हौसला बुलंद है: निशानेबाज अंजुम मोदगिल को ओलंपिक में पदक न जीत पाने का अफसोस, कहा-कोशिश जारी रहेगी
अंजुम के मुताबिक समुद्र पास होने की वजह से वहां पर गर्मी काफी थी। क्वालीफाई राउंड में शुरू के दो शॉट खराब गए थे। उसके बाद सभी शॉट बिल्कुल ठीक थे, लेकिन शुरुआती दो खराब शॉट की भरपाई नहीं हो सकी और फाइनल में जगह बनाने से सिर्फ चार अंकों से चूक गई।
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टोक्यो ओलंपिक में महज चार अंक से फाइनल राउंड में पहुंचने से चूकने वाली चंडीगढ़ की निशानेबाज अंजुम मोदगिल निराश जरूर हैं, लेकिन उनके हौसले में कमी नहीं आई है। अंजुम का कहना है कि ओलंपिक में खेलने का सपना हर खिलाड़ी देखता है, लेकिन वहां तक पहुंचना आसान नहीं होता। मुझे गर्व है कि उस प्लेटफॉर्म तक पहुंची। यह मुकाबला भी अन्य निशानेबाजी के मुकाबलों की तरह ही था, लेकिन इसके साथ ओलंपिक का नाम जुड़ने से यह बड़ा बन गया। अपनी तरफ से सौ फीसदी कोशिश की। शायद वो दिन मेरा नहीं था, इसलिए मैं सही निशाना लगाने से चूक गई। इस मुकाबले से काफी कुछ नया सीखने को मिला, जिसका फायदा आगामी हर टूर्नामेंट में मिलेगा।
हार से भी काफी कुछ नया सीखा
अंजुम ने कहा कि पूरे देश को सबसे ज्यादा निशानेबाजी से ही उम्मीदें थीं और इस बार पहले के मुकाबले बड़ी संख्या में निशानेबाजों ने हिस्सा लिया था। हार तो हुई है और यह हार स्वीकार भी है, लेकिन इस हार से काफी कुछ नया सीखने को मिला है। हमेशा जीतते रहना जरूरी नहीं है, कुछ हार ऐसी भी होती है जो काफी कुछ नया सिखा जाती है। मुझे इस बात का अफसोस है कि मैं पदक नहीं जीत सकी, लेकिन बेहतर करने का प्रयास जारी रखूंगी। भारतीय हॉकी टीम के कांस्य पदक जीतने पर बधाई देते कहा कि टीम शानदार खेली।
इस कारण से शूट से चूकीं : मोदगिल
अंजुम के मुताबिक समुद्र पास होने की वजह से वहां पर गर्मी काफी थी। क्वालीफाई राउंड में शुरू के दो शॉट खराब गए थे। उसके बाद सभी शॉट बिल्कुल ठीक थे, लेकिन शुरुआती दो खराब शॉट की भरपाई नहीं हो सकी और फाइनल में जगह बनाने से सिर्फ चार अंकों से चूक गई। मैच के बाद बहुत निराशा हुई, क्योंकि चार अंक से फाइनल में जगह नहीं बना सकी, जबकि यह चार अंक हासिल किए जा सकते थे।
परिवार ने कहा- मेहनत में कोई कमी नहीं
अंजुम मोदगिल की मां शुभ मोदगिल जोकि निशानेबाजी में उनकी पहली गुरु थी, ने बताया कि मेरी बेटी शुरू से ही मेहनती रही है। ओलंपिक में पदक हाथ से निकल जाने से परिवार में निराशा जरूर है, लेकिन बेटी की मेहनत में किसी तरह की कमी नहीं थी। हार-जीत तो खेल का हिस्सा हैं। बेटी को अगामी टूर्नामेंट कराने की तैयारियां कराने में पूरा परिवार एक बार फिर से जुट गया है।