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अफगानिस्तान के छात्रों के पास आर्थिक संकट, बीबीए करने के बाद अब एमए करेंगे
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चंडीगढ़। अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद वहां हालात बिगड़ चुके हैं। लूटपाट व अन्य घटनाओं के कारण लोग डरे हुए हैं। दहशत के चलते लोगों ने दुकान, फैक्ट्रियां और दूसरे कारोबार बंद कर दिए हैं। निजी कंपनियों में काम करने वाले लोगों की नौकरियां चली गई हैं। कुछ कंपनियों ने तो बंदी तक की घोषणा कर दी है। इससे लोगों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। इसका असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है। चंडीगढ़ और पंजाब के शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले छात्र भी परेशान हैं।
इन छात्रों का कहना है कि उनके अभिभावकों का कारोबार ठप हो गया है। नौकरी भी चली गई है। ऐसे में उनकी आगे की पढ़ाई कैसे चलेगी। इनमें से कई छात्र बीबीए के बाद एमबीए करना चाहते हैं लेकिन अब उनके सामने फीस का संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में अब इनमें से कुछ छात्र एमए करने की योजना बना रहे हैं। वहीं, कुछ छात्र अन्य पाठ्यक्रमों से पढ़ाई की योजना बना रहे हैं ताकि अधिक पैसे खर्च न होें। हालांकि उनके सामने सबसे बड़ा सवाल परिवार की सुरक्षा और भविष्य का है।
एक माह से नहीं खोली दुकान, आर्थिक स्थिति हुई खराब
मेरे अब्बू की दुकान काबुल में है, जो लूटपाट के डर से एक महीने से बंद पड़ी है। और आगे कब तक बंद रहेगी, इसका कुछ पता नहीं। दुकान बंद रहने से घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई है। स्कॉलरशिप के जरिए मोहाली के एक शिक्षण संस्थान से बीबीए की पढ़ाई कर ली है। अब एमबीए में छात्रवृत्ति मिलेगी या नहीं, इसका भी पता नहीं। सेल्फ फाइनेंस से पढ़ना आसान नहीं। फीस अधिक है और आर्थिक स्थिति खराब हो गई है। ऐसे में अब एमए की पढ़ाई करने की योजना बना रहा हूं।
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-इरफान, छात्र, निवासी काबुल
-------------
पिता की नौकरी चली गई, अब पढ़ाई पूरी नहीं हो पाएगी
मेरे पड़ोसी के घर का दरवाजा तीन तालिबानियों ने खटखटाया और कहा कि घर की तलाशी लेंगे। तलाशी लेने के बाद सोना और पैसे लेकर चले गए। बाद में पता चला कि वह तालिबानी नहीं, चोर थे। ऐसे में अब मेरे घरवाले डर के मारे घर का दरवाजा तक नहीं खोल रहे। अब्बू (पिता) एक कंपनी ने काम करते थे। तालिबान की वापसी के बाद कंपनी ने कार्यालय बंद कर दिया है। इस कारण उनकी नौकरी अब नहीं रही। पैसे की दिक्कत है। लांडरा स्थित एक कॉलेज से बीबीए कर लिया है। अब ऐसा लग रहा है कि भारत आकर आगे की पढ़ाई नहीं कर पाऊंगा।
- नाजिर खान, छात्र, अफगानिस्तान
इनसेट
अफगानी छात्रों की मांग, जब तक हालात खराब है फीस न ली जाए
अफगानिस्तान के कुछ छात्रों ने मीडिया के जरिए पीयू प्रशासन से मांग की है कि उनकी फीस कम की जाए या तब तक माफ कर दी जाए जब तक वहां के हालात ठीक नहीं हो जाते। जैसे ही अफगानिस्तान में हालात सामान्य हो जाएंगे तो वह फीस दे देंगे। इसके अलावा कुछ छात्रों की स्नातक व परास्नातक की पढ़ाई पूरी हो गई है। वह अपनी डिग्री लेने की तैयारी में हैं। ऐसे में उनकी मांग है कि अफगानी छात्रों की डिग्रियां ऑनलाइन कर दी जाएं ताकि छात्रों को डिग्री के लिए भारत न आना पड़े। यह भी मांग रखी है कि वीजा फार्म भरने में छात्रों को दिक्कतें आ रही हैं, उसका भी निदान करवाया जाए।
पीयू अफगानिस्तान के छात्रों की मदद को आगे आए
