पंजाब विधानसभा: श्री तेग बहादुर जी के 400वें प्रकाश पर्व को समर्पित विशेष सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित
सत्र के कार्यक्रम के अनुसार सुबह 10 बजे दिवंगत शख्सियतों को श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद श्री गुरु तेग बहादुर जी से संबंधित सदस्यों द्वारा विचार प्रकट किए गए। गुरु साहिबान पर व्याख्यान व चर्चा के बाद सदन की कार्यवाही 1 बजे तक स्थगित कर दी गई।
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पंजाब विधानसभा का शुक्रवार को संपन्न हुआ एक दिवसीय विशेष सत्र श्री गुरु तेग बहादुर जी के 400वें प्रकाश पर्व को समर्पित कर कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार ने एक नई परिपाटी की शुरुआत की। आमतौर पर विधानसभा सत्रों के दौरान दिखाई देने वाले माहौल से बिल्कुल अलग इस सत्र के दौरान पूरा सदन गुरु साहिबान के प्रति श्रद्धाभाव से ओतप्रोत रहा।
सत्तापक्ष और विपक्ष की सीटों पर सदस्यों की उपस्थिति भी लगभग पूरी रही और सभी सदस्य स्पीकर और विशेष अतिथियों के गुरु साहिबान पर व्यक्त किए विचारों को ध्यानपूर्वक सुनते रहे। भले ही विपक्षी दलों ने सदन के बाहर राज्य सरकार के खिलाफ विभिन्न मुद्दों और विशेष सत्र की अवधि बढ़ाए जाने की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किए लेकिन सदन में वे पूरी खामोशी से बैठे और कहीं कोई टीका-टिप्पणी नहीं की गई।
शुक्रवार को सुबह विशेष सत्र की शुरुआत, दिवंगत शख्सियतों को श्रद्धांजलि देने से हुई। इसके साथ ही सदन को 11 बजे तक स्थगित कर दिया गया। सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर विशेष रूप से उपस्थित राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित, पूर्व मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर के अलावा मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और स्पीकर राणा केपी सिंह ने श्री गुरु तेग बहादुर जी के जीवन, उनके बलिदान और उनके उपदेशों पर प्रकाश डाला। इस मौके पर सदन के नेता प्रतिपक्ष हरपाल सिंह चीमा ने सभी मेहमानों का आभार व्यक्त किया। इससे पहले स्पीकर ने सभी मुख्य मेहमानों को शॉल और स्मृति चिह्न देकर स्वागत किया। सदन में गुरु साहिबान पर एक घंटा 23 मिनट तक चले इस चर्चा सत्र के बाद स्पीकर ने कार्यवाही को 1 बजे तक स्थगित कर दिया।
इसके बाद सदन की कार्यवाही फिर शुरू होते ही संसदीय मामलों के मंत्री ब्रह्म मोहिंदरा ने सदन की कार्यवाही को अनिश्चिकाल के लिए स्थगित किए जाने का प्रस्ताव पेश किया। इस पर स्पीकर ने ध्वनिमत से सदस्यों का मत चाहा लेकिन अकाली दल के सदस्य बिक्रम सिंह मजीठिया ने प्रस्ताव पर वोटिंग कराने की मांग की। स्पीकर द्वारा इस मांग को अनदेखा किए जाने पर अकाली दल के सदस्यों ने कुछ देर विरोध जताया लेकिन यह प्रस्ताव सदन में ध्वनिमत से पारित हो गया और सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।
एक दिवसीय सत्र में कार्यवाही चली 1.38 मिनट
श्री गुरु तेग बहादुर जी के 400वें प्रकाश पर्व को समर्पित पंजाब विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र की कार्यवाही पूरे दिन में केवल 1 घंटा 38 मिनट ही चली। इस दौरान दिवंगतों को श्रद्धांजलि देने के अलावा अन्य कोई सामान्य कामकाज नहीं हुआ। लेकिन गुरु साहिबान के बारे में विशेष व्याख्यान और चर्चा सत्र 1 घंटा 23 मिनट का ही रहा। सरकार की ओर से इस विशेष सत्र के लिए पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को भी आमंत्रित किया गया था लेकिन वे अस्वस्थ होने के कारण इस सत्र में हिस्सा नहीं ले सके। वहीं, उपराष्ट्रपति एम वेंकया नायडू और बौद्ध धर्मगुरू दलाईलामा ने इस विशेष सत्र के बारे में अपना संदेश विधानसभा स्पीकर और मुख्यमंत्री को लिखित तौर पर भेज दिया, जिसे स्पीकर राणा केपी सिंह ने सदन में पढ़कर सुनाया।
सरबत का भला के फलसफे से चूक गई सरकार
पंजाब विधानसभा का मानसून सत्र, जिसे एक दिवसीय विशेष सत्र के रूप में श्री गुरु तेग बहादुर जी के प्रकाश पर्व को समर्पित किया गया, उसके प्रति सदन में सभी सदस्यों ने भी असीम श्रद्धा व आदर भाव से गुरु साहिबान को याद किया लेकिन इसी दौरान गुरु साहिबान का जन-जन के कल्याण से जुड़े फलसफे- सरबत का भला, से राज्य सरकार चूक गई। एक दिवसीय विशेष सत्र में सरकार के पास आधे दिन से भी ज्यादा समय खाली बच जाने पर भी सरकार द्वारा आम जनता से जुड़े मुद्दों को सदन पटल पर नहीं रखा गया। इस तरह इस सत्र में जनता से जुड़े मसलों से राज्य सरकार पूरी तरह किनारा कर गई।
श्री गुरु तेग बहादुर जी की विचारधारा के विश्वव्यापी प्रसार की जरूरत : कैप्टन
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने शुक्रवार को इस बात पर जोर दिया कि नौवें सिख गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी की विचारधारा को दुनिया भर में प्रचारित किए जाने की जरूरत है, जिससे शांति, भाईचारा, धर्म निरपेक्षता और मिलजुल कर रहने जैसे मूल्यों की रक्षा हो सके और जिन मूल्यों के लिए गुरु साहिब ने अतुल्य बलिदान दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर जी का जीवन और संदेश उस भावना के आधार हैं, जिसे हम पंजाबियत कहते हैं। इसमें हमारी सांझी तहजीब, हमारी मातृभाषा पंजाबी, लोगों, धर्मों, जातियों और संप्रदायों से ऊपर उठती भाईचारे की गहरी जड़े शामिल हैं। इस गौरवमयी सदन द्वारा मैं यह यकीन करता हूं कि हम सांसारिक शांति और भाईचारे के संदेश को इस ऐतिहासिक मौके फिर से दृढ़ करें।
बलिदानों से भरा पंजाब का इतिहास प्रेरणा का स्रोत है: राज्यपाल
इस मौके पर पंजाब के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की शहादत को आध्यात्मिक, धार्मिक और भारत के राजनीतिक इतिहास का अहम मोड़ बताते हुए कहा कि ‘पंजाब का इतिहास महान गुरु साहिबान और शहीदों द्वारा निस्वार्थ बलिदानों से भरा है, जो हम सभी के लिए हमेशा प्रेरणा स्रोत है। सिख गुरु साहिबान ने हमें उस युग में प्रेरित किया जो शायद हमारे इतिहास का सबसे चुनौतीपूर्ण चरण था। इसी कारण सिख गुरु साहिबान का न सिर्फ़ सिख बल्कि दुनिया भर के सभी धर्मों के लोग सम्मान करते हैं।’
प्यार और सद्भावना के लिए प्रेरित करता रहेगा गुरु साहिब का बलिदान: राणा केपी
विधानसभा स्पीकर राणा केपी सिंह ने कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर जी का बेमिसाल बलिदान मानवता को धर्म जाति, रंग भेद, संप्रदाय और नस्लों से ऊपर उठकर प्यार, सद्भावना और सहनशीलता के संदेश के प्रति हमेशा प्रेरित करता रहेगा। जो राज्य, देश, कौम और लोग अपने इतिहास से प्रेरणा लेकर चलते हैं, वह अंधकार में भी प्रकाश ढूंढ लेते हैं।
गुरु साहिब ने धार्मिक आजादी की रक्षा को शहादत का रास्ता चुना: जस्टिस खेहर
भारत के पूर्व चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने दुनिया भर में सिख जीवनशैली में ‘अरदास’ की महत्ता को दर्शाते हुए कहा कि आज हम सभी भाग्यशाली हैं कि श्री गुरु तेग बहादुर जी के 400वें प्रकाश पर्व को गुरु साहिब को याद करने के साथ-साथ चिंतन करने के लिए मना रहे हैं। एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका में भी श्री गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान को दूसरे धर्म की धार्मिक स्वतंत्रता की खातिर दी गई शहादत के रूप में दर्ज किया गया है। पांचवें पातशाह श्री गुरु अर्जुन देव जी की शहादत ने सिख इतिहास की दिशा ही बदल दी और सिखों की सैन्यीकरण की प्रक्रिया शुरू की, जो उस समय तक एक शांतिमय समुदाय था।