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Chandigarh में कोरोना रिपोर्ट ने किया परेशान: एक लैब में पॉजिटिव, दूसरी में निगेटिव
Wed, 16 Sep 2020 10:12 AM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Wed, 16 Sep 2020 10:12 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : पीटीआई
चंडीगढ़ के निजी लैब की कोरोना रिपोर्ट एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। सेक्टर-27 के एक व्यक्ति ने सेक्टर-10 स्थित दो निजी लैबों में अलग-अलग टेस्ट कराया था। एक लैब की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई तो दूसरे लैब की दूसरे लैब की रिपोर्ट निगेटिव आई। बता दें कि इससे पूर्व भी एक महिला की 2 अलग-अलग रिपोर्ट आने से मामले ने तूल पकड़ा था। स्थिति यह है कि एक ही व्यक्ति की अलग-अलग दो रिपोर्ट आने से कोरोना को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है।
सेक्टर-27 निवासी अमित सिंगला ने बताया कि वह बीते शनिवार को लेह से लौटे हैं। घर जाने से पहले उन्होंने सेक्टर-10 की अतुल्य लैब और एसआरएल लैब में अपने कोरोना टेस्ट का नमूना दिया। अतुल्य लैब की रिपोर्ट रविवार को पॉजिटिव आ गई जबकि एसआरएल की रिपोर्ट में उन्हें निगेटिव बताया गया है। अब परिवार ने डॉक्टर से बात की है, जिनका कहना है कि घबराने की कोई बात नहीं। एंटीबॉडी टेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, लगता है कि एक या दो माह पहले कोरोना हुआ होगा, लेकिन अब इसका असर फिलहाल नहीं है, लेकिन 2 अलग-अलग रिपोर्ट आने के बाद घर वालों के मन में अभी भी शंका है।
पुरानी खबर को याद किया तो दोनों जगह कराया टेस्ट
अमित ने बताया कि कोरोना संक्रमण के कारण परिवार के लोगों को समस्या न हो इसलिए वह एयरपोर्ट से सीधे सेक्टर-10 स्थित अतुल्य लैब पर पहुंचे। जहां उन्होंने अपना सैंपल दिया। फिर मन में आया कि पहले भी प्राइवेट लैब की जांच रिपोर्ट अलग-अलग आ चुकी है इसलिए एक अन्य एसआरएल लैब में भी नमूना दे दिया। उन्होंने बताया कि जो सुना था वही हुआ, एक लैब की रिपोर्ट पॉजिटिव व दूसरी की रिपोर्ट निगेटिव आ गई।
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सेक्टर-27 निवासी अमित सिंगला ने बताया कि वह बीते शनिवार को लेह से लौटे हैं। घर जाने से पहले उन्होंने सेक्टर-10 की अतुल्य लैब और एसआरएल लैब में अपने कोरोना टेस्ट का नमूना दिया। अतुल्य लैब की रिपोर्ट रविवार को पॉजिटिव आ गई जबकि एसआरएल की रिपोर्ट में उन्हें निगेटिव बताया गया है। अब परिवार ने डॉक्टर से बात की है, जिनका कहना है कि घबराने की कोई बात नहीं। एंटीबॉडी टेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, लगता है कि एक या दो माह पहले कोरोना हुआ होगा, लेकिन अब इसका असर फिलहाल नहीं है, लेकिन 2 अलग-अलग रिपोर्ट आने के बाद घर वालों के मन में अभी भी शंका है।
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पुरानी खबर को याद किया तो दोनों जगह कराया टेस्ट
अमित ने बताया कि कोरोना संक्रमण के कारण परिवार के लोगों को समस्या न हो इसलिए वह एयरपोर्ट से सीधे सेक्टर-10 स्थित अतुल्य लैब पर पहुंचे। जहां उन्होंने अपना सैंपल दिया। फिर मन में आया कि पहले भी प्राइवेट लैब की जांच रिपोर्ट अलग-अलग आ चुकी है इसलिए एक अन्य एसआरएल लैब में भी नमूना दे दिया। उन्होंने बताया कि जो सुना था वही हुआ, एक लैब की रिपोर्ट पॉजिटिव व दूसरी की रिपोर्ट निगेटिव आ गई।
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गर्भवती महिला को भी बताया था पॉजिटिव, अब सभी स्वस्थ
