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फोटोग्राफी दिवस पर फोटोग्राफी से जुड़े लोगों से ख़ास बातचीत, जानिए उनके विचार

Fri, 19 Aug 2016 09:27 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़ Updated Fri, 19 Aug 2016 09:27 PM IST
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Special interview of some photographer on world photography day
वर्ल्ड फोटोग्राफी डे - फोटो : Amar ujala
कहते है कि एक तस्वीर हजारों शब्दों को बयां कर देती है। कई बार लिखित शब्द लोगों पर इतना प्रभाव नहीं डाल पाते जितना एक तस्वीर कह देती है। इस दुनिया में ऐसे बहुत से लोग हैं जिन्होंने फोटोग्राफी को अपना प्रोफेशन बनाया हुआ हैं, तो कुछ ऐसे भी हैं जिनके लिए फोटोग्राफी प्रोफेशन नहीं एक पैशन की तरह है और यही पैशन उन्हें एक जगह से दूसरी जगह ले जाता है।
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19 अगस्त को वर्ल्ड फोटोग्राफी डे के रूप में मनाया जाता है। इस मौके पर आइए जानते हैं सिटी के उन कलाकारों के बारे में जिनके लिए फोटोग्राफी कोई पेशा नहीं बल्कि एक जुनून है।
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अखबार से जागा जुनून

Special interview of some photographer on world photography day
वर्ल्ड फोटोग्राफी डे - फोटो : Amar ujala
हरविंद्र सिंह हरियाणा के अकाउंटेंट जनरल में सीनियर अकाउंटेंट हैं। वह पिछले 30 साल से फोटोग्राफी कर रहे हैं। उन्होंने बताया, जब मैं 22 साल का था तो ट्रिब्यून अखबार में छपी फोटो हमेशा मुझको आकर्षित करती। बस, यहीं से मेरी फोटोग्राफी में रुचि पैदा हो गई। लेकिन उस समय मेरे पास कैमरा खरीदने के पैसे नहीं थे। जब तीन साल बाद जब सीनियर अकाउंटेंट के रूप में मुझे नौकरी मिल गई तो मैंने अपनी पहली सैलरी से कैमरा खरीदा और अपने शौक को पूरा किया। - हरविंद्र सिंह (55 वर्ष), सीनियर अकाउटेंट, सेक्टर 41 चंडीगढ़।

50 वर्षीय नरबीर सिंह पेशे से एक इंजीनियर हैं। उन्होंने बताया कि , ‘2004 में मैंने हैंडीकैम से फोटो खींचनी शुरू की। 2006 में मेरी दादी ने अपने सभी बच्चों को कुछ न कुछ पैसे दिए। उससे मैंने अपना पहला डीएसएलआर कैमरा (135-400 सिगमा लेंस के साथ) खरीदा और यहीं से फोटोग्राफी मेरा पैशन बन गया। - नरबीर सिंह, सेक्टर 10, चंडीगढ़।

42 वर्षीय सुखविंद्र सिंह पेशे से फूड इंसपेक्टर हैं। लेकिन फोटोग्राफी का जुनून उन्हें चंडीगढ़ से लेह लद्दाख ले गया। पूरा दिन फोटोग्राफी में टाइम नहीं निकाल पाने के कारण वह सुबह पांच बजे ही फील्ड में निकल जाते हैं और दो घंटे बाद घर वापस आते हैं। वाइल्ड फोटोग्राफी करने वाले सुखविंदर सिंह ने बताया कि उन्हें फोटोग्राफी का शौक नेशनल जियोग्राफी चैनल से पड़ा। - सुखविंद्र सिंह, (50) सेक्टर 45, चंडीगढ़।

पेशे से बिजनेसमैन मनीष को फोटोग्राफी में दिलचस्पी 2014 में पैदा हुई, जबकि उनके पिता का अपना एक फोटो स्टूडियो था। वह बताते हैं कि सुखना लेक से फोटो खींचना शुरू किया और यह शौक धीरे-धीरे पैशन बन गया। यही पैशन मुझे लेह लद्दाख की फोटोग्राफी की ओर ले गया। वह बताते हैं कि बिजनेस के चलते मुझे वीकेंड में ही अपने इस शौक को पूरा करने का मौका मिलता है और फिर मैं इसमें घंटों व्यतीत करता हूं। - मनीष, सेक्टर 8, चंडीगढ़।

