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Chandigarh News: उत्तर भारत में पराली जलाने के मामले घटे, लेकिन पश्चिमी विक्षोभ से बढ़ सकता प्रदूष

Tue, 07 Oct 2025 01:51 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 07 Oct 2025 01:51 AM IST
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Stubble burning cases have declined in North India, but pollution may increase due to western disturbance.
चंडीगढ़। फसल कटाई के साथ ही उत्तर भारत में पराली जलाने की समस्या फिर सामने आने लगी है। प्रो. रविंदर खाईवाल के अनुसार, बीते 5 अक्तूबर को पंजाब में अकेले 145 जगहों पर पराली जलाने के मामले दर्ज किए गए जबकि हरियाणा में यह आंकड़ा 73 के करीब था। अमृतसर, तरतारन और पटियाला में कुल मामलों का 80% हिस्सा दर्ज हुआ।
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वर्ष 2021 से उत्तर भारत में पराली जलाने के मामले कुल 80% घट चुके हैं। पिछली साल अक्तूबर से दिसंबर के बीच पंजाब और हरियाणा में कुल 12 हजार मामले सामने आए थे। 2024 में पंजाब में कुल 10,909 घटनाएं दर्ज हुईं, जबकि 2023 में यह संख्या 36,663 थी।
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हालांकि, प्रो. खाईवाल ने चेताया कि इस साल पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टरबेंस के कारण पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ सकता है। पाकिस्तान में जलने वाली पराली का असर भी उत्तर भारत में देखा जा सकता है।
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पराली जलाने का असर शहरों के एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) पर भी दिखने लगा है। 3 जनवरी को एक्यूआई 312 दर्ज किया गया, जबकि 2 अक्तूबर को यह आंकड़ा 97 था। प्रो. खाईवाल ने बताया कि दिवाली तक यह संख्या बढ़ने की उम्मीद है।
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