होंने चंडीगढ़ के ब्लाइंड स्कूल में दाखिला कराया। उन्होंने कहा कि गगनजोत जब तक पढ़ना चाहेंगी, वह पढ़ाएंगे। उन्हें म्यूजिक में भी रुचि है और वह शुरू से ही प्रथम आती रही हैं। खास बात रही कि ऑनलाइन परीक्षाओं में भी गगनजोत ने सिर्फ वही लिखवाया, जो उन्हें आता था। कभी भी नकल नहीं की, इसलिए वह बेहद खुश हैं। बेटी की कामयाबी से परिवार गर्व महसूस कर रहा है। गगनजोत ने बताया कि कोरोना की वजह से वह पिछले करीब डेढ़ साल से घर पर हैं, अब चंडीगढ़ में स्कूल खुल गए हैं, इसलिए वह अगले हफ्ते 11वीं की पढ़ाई के लिए चंडीगढ़ पहुंच जाएंगी।
विज्ञापन
फोटो सहित
शिक्षा की शक्ति से कशिश सैनी ने लोगों को दिया जवाब
ब्लाइंड स्कूल की छात्रा कशिश सैनी ने 10वीं में 94.40 प्रतिशत अंक प्राप्त कर माता-पिता का नाम रोशन किया है। उन्हें दिखाई न देने के साथ त्वचा से संबंधित भी बीमारी है, बावजूद इसके उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर दूसरा स्थान हासिल किया है। उन्होंने बताया कि शुरू में लोगों ने उन्हें स्वीकार नहीं किया, लेकिन माता-पिता और अध्यापकों ने हमेशा साथ दिया। कशिश ने बताया कि वह आईएएस अधिकारी बनना चाहती हैं। इसके लिए वह अभी से तैयारी शुरू कर देंगी।
विज्ञापन
कशिश सैनी के पिता रुपिंदर पाल हरियाणा के यमुनानगर में फ्लोर मिल चलाते हैं, जबकि मां पिंकी सैनी गृहणी हैं। कशिश ने बताया कि कोरोना की वजह से काफी मुश्किल हुई। मार्च में लॉकडाउन लगा तो समझ नहीं आ रहा था कि उन सभी की पढ़ाई कैसे होगी। जून महीने के आखिर में जाकर ऑनलाइन पढ़ाई शुरूहुई। शुरू से कक्षा में बैठकर पढ़ने की आदत थी, इसलिए ऑनलाइन में समस्या आई, लेकिन अध्यापकों ने बहुत अच्छे से चीजों को समझाया। कशिश ने बताया कि उन्हें पढ़ाई के साथ डांस करने का भी शौक है और कई राष्ट्रीय स्तर तक के प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया है। उनकी मां हर जगह उनके साथ जाती हैं और हौसला बढ़ाती हैं। कशिश ने बताया कि त्वचा की बीमारी की वजह से शुरू में लोगों ने उन्हें स्वीकार नहीं किया, लेकिन अब सबकुछ ठीक है।