छात्र संगठन इनसो के चेयरमैन रजत नैन, पुनीत सीरा व अन्य ने पीयू वीसी को ज्ञापन देकर कहा है कि अफगानिस्तान के बिगड़े हालात के कारण यहां पढ़ रहे अफगानी छात्र परेशान हैं। उनके पास पैसों की दिक्कत होने लगी है। ऐसे में उनसे फीस न ली जाए। वहीं, जिनकी वीजा की अवधि खत्म हो गई है, उन्हें अन्य कोर्सेज में दाखिला दिया जाए और वीजा अवधि बढ़ाई जाए। साथ ही रहने से लेकर खाने तक की सुविधा प्रदान की जाए। यहां से पत्र भेजा जाए कि पीयू में पढ़ रहे छात्रों को अफगानिस्तान से लाने की व्यवस्था की जाए।
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इन छात्रों का कहना है कि उनके अभिभावकों का कारोबार ठप हो गया है। नौकरी भी चली गई है। ऐसे में उनकी आगे की पढ़ाई कैसे चलेगी। इनमें से कई छात्र बीबीए के बाद एमबीए करना चाहते हैं लेकिन अब उनके सामने फीस का संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में अब इनमें से कुछ छात्र एमए करने की योजना बना रहे हैं। वहीं, कुछ छात्र अन्य पाठ्यक्रमों से पढ़ाई की योजना बना रहे हैं ताकि अधिक पैसे खर्च न होें। हालांकि उनके सामने सबसे बड़ा सवाल परिवार की सुरक्षा और भविष्य का है।
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एक माह से नहीं खोली दुकान, आर्थिक स्थिति हुई खराब
मेरे अब्बू की दुकान काबुल में है, जो लूटपाट के डर से एक महीने से बंद पड़ी है। और आगे कब तक बंद रहेगी, इसका कुछ पता नहीं। दुकान बंद रहने से घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई है। स्कॉलरशिप के जरिए मोहाली के एक शिक्षण संस्थान से बीबीए की पढ़ाई कर ली है। अब एमबीए में छात्रवृत्ति मिलेगी या नहीं, इसका भी पता नहीं। सेल्फ फाइनेंस से पढ़ना आसान नहीं। फीस अधिक है और आर्थिक स्थिति खराब हो गई है। ऐसे में अब एमए की पढ़ाई करने की योजना बना रहा हूं।
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-इरफान, छात्र, निवासी काबुल
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पिता की नौकरी चली गई, अब पढ़ाई पूरी नहीं हो पाएगी
मेरे पड़ोसी के घर का दरवाजा तीन तालिबानियों ने खटखटाया और कहा कि घर की तलाशी लेंगे। तलाशी लेने के बाद सोना और पैसे लेकर चले गए। बाद में पता चला कि वह तालिबानी नहीं, चोर थे। ऐसे में अब मेरे घरवाले डर के मारे घर का दरवाजा तक नहीं खोल रहे। अब्बू (पिता) एक कंपनी ने काम करते थे। तालिबान की वापसी के बाद कंपनी ने कार्यालय बंद कर दिया है। इस कारण उनकी नौकरी अब नहीं रही। पैसे की दिक्कत है। लांडरा स्थित एक कॉलेज से बीबीए कर लिया है। अब ऐसा लग रहा है कि भारत आकर आगे की पढ़ाई नहीं कर पाऊंगा।
- नाजिर खान, छात्र, अफगानिस्तान
इनसेट
अफगानी छात्रों की मांग, जब तक हालात खराब है फीस न ली जाए
अफगानिस्तान के कुछ छात्रों ने मीडिया के जरिए पीयू प्रशासन से मांग की है कि उनकी फीस कम की जाए या तब तक माफ कर दी जाए जब तक वहां के हालात ठीक नहीं हो जाते। जैसे ही अफगानिस्तान में हालात सामान्य हो जाएंगे तो वह फीस दे देंगे। इसके अलावा कुछ छात्रों की स्नातक व परास्नातक की पढ़ाई पूरी हो गई है। वह अपनी डिग्री लेने की तैयारी में हैं। ऐसे में उनकी मांग है कि अफगानी छात्रों की डिग्रियां ऑनलाइन कर दी जाएं ताकि छात्रों को डिग्री के लिए भारत न आना पड़े। यह भी मांग रखी है कि वीजा फार्म भरने में छात्रों को दिक्कतें आ रही हैं, उसका भी निदान करवाया जाए।
पीयू अफगानिस्तान के छात्रों की मदद को आगे आए
छात्र संगठन इनसो के चेयरमैन रजत नैन, पुनीत सीरा व अन्य ने पीयू वीसी को ज्ञापन देकर कहा है कि अफगानिस्तान के बिगड़े हालात के कारण यहां पढ़ रहे अफगानी छात्र परेशान हैं। उनके पास पैसों की दिक्कत होने लगी है। ऐसे में उनसे फीस न ली जाए। वहीं, जिनकी वीजा की अवधि खत्म हो गई है, उन्हें अन्य कोर्सेज में दाखिला दिया जाए और वीजा अवधि बढ़ाई जाए। साथ ही रहने से लेकर खाने तक की सुविधा प्रदान की जाए। यहां से पत्र भेजा जाए कि पीयू में पढ़ रहे छात्रों को अफगानिस्तान से लाने की व्यवस्था की जाए।