{"_id":"626eee8c3a2b77371d1cb3c7","slug":"service-with-duty-sandeep-has-helped-10-thousand-patients-chandigarh-news-pkl4493461185","type":"story","status":"publish","title_hn":"ड्यूटी के साथ सेवा, 10 हजार मरीजों की मदद कर चुके हैं संदीप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ड्यूटी के साथ सेवा, 10 हजार मरीजों की मदद कर चुके हैं संदीप
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंडीगढ़। वैसे तो पुलिस का काम लोगों की सुरक्षा करना है, लेकिन एक पुलिसकर्मी ऐसा भी है जो दूसरों के स्वास्थ्य का भी पूरा ध्यान रखता है। पीजीआई चौकी में तैनात सारंगपुर निवासी निरीक्षक संदीप मौन वर्ष 2011 से जरूरतमंद मरीजों को मदद कर रहे हैं। वर्ष 2020 में उनकी तैनाती पीजीआई चौकी में हुई, यहां उनकी पत्नी पहले से तैनात थीं। कोरोना काल में जैसे ईश्वर ने उन्हें एक मौका दिया। पति और पत्नी दोनों ने इस दौरान लोगों को पूरा सहयोग दिया। संदीप का कहना है अब तक वे लगभग 10 हजार मरीजों की मदद कर चुके हैं।
मूलरूप से हरियाणा में कैथल के मटौर गांव निवासी संदीप ने बताया कि गांव में उनके एक मित्र की सड़क हादसे में मौत हो गई थी। उनके चार बच्चे हैं। ऐसे में अहसास हुआ कि सक्षम होता तो उन्हें बचा लेता। बस इसके बाद प्रण कर लिया कि रुपयों और जानकारी के अभाव में किसी की जान नहीं जाने देंगे। इसके बाद उन्होेंने सोशल मीडिया पर एक पेज बनाया। इस दौरान वह पीजीआई की इमरजेंसी में तैनात स्टाफ से लगातार संपर्क में रहे। धीरे धीरे लोग जुड़ते गए और मदद की गुहार पहुंचती गई।
यह पेज उम्मीद की एक मिशाल बन चुक है। वर्तमान में हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और उत्तर प्रदेश तक से मदद मांगते हैं। उनका पर्चा कटवाना और यहां आने से लेकर जाने तक की पूरी जिम्मेदारी संदीप ही उठाते हैं।
विज्ञापन
कोरोना काल में संपर्क का मिला फायदा
सोशल मीडिया पर लगातार लोगों से जुड़ने और पीजीआई चौकी में तैनाती का फायदा कोरोना काल में मिला। जिस समय लोग अस्पताल आने वाले हर व्यक्ति को छूने से डर रहे थे, उस समय डटकर लोगों की मदद की। कभी दवाओं के लिए किसी के पास रुपये नहीं थे तो उन्हें मेडिकल स्टोर से दवा भी उपलब्ध कराईं। इसके लिए एक मेडिकल स्टोर संचालक से भी संपर्क कर जरूरतमंद लोगों को दवा देने की अपील की। इसका बकाया हर माह के अंत में संदीप स्वयं देते हैं।
पत्नी का मिला साथ तो आसान हो गई राह
संदीप का कहना है कि कई बार लोग पारिवारिक समस्याओं में उलझ जाते हैं। ऐसे में वह अपनी समस्याओं के निराकरण में ही उलझे रहते हैं और दूसरों की मदद के लिए उनके पास समय ही नहीं होता। उनके प्रण को पूरा करने में उनकी पत्नी ने पूरा सहयोग दिया। घर और ड्यूटी को पूरी जिम्मेदारी के साथ उन्होंने निभाया। यही कारण है लोगों की सेवा करने का पूरा मौका मिला। कोरोना काल में भी पति-पत्नी ड्यूटी के साथ मरीजों की मदद और घर भी देखते थे। उनका कहना है कि पिछले दो साल उनके जीवन की स्मृतियों में दर्ज हो गए हैं जिन्हें वे कभी भूल नहीं सकते हैं।
विज्ञापन
मूलरूप से हरियाणा में कैथल के मटौर गांव निवासी संदीप ने बताया कि गांव में उनके एक मित्र की सड़क हादसे में मौत हो गई थी। उनके चार बच्चे हैं। ऐसे में अहसास हुआ कि सक्षम होता तो उन्हें बचा लेता। बस इसके बाद प्रण कर लिया कि रुपयों और जानकारी के अभाव में किसी की जान नहीं जाने देंगे। इसके बाद उन्होेंने सोशल मीडिया पर एक पेज बनाया। इस दौरान वह पीजीआई की इमरजेंसी में तैनात स्टाफ से लगातार संपर्क में रहे। धीरे धीरे लोग जुड़ते गए और मदद की गुहार पहुंचती गई।
विज्ञापन
यह पेज उम्मीद की एक मिशाल बन चुक है। वर्तमान में हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और उत्तर प्रदेश तक से मदद मांगते हैं। उनका पर्चा कटवाना और यहां आने से लेकर जाने तक की पूरी जिम्मेदारी संदीप ही उठाते हैं।
विज्ञापन
कोरोना काल में संपर्क का मिला फायदा
सोशल मीडिया पर लगातार लोगों से जुड़ने और पीजीआई चौकी में तैनाती का फायदा कोरोना काल में मिला। जिस समय लोग अस्पताल आने वाले हर व्यक्ति को छूने से डर रहे थे, उस समय डटकर लोगों की मदद की। कभी दवाओं के लिए किसी के पास रुपये नहीं थे तो उन्हें मेडिकल स्टोर से दवा भी उपलब्ध कराईं। इसके लिए एक मेडिकल स्टोर संचालक से भी संपर्क कर जरूरतमंद लोगों को दवा देने की अपील की। इसका बकाया हर माह के अंत में संदीप स्वयं देते हैं।
पत्नी का मिला साथ तो आसान हो गई राह
संदीप का कहना है कि कई बार लोग पारिवारिक समस्याओं में उलझ जाते हैं। ऐसे में वह अपनी समस्याओं के निराकरण में ही उलझे रहते हैं और दूसरों की मदद के लिए उनके पास समय ही नहीं होता। उनके प्रण को पूरा करने में उनकी पत्नी ने पूरा सहयोग दिया। घर और ड्यूटी को पूरी जिम्मेदारी के साथ उन्होंने निभाया। यही कारण है लोगों की सेवा करने का पूरा मौका मिला। कोरोना काल में भी पति-पत्नी ड्यूटी के साथ मरीजों की मदद और घर भी देखते थे। उनका कहना है कि पिछले दो साल उनके जीवन की स्मृतियों में दर्ज हो गए हैं जिन्हें वे कभी भूल नहीं सकते हैं।