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हुड्डा की मांग-यूपी के हिस्से को मिला बने 'विशाल हरियाणा', दिल्ली हो राजधानी, भाजपा का पलटवार

Tue, 26 Nov 2019 08:54 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Tue, 26 Nov 2019 08:54 PM IST
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Special Session Of Haryana Assembly,BS Hooda raised the issue of 'Vishal Haryana'
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने उठाई विशाल हरियाणा की मांग। - फोटो : अमर उजाला

संविधान दिवस पर हरियाणा विधानसभा के विशेष सत्र में नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने विशाल हरियाणा का मुद्दा उठाया। हुड्डा ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल की ओर से सरकारी संकल्प पर चर्चा करते हुए कहा कि उनके पिता चौधरी रणबीर हुड्डा ने 2 अगस्त 1949 को ही कह दिया था कि पंजाब के हिस्से होंगे हिंदी भाषी हिस्से से हरियाणा बनेगा। 

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उन्होंने उत्तर प्रदेश के हिंदी भाषी हिस्से को भी हरियाणा में मिलाने की बात कही थी। यह हिस्सा आना अभी बाकी है। वह चाहते हैं कि विशाल हरियाणा बनाकर उसमें उत्तर प्रदेश के हिंदी भाषी हिस्से को शामिल करना चाहिए, साथ ही दिल्ली को विशाल हरियाणा की राजधानी बनाना चाहिए। हुड्डा के इस वक्तव्य पर गृहमंत्री अनिल विज ने कांग्रेस को घेरने में देरी नहीं की। 
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उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा की ‘विशाल हरियाणा’ की मांग से कांग्रेस ने चंडीगढ़ पर हरियाणा का दावा कमजोर कर दिया है। इसके लिए प्रदेश की जनता उन्हें माफ नही करेगी। हुड्डा ने सदन में पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली को मिलाकर ‘विशाल हरियाणा’ के गठन की मांग की थी, जिसकी राजधानी दिल्ली बनाने की सलाह दी। 
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उन्होंने कहा कि विधानसभा में कांग्रेस की मांग से प्रदेश के लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं, ऐसा बयान हरियाणा की जनता के मनोभावों के विरोध में है। चंडीगढ़ का मामला एसवाईएल नहर से जुड़ा है, ऐसा कहना राज्य के किसानों का भी विरोध करने के समान है। 

संविधान दिवस देश के गौरव का प्रतीक: विज

गृह मंत्री अनिल विज ने कहा कि संविधान दिवस देश के गौरव का प्रतीक है, जो कि देश के सभी लोगों को संविधान की अनुपालना के लिए प्रेरित करता है। हमारा देश दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र हैं। इसलिए इसका संविधान भी दुनिया के अन्य देशों से अनेक मायनों में अलग है।

हमारे संविधान ने वर्तमान में जीवन जीने के नियम व भविष्य को सुरक्षित रखने में कोई कमी नही छोड़ी है। जिस प्रकार से गीता सार को ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन’ से समझा जा सकता है, उसी प्रकार संविधान को समझने के लिए उसकी प्रस्तावना ही काफी है।

इसमें देश की एकता व अखंडता, नागरिकों के मौलिक अधिकार, धर्म एवं उपासना की स्वतंत्रता व स्वतंत्र न्यायपालिका सहित अनेक व्यवस्थाएं दी गई है। इसीलिए डॉ. भीमराव अम्बेडकर को भारत के संविधान का जनक कहा जाता है।

न्यायपालिका को अलग रखना दूरदर्शी सोच: हुड्डा
नेता प्रतिपक्ष हुड्डा ने महाराष्ट्र के मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि विधायिका और न्यायपालिका को इसलिए ही संविधान में अलग-अलग रखा गया। संविधान सभा की सोच दूरदर्शी थी, सभा सदस्य जानते थे कि विधायिका कभी भी मनमानी कर सकती है, इसलिए न्यायपालिका का अलग होना जरूरी है।

देश में लोकतंत्र व प्रजातंत्र संविधान के मजबूत होने के कारण ही हैं। पाकिस्तान में प्रजातंत्र इसलिए नहीं है, चूंकि उनका संविधान कमजोर है। उन्होंने कहा कि संविधान की मजबूती को बनाए रखने के लिए दलगत राजनीति से ऊपर उठकर काम करने की जरूरत है। उनके लिए और खुशी की बात यह है कि उनके पिता का जन्म भी 26 नवंबर के दिन ही 1914 में हुआ था।

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