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Chandigarh News: अजीब व्यवस्था... टेक्नीशियन की बजाय हॉस्पिटल अटेंडेंट चला रहा मशीन
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चंडीगढ़। पीजीआई में ऑपरेशन थियेटर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक दिन पहले ट्रॉमा ओटी में ऑटोक्लेव मशीन फटने की घटना के बावजूद यहां तकनीकी काम हॉस्पिटल अटेंडेंट से करवाए जाने का मामला सामने आया है जिससे मरीजों की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा ह जबकि इसके लिए अलग से टेक्नीशियन की तैनाती है। गम्भीर बात यह है कि जिस मशीन पर संक्रमण से बचाव की प्रक्रिया निर्भर है उसे ही अप्रशिक्षित कर्मचारी से चलवाया जा रहा है। इस मामले पर पीजीआई प्रशासन कुछ भी कहने को तैयार नहीं है।
पीजीआई में एक ओर जहां देशभर से मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं, वहीं दूसरी ओर अस्पताल की आंतरिक व्यवस्था अब चिंता का विषय बनती जा रही है। ट्रॉमा ऑपरेशन थियेटर में सोमवार को ऑटोक्लेव मशीन के अचानक फटने से हड़कंप मच गया था। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में कोई गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ लेकिन इस घटना ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस तकनीकी मशीन के संचालन के लिए प्रशिक्षित स्टाफ की जरूरत होती है, उसे अस्पताल में अटेंडेंट चला रहे हैं। नर्सिंग एसोसिएशन भी इसे लेकर लगातार मांग कर रहा है कि सीएसएसडी (सेंट्रल स्टेराइल सप्लाई डिपार्टमेंट) के प्रशिक्षित ऑटोक्लेव तकनीशियन ही ओटी में मशीन चलाएं लेकिन इस पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
सूत्रों के मुताबिक कई ओटी में लंबे समय से तकनीकी कार्य अस्पताल सहायकों से करवाया जा रहा है जबकि यह जिम्मेदारी प्रशिक्षित सीएसएसडी कर्मचारियों की होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऑटोक्लेव जैसे संवेदनशील उपकरण के संचालन में जरा सी चूक भी संक्रमण के खतरे को बढ़ा सकती है और मरीजों की जान पर बन सकती है। ऐसे में गैर-प्रशिक्षित स्टाफ से यह काम करवाना सीधे-सीधे सुरक्षा मानकों की अनदेखी है। नर्सिंग ऑफिसरों का कहना है कि उन्होंने कई बार इस मुद्दे को उठाया लेकिन प्रबंधन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। अब जब हादसा हो चुका है तो एक बार फिर जिम्मेदारी तय करने और व्यवस्था सुधारने की मांग तेज हो गई है। कर्मचारियों का कहना है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में बड़ा हादसा भी हो सकता है।
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बेहद महत्वपूर्ण है ऑटोक्लेव
ऑपरेशन से पहले सभी सर्जिकल उपकरणों को पूरी तरह स्टरलाइज करने में उपयोगी
उच्च तापमान और दबाव के जरिए बैक्टीरिया, वायरस व फंगस को नष्ट करता है
संक्रमण रोकने की सबसे अहम कड़ी, खासकर ओटी और आईसीयू में
गलत संचालन से उपकरण पूरी तरह स्टरलाइज नहीं हो पाते जिससे मरीज में संक्रमण का खतरा बढ़ता है
तकनीकी गड़बड़ी या गलत हैंडलिंग से विस्फोट जैसे हादसे भी संभव
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पीजीआई में एक ओर जहां देशभर से मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं, वहीं दूसरी ओर अस्पताल की आंतरिक व्यवस्था अब चिंता का विषय बनती जा रही है। ट्रॉमा ऑपरेशन थियेटर में सोमवार को ऑटोक्लेव मशीन के अचानक फटने से हड़कंप मच गया था। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में कोई गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ लेकिन इस घटना ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस तकनीकी मशीन के संचालन के लिए प्रशिक्षित स्टाफ की जरूरत होती है, उसे अस्पताल में अटेंडेंट चला रहे हैं। नर्सिंग एसोसिएशन भी इसे लेकर लगातार मांग कर रहा है कि सीएसएसडी (सेंट्रल स्टेराइल सप्लाई डिपार्टमेंट) के प्रशिक्षित ऑटोक्लेव तकनीशियन ही ओटी में मशीन चलाएं लेकिन इस पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
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सूत्रों के मुताबिक कई ओटी में लंबे समय से तकनीकी कार्य अस्पताल सहायकों से करवाया जा रहा है जबकि यह जिम्मेदारी प्रशिक्षित सीएसएसडी कर्मचारियों की होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऑटोक्लेव जैसे संवेदनशील उपकरण के संचालन में जरा सी चूक भी संक्रमण के खतरे को बढ़ा सकती है और मरीजों की जान पर बन सकती है। ऐसे में गैर-प्रशिक्षित स्टाफ से यह काम करवाना सीधे-सीधे सुरक्षा मानकों की अनदेखी है। नर्सिंग ऑफिसरों का कहना है कि उन्होंने कई बार इस मुद्दे को उठाया लेकिन प्रबंधन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। अब जब हादसा हो चुका है तो एक बार फिर जिम्मेदारी तय करने और व्यवस्था सुधारने की मांग तेज हो गई है। कर्मचारियों का कहना है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में बड़ा हादसा भी हो सकता है।
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बेहद महत्वपूर्ण है ऑटोक्लेव
ऑपरेशन से पहले सभी सर्जिकल उपकरणों को पूरी तरह स्टरलाइज करने में उपयोगी
उच्च तापमान और दबाव के जरिए बैक्टीरिया, वायरस व फंगस को नष्ट करता है
संक्रमण रोकने की सबसे अहम कड़ी, खासकर ओटी और आईसीयू में
गलत संचालन से उपकरण पूरी तरह स्टरलाइज नहीं हो पाते जिससे मरीज में संक्रमण का खतरा बढ़ता है
तकनीकी गड़बड़ी या गलत हैंडलिंग से विस्फोट जैसे हादसे भी संभव