37 वर्षीय डॉक्टर अरुण बांसल पंजाब यूनिवर्सिटी में प्रोग्रामर हैं।  वह 2005 से फोटोग्राफी कर रहे हैं। वह बताते हैं कि फोटोग्राफी का शौक उन्हें बचपन से ही था और एक बार रिसर्च करते समय  देखा कि ज्यादातर बच्चों को उन्हीं वर्ड्स और एनिमल्स की पहचान थी जिनके बारे में उन्हें स्कूल में बताया जाता है। उन्होंने बच्चों को बायोडायवर्सिटी की जानकारी देने के लिए फोटोग्राफी को एक जरिया बनाया और उससे संबंधित फोटोग्राफी करनी शुरू कर दी। फिर उन्हेंने नेचुरल बायोडायवर्सिटी नाम से एक ग्रुप का निर्माण भी  किया। जिसके  2200 मेंबर हैं और इससे भारत के अलावा जापान के लोग भी जुडे़ हुए हैं। - डॉ. अरुण बांसल (37), पंजाब यूनिवर्सिटी । 

फोटोग्राफी से मिलती है राहत

Special interview of some photographer on world photography day
वर्ल्ड फोटोग्राफी डे - फोटो : Amar ujala
67 वर्षीय जस कंवलजीत कौर गवर्नमेंट मॉडल सी.से. स्कूल 35 में शिक्षक हैं। लेकिन फोटोग्राफी का उन्हें इतना शौक है कि कैमरा हमेशा अपने साथ रखती हैं। फोटोग्राफी का जुनून उन्हें मलयेशिया, इंडोनेशिया जैसे देशों में ले गया। 2015 में उन्होंने आर्ट्स स्पेस द्वारा पीयू में आयोजित आल इंडिया कंटेम्परेरी आर्टिट्स एक्जीविशन में पहला स्थान हासिल किया। इसके लिए जस कंवलजीत को हरियाणा के गवर्नर कप्तान सिंह सोलंकी ने अवॉर्ड देकर सम्मानित किया। - जस कंवलजीत कौर, सेक्टर 23, चंडीगढ़।

53 वर्षीय मतिंदर सिंह सेखों डीएवी कॉलेज में ज्योग्राफी के प्रोफेसर हैं। वह 30 सालों से फोटोग्राफी कर रहे हैं। वह स्कूल में ही फोटोग्राफी क्लब से जुड़ गए थे। उन्होंने बताया कि जो राहत मुझे फोटोग्राफी के जरिए नेचर से जुड़कर मिलती है, शायद ऐसी राहत किसी और काम से नहीं मिलेगी। - मतिंदर सिंह सेखों, (53) मोहाली।

पंजाब यूनिवर्सिटी में माइक्रोग्राफर नवतेज सिंह ने बताया कि वह 2000 से फोटोग्राफी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूरा दिन माइक्रोस्कोप पर नीचे झुककर काम करना पड़ता था, और जब लैब से बाहर निकलता तो आसमान की ओर देखता तो मुझे प्रकृति की हर दुश्य खूबसूरत लगता। बस यहीं से फोटोग्राफी का शोक पैदा हो गया और नेचर की फोटो खींचनी शुरू कर दी।-  नवतेज सिंह, सेक्टर 14, चंडीगढ़। 

डॉक्टर अनुप्रीत मावी पंजाब यूनिवर्सिटी में मैनेजमेंट में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। वह बताती हैं कि फोटोग्राफी का शौक तो पहले ही था साथ ही मेरे पास डीएसएलआर कैमरा भी था। लेकिन मुझे यह समझ में नहीं आता था कि फोटो के लिए कौन सा  सब्जेक्ट चुनें। फिर मैंने फोटोग्राफी से जुड़े लोगों से मिलना शुरू किया और उन्होंने मुझे सब्जेक्ट के साथ-साथ फोटोग्राफी की तकनीकें भी बताई। - डॉ. अनुप्रीत मावी, सेक्टर 14, चंडीगढ़।
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