अगर बनना है मेयर तो ये होगी शर्त, भाजपा और कांग्रेस में टक्कर
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कांग्रेस और भाजपा को नए साल में अगर मेयर बनाना है तो उन्हें बहुमत के लिए 18 पार्षद चाहिए। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही बिना मनोनीत के दम पर मेयर बनाना चाहती हैं, लेकिन पिछले 15 साल के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ है।
जबकि इस बार भाजपा की सिफारिश पर मनोनीत पार्षद बनने तय हैं। नगर निगम में 26 निर्वाचित और 9 मनोनीत पार्षद होते हैं, जबकि सांसद की एक वोट होती है।
भाजपा अध्यक्ष संजय टंडन का कहना है कि चुनाव प्रचार में पार्टी उम्मीदवारों को काफी अच्छा रिस्पांस मिला है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा-अकाली गठबंधन 20 सीट जीतेगा।
बिना मनोनीत के मदद से मेयर बनाने के लिए चाहिए 18 पार्षद
कांग्रेस अपने 14 साल के कार्यकाल के दौरान घोटालों में इतना व्यस्त रही कि उसने शहर के विकास कार्यों पर ध्यान ही नहीं दिया। जबकि भाजपा के मेयर अरुण सूद ने नगर निगम में 10 माह के कार्यकाल में काफी काम हुए हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा ने दावा किया कि पार्टी बिना मनोनीत पार्षदों के अगला मेयर बनाएगी। कई सीटों पर भाजपा तीसरे नंबर पर रहने वाली है। भाजपा के अपने नेता ही अपने उम्मीदवारों को हराने के लिए लगे हुए हैं।
नोटबंदी के कारण हो रही परेशानी का करार जवाब जनता कांग्रेस के पक्ष में मत देकर भाजपा को देगी। बसपा अध्यक्ष जगीर सिंह ने दावा किया कि उनकी पार्टी के 7 उम्मीदवार चुनाव जीतेंगे। ऐसे में इस बार उनके पार्षदों के बिना कोई भी दल अपना मेयर नहीं बना सकता है।