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जाटों की मांगें पूरी होंगी या नहीं, जाट आंदोलन खत्म होगा या नहीं, देखिए ये रिपोर्ट?

Mon, 13 Feb 2017 09:21 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 13 Feb 2017 09:21 AM IST
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special analysis report of results of talk on jat people and haryana govt to finish jat protest
हरियाणा जाट आरक्षण आंदोलन
जाटों की मांगें पूरी होंगी या नहीं, जाटों का आंदोलन खत्म होगा या नहीं। इसके बारे में अभी कुछ कह पाना मुश्किल है, लेकिन यह विश्लेषण कुछ और ही कहता है।  हरियाणा में आरक्षण व अन्य मांगों के लिए आंदोलनरत जाटों के 14वें दिन वार्ता की मेज पर पहुंचने के साथ ही अनिश्चितकालीन धरनों के देर-सवेर खत्म होने की नींव पड़ गई है।
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मुख्य सचिव डीएस ढेसी की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय समिति की जाट नेताओं के साथ पहले दौर की फीडबैक पर अब सरकार को अंतिम निर्णय लेना है। वार्ता के लिए सरकार के आगे बढ़ने पर जाटों का रुख भी नरम पड़ा है। अब जाटों की मांगों पर मनोहर सरकार का निर्णय ही आंदोलन का रुख तय करेगा। सरकार अगर जाट नेताओं की मांगों पर मुहर लगाती है, तो जल्द ही आंदोलन सिमट सकता है।
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हालांकि सरकार के लिए सभी मांगों पर एक साथ मुहर लगाना आसान नहीं है। चूंकि गैर जाट भी सरकार पर दबाव बनाए हुए हैं। आंदोलनकारियों को अब जहां सरकार के निर्णय और दूसरे दौर की वार्ता के न्यौते की उम्मीद होगी, वहीं सरकार कानूनी तथा सियासी पहलुओं को देखते हुए जल्द ही कोई अधिकारिक फैसला ले सकती है। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री मनोहर लाल मंगलवार को मंत्रिमंडल की अनौपचारिक बैठक में पांच सदस्यीय समिति की रिपोर्ट पर चर्चा करेंगे। मंत्रियों की रायशुमारी के बाद भी मांगों को पूरा करने पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी।
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ऐसे में सरकार के सामने चुनौती कानून-व्यवस्था को आने वाले दिनों में भी बनाए रखने की है। अभी तक धरने 19 जिलों में शांतिपूर्ण तरीकेसे चल रहे हैं। इसे देखते हुए सरकार और प्रशासनिक मशीनरी को आंदोलनकारियों से अभी कुछ दिन और जूझना पड़ेगा। वहीं, सीएम को पार्टी हाईकमान को भी विश्वास में लेना होगा। हालांकि सीएम मनोहर लाल ने केंद्रीय नेतृत्व को शनिवार को हुई बातचीत से पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को अवगत करा दिया है। 

हरियाणा सरकार व जाटों के बीच नहीं बनी बात, जारी रहेंगे धरने

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जाट नेता यशपाल मलिक
हरियाणा में पिछले 14 दिन से चल रहे जाट आरक्षण आंदोलन का पटाक्षेप करने के लिए शनिवार को पानीपत में रिफाइनरी टाउनशिप के कम्युनिटी सेंटर  में जाटों और सरकार की मुख्य सचिव डीएस ढेसी की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय कमेटी के बीच करीब साढ़े तीन घंटे चली वार्ता सिरे नहीं चढ़ सकी।

तीन चरणों की वार्ता खत्म होने के बाद अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने एलान किया कि शांतिपूर्ण धरने जारी रहेंगे और सरकार के साथ फिर से बातचीत के लिए समय मांगा जाएगा। कमेटी ने भी जाट नेताओं की मांगों को सीएम के समक्ष रखने का भरोसा दिया। कड़ी सुरक्षा के बीच निर्धारित समय से करीब चार घंटे देरी से दोपहर 1.28 बजे शुरू हुई बैठक में जाट नेताओं व कमेटी सदस्यों ने अपनी-अपनी बात रखी।

जाट नेताओं ने अपनी सातों मांगों के साथ वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु की पिछले आंदोलन में फूंकी कोठी की जांच सीबीआई को देने पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने साफ कहा कि इस दौरान दो युवाओं की भी जान गई थी। मलिक ने कमेटी के समक्ष बातचीत के लिए द्वार खुले होने की बात कहते हुए सभी मांगे मानने तक प्रदेश में धरने जारी रखने की बात कही। वार्ता सफल न हो पाने पर कमेटी सदस्य मीडिया से बचकर निकल गए।

जाट नेताओं के तल्ख रहे तेवर
वार्ता का दौर तीन चरणों में चला। अंतिम दौर की वार्ता शाम पांच बजे तक चली। बैठक में जाट नेताओं के तेवर तल्ख रहे। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि पिछले आंदोलन में 31 युवकों की जान गई थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं होने देंगे। एडीजीपी लॉ एंड ऑर्डर अकील मोहम्मद ने बताया कि पिछले आंदोलन में दर्ज मुकदमों में से 1392 वापस ले लिए हैं।

तीन चरणों में होगी जाटों और सरकार के बीच बातचीत

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Jat reservation - फोटो : अमर उजाला
वार्ता का पहला चरण
पहले चरण में कमेटी ने प्रदेश के जिलावार धरनों से आई कमेटियों की बात सुनी। जिला कमेटी के नेताओं ने सरकार व अधिकारियों को आड़े हाथ लेते कहा कि अधिकारी धरनों की सही व पुख्ता रिपोर्ट सरकार को नहीं दे रहे। इससे सारा मामला बिगड़ रहा है। कमेटी अधिकारी जाट नेताओं के आक्रोश को भांपते हुए शांत बैठे रहे।

वार्ता का दूसरा चरण
कमेटी ने दूसरे चरण में खाप नेताओं से बात की। अलग-अलग खापों के प्रतिनिधियों ने कहा कि जाट नहीं बल्कि अधिकारी व सरकार प्रदेश का माहौल बिगाड़ने में लगी हुई है। अधिकारी ही तो सरकार व जाटों के बीच सुलह नहीं होने दे रहे। आंदोलन में मारे गए लोगों के आश्रितों को नौकरी देने और प्रत्येक को 20-20 लाख रुपये देने की मांग रखी जा रही है। क्या सरकार के पास 30 नौकरियां नहीं है।

वार्ता का तीसरा चरण
तीसरे चरण में अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के पदाधिकारियों से बातचीत की गई। समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष मलिक ने कहा कि जाट समाज के लोग शांतिपूर्वक धरनों पर बैठे हैं। वे पहले दिन से ही सात मांगें रख रहे हैं, लेकिन मानी नहीं जा रही। उन्होंने सरकार के कई अधिकारी व कर्मचारी लोगों को भड़का रहे हैं। उन्होंने हांसी एसडीएम व रोहतक के सिपाही की बात रखी।

जाटों और सरकार के प्रति​निधियों पर एक नजर

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यशपाल मलिक - फोटो : अमर उजाला
सरकार की तरफ से ये हुए शामिल
मुख्य सचिव डीएस ढेसी, गृह सचिव रामनिवास, रेवेन्यू सचिव बिजेंद्रा कुमार सांगवान, प्रिंसिपल सैक्रेटरी देवेंद्र कुमार, एडीजीपी अकील मोहम्मद, आईजी रोहतक रेंज नवदीप विर्क, डीसी पानीपत डॉ. चंद्रशेखर खरे, एसपी पानीपत राहुल शर्मा, एसपी रोहतक पंकज नैन मौजूद रहे।

जाटों की तरफ ये रहे शामिल
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक, यूपी अध्यक्ष मनविंद्र सिंह, राष्ट्रीय सचिव कुलदीप डबास व प्रताप दहिया, दिल्ली अध्यक्ष जयभगवान, सचिव समेर सिंह, नरेला प्रधान प्रदीप खत्री, नजबगढ़ अध्यक्ष जयवीर गुलिया, सुरेश मच्छरौली, प्रदेशाध्यक्ष सुबे सिंह ढाका, हिसार से धर्मपाल बराला, महासचिव महेंद्र पूनिया, महासचिव रोहताश हुड्डा, प्रदेश महासचिव निशा चौधरी मुख्य रूप से शामिल रहे। 
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