बता दें कि बीते दिनों सेक्टर-11ए स्थित अतुल्य हेल्थकेयर पर एक महिला ने कोरोना की जांच कराई थी। वहां 7 सितंबर को उन्होंने सैंपल दिया था। अगले ही दिन महिला की रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई थी। इसके बाद घर के अन्य 15 सदस्यों ने आनन-फानन में कोरोना जांच कराई थी, लेकिन उनकी रिपोर्ट निगेटिव आ गई थी। उसके बाद 9 सितंबर को महिला ने सेक्टर-24 स्थित एसआरएल डायग्नोस्टिक की फ्रेंचाइजी लैब पर टेस्ट कराया, जहां महिला की रिपोर्ट भी निगेटिव आ गई। उसके बाद महिला ने एक बच्चे को जन्म दिया। अब जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह से स्वस्थ हैं।
कांग्रेस पार्षद बबला ने लगातार कर रहे निजी लैब का विरोध
दोनों ही मामलों में विपक्ष के नेता देवेंद्र सिंह बबला ने आवाज उठाई है। इससे पहले भी प्रशासक को पत्र लिखकर उन्होंने निजी लैबों की मनमानी पर रोक लगाने की अपील की थी। बबला ने कहा था कि लैब वाले मनमाने रुपये ले रहे हैं और रिपोर्ट भी ठीक नहीं आ रही है। ऐसे में सभी सरकारी डिस्पेंसरी में यह टेस्ट की सुविधा शुरू होनी चाहिए।
कोरोना की जांच रिपोर्ट का अलग-अलग लैब में अलग-अलग आने के कई कारण हो सकते हैं। आरटीपीसीआर तरीके से की गई जांच में 30 प्रतिशत तक फॉल्स नेगेटिव आने की गुंजाइश रहती है। यानी इसमें रिपोर्ट पॉजिटिव भी नहीं होती और नेगेटिव भी पूरी तरह से नहीं होती। ऐसी स्थिति में मरीज को दोबारा जांच कराना पड़ता है। इसमें रिपोर्ट के पॉजिटिव आने की गुंजाइश ज्यादा रहती है। इसके अलावा सैंपल लेने के तरीके भी गड़बड़ रिपोर्ट आने के लिए काफी हद तक जिम्मेदार हैं। क्योंकि कई बार ट्रेंड स्टाफ न होने के कारण गलत तरीके से लिए गए सैंपल की रिपोर्ट भी अलग-अलग लैब में अलग-अलग परिणाम देती है।
- डॉ. आरएस बेदी, आईएमए के पूर्व अध्यक्ष
अलग-अलग लैब में लगाई गई मशीनों की जांच की क्षमता अलग-अलग होती है। ऐसे में कई बार एक लैब जिस मरीज की रिपोर्ट निगेटिव देता है, उसी मरीज की रिपोर्ट दूसरी लैब में पॉजिटिव आ जाती है। ऐसे में लैब पर आरोप लगाने की बजाय, यह ध्यान रखना जरूरी है कि अगर कोरोना के लक्षण आने के बावजूद भी रिपोर्ट निगेटिव आ रही हो तो 5 से 6 दिन के बाद उसी लैब में दोबारा जांच करानी चाहिए।
- विजय भाटिया, उपाध्यक्ष, अतुल्य लैब
कांग्रेस पार्षद बबला ने लगातार कर रहे निजी लैब का विरोध
दोनों ही मामलों में विपक्ष के नेता देवेंद्र सिंह बबला ने आवाज उठाई है। इससे पहले भी प्रशासक को पत्र लिखकर उन्होंने निजी लैबों की मनमानी पर रोक लगाने की अपील की थी। बबला ने कहा था कि लैब वाले मनमाने रुपये ले रहे हैं और रिपोर्ट भी ठीक नहीं आ रही है। ऐसे में सभी सरकारी डिस्पेंसरी में यह टेस्ट की सुविधा शुरू होनी चाहिए।
कोरोना की जांच रिपोर्ट का अलग-अलग लैब में अलग-अलग आने के कई कारण हो सकते हैं। आरटीपीसीआर तरीके से की गई जांच में 30 प्रतिशत तक फॉल्स नेगेटिव आने की गुंजाइश रहती है। यानी इसमें रिपोर्ट पॉजिटिव भी नहीं होती और नेगेटिव भी पूरी तरह से नहीं होती। ऐसी स्थिति में मरीज को दोबारा जांच कराना पड़ता है। इसमें रिपोर्ट के पॉजिटिव आने की गुंजाइश ज्यादा रहती है। इसके अलावा सैंपल लेने के तरीके भी गड़बड़ रिपोर्ट आने के लिए काफी हद तक जिम्मेदार हैं। क्योंकि कई बार ट्रेंड स्टाफ न होने के कारण गलत तरीके से लिए गए सैंपल की रिपोर्ट भी अलग-अलग लैब में अलग-अलग परिणाम देती है।
- डॉ. आरएस बेदी, आईएमए के पूर्व अध्यक्ष
अलग-अलग लैब में लगाई गई मशीनों की जांच की क्षमता अलग-अलग होती है। ऐसे में कई बार एक लैब जिस मरीज की रिपोर्ट निगेटिव देता है, उसी मरीज की रिपोर्ट दूसरी लैब में पॉजिटिव आ जाती है। ऐसे में लैब पर आरोप लगाने की बजाय, यह ध्यान रखना जरूरी है कि अगर कोरोना के लक्षण आने के बावजूद भी रिपोर्ट निगेटिव आ रही हो तो 5 से 6 दिन के बाद उसी लैब में दोबारा जांच करानी चाहिए।
- विजय भाटिया, उपाध्यक्ष, अतुल्य लैब