पीएयू के वीसी बोले- केंद्र के पास कानून बनाने का अधिकार, लेकिन किसानों के हितों का ध्यान रखना जरूरी
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केंद्र सरकार के कृषि अध्यादेशों को लेकर पंजाब में राजनीति गरमाई हुई है। अध्यादेश के विरोध में हरसिमरत कौर बादल ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। वहीं इस विधेयक को लेकर पंजाब की किसान यूनियन भी आर-पार के मूड में है।
कृषि से जुड़े विशेषज्ञ भी केंद्र सरकार के दोनों अध्यादेशों को लेकर संतुष्ट नहीं हैं। कुछ विशेषज्ञों का साफ कहना है कि इन कानूनों के चलते पंजाब के किसान एक बार फिर आत्महत्या की तरफ बढ़ सकते हैं, जो पंजाब के लिए घातक साबित हो सकता है। ज्यादातर कृषि विशेषज्ञ न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को लेकर ही चिंता जाहिर कर रहे हैं।
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) के वाइस चांसलर डॉक्टर बलदेव सिंह कहते हैं कि कृषि क्षेत्र हमेशा राज्य से संबंधित विषय रहा है। केंद्र सरकार कोई भी कानून बना सकती है लेकिन उसे यह ध्यान रखना चाहिए कि उसका किसानों पर उल्टा असर न पड़े। हम किसानों को लगातार नीचे की तरफ जाता नहीं देख सकते।
किसानों को भी एक अच्छी जिंदगी जीने का हक है। इस समय कृषि को लेकर लागतों में लगातार इजाफा होता जा रहा है, जिसका नतीजा है कि किसानों का लाभ कम होता जा रहा है और वह आर्थिक तौर पर नीचे जा रहे हैं। सरकार को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की तरफ ध्यान देना चाहिए। हम सभी ने देखा है कि बीते कुछ समय के दौरान पेट्रोल और डीजल के मूल्य में लगातार इजाफा हो रहा है। क्या केंद्र सरकार एमसीपी को रिवाइज करेगी।
पंजाब के अल्पसंख्यक किसान भाइयों के साथ हैं: शाही इमाम
लुधियाना की एतिहासिक जामा मस्जिद में जुम्मे की नमाज अदा करने से पहले साप्ताहिक संबोधन में शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी ने कृषि अध्यादेशों की निंदा की और इन्हें रद्द करने की मांग की। शाही इमाम ने कहा कि किसान हमारे भाई हैं। वह सिर्फ भारत को ही नहीं दुनिया भर के लोगों को अनाज मुहैया करवाते हैं। उनके साथ केंद्र सरकार की मनमर्जी बर्दाश्त नहीं की जा सकती। शाही इमाम ने कहा कि पंजाब के किसान जो भी रणनीति अपनाएंगे पंजाब के सभी अल्पसंख्यक उसमें साथ देंगे।