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Chandigarh News: बूचड़खाने पर्यावरण को पहुंचा रहे नुकसान, हाईकोर्ट ने तलब की स्टेटस रिपोर्ट
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-नूंह में मौजूद 6 बूचड़खानों को लेकर स्थानीय निवासियों ने दाखिल की है याचिका
-जानवरों के अवशेष, खून व अन्य केमिकल खुले में फेंकने का है आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। मेवात में मौजूद 6 बूचड़खानों से जानवरों के अवशेष, खून व अन्य केमिकल खुले में डालने से पर्यावरण को हो रहे नुकसान, बीमारी फैसले के खतरे को लेकर दाखिल याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए हरियाणा सरकार को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है। याचिका दाखिल करते हुए ऐमन, मुश्ताक व अन्य स्थानीय निवासियों ने एडवोकेट मोहम्मद अरशद के माध्यम से याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया कि मेवात म्युनिसिपल क्षेत्र में कुल 6 बूचड़खाने मौजूद हैं। इन बूचड़ख़ानों में से किसी के पास भी एमसी एक्ट के तहत आवश्यक मंजूरी नहीं है। बूचड़ खानों में जानवरों को काटने के बाद जो अंग फालतू होते हैं उन्हें याचिकाकर्ताओं के खेतों में फेंक दिया जाता है। इसके साथ ही जानवरों का खून वहां सफाई के लिए इस्तेमाल होने वाले पानी के साथ फैक्टरी के बाहर बहा दिया जाता है। इसके साथ ही कुछ केमिकल भी साथ ही फेंक दिए जाते हैं। इनके कारण दूषित पानी याचिकाकर्ताओं के खेतों में पहुंचता है और उनकी फसल बर्बाद हो जाती है। मांस के कारण लगातार लावारिस जानवरों की संख्या बढ़ती जा रही है। इस प्रकार की गंदगी के कारण लगातार बीमारी फैलने का खतरा बना रहता है। जरीन फूड प्राइवेट लिमिटेड, अल नावेद एग्रो फूड लिमिटेड, गित्वाको प्राइवेट लिमिटेड, यूनाइटेड प्राइवेट कंपनी, द फेयर एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड व एओवी एग्रो फूड प्राइवेट लिमिटेड को याचिका में पक्ष बनाया गया है। हाईकोर्ट ने मामले को बेहद गंभीर मानते हुए अगली सुनवाई पर इस मामले मे स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है।
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-जानवरों के अवशेष, खून व अन्य केमिकल खुले में फेंकने का है आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। मेवात में मौजूद 6 बूचड़खानों से जानवरों के अवशेष, खून व अन्य केमिकल खुले में डालने से पर्यावरण को हो रहे नुकसान, बीमारी फैसले के खतरे को लेकर दाखिल याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए हरियाणा सरकार को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है। याचिका दाखिल करते हुए ऐमन, मुश्ताक व अन्य स्थानीय निवासियों ने एडवोकेट मोहम्मद अरशद के माध्यम से याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया कि मेवात म्युनिसिपल क्षेत्र में कुल 6 बूचड़खाने मौजूद हैं। इन बूचड़ख़ानों में से किसी के पास भी एमसी एक्ट के तहत आवश्यक मंजूरी नहीं है। बूचड़ खानों में जानवरों को काटने के बाद जो अंग फालतू होते हैं उन्हें याचिकाकर्ताओं के खेतों में फेंक दिया जाता है। इसके साथ ही जानवरों का खून वहां सफाई के लिए इस्तेमाल होने वाले पानी के साथ फैक्टरी के बाहर बहा दिया जाता है। इसके साथ ही कुछ केमिकल भी साथ ही फेंक दिए जाते हैं। इनके कारण दूषित पानी याचिकाकर्ताओं के खेतों में पहुंचता है और उनकी फसल बर्बाद हो जाती है। मांस के कारण लगातार लावारिस जानवरों की संख्या बढ़ती जा रही है। इस प्रकार की गंदगी के कारण लगातार बीमारी फैलने का खतरा बना रहता है। जरीन फूड प्राइवेट लिमिटेड, अल नावेद एग्रो फूड लिमिटेड, गित्वाको प्राइवेट लिमिटेड, यूनाइटेड प्राइवेट कंपनी, द फेयर एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड व एओवी एग्रो फूड प्राइवेट लिमिटेड को याचिका में पक्ष बनाया गया है। हाईकोर्ट ने मामले को बेहद गंभीर मानते हुए अगली सुनवाई पर इस मामले मे स